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पूर्व सैनिक सेवा परिषद की ओर से जमशेदपुर की वरिष्ठ पत्रकार अन्नी अमृता को मिला शौर्य सम्मान

कल अन्नी बहुत खुश थी, खुश होना भी चाहिए, अन्नी को कल शौर्य सम्मान मिला है, यह शौर्य सम्मान उस दिन मिला, जिस दिन भारत की महान वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मीबाई शहीद हो गई। जिनके बारे में सुप्रसिद्ध कवयित्री लिखती है – “अंग्रेजों के मित्र सिंधिंया ने छोड़ी रजधानी थी, खुब लड़ी मर्दानी वो तो झांसीवाली रानी थी।” ऐसे तो अन्नी को जमशेदपुर में बहुत सारे सम्मान समय-समय पर मिले हैं, पर इस  पुरस्कार से अन्नी कुछ ज्यादा ही चहकी,

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CM रघुवर को पुनः सत्ता दिलाने के लिए CMO सक्रिय, प्रभात खबर के संपादकों पर किया चोट, कराया स्थानान्तरण

भाजपा ने विधानसभा चुनाव जीतने के लिए लिये अभी से ही साम-दाम-दंड-भेद का सहारा लेना शुरु कर दिया हैं। इसी क्रम में सर्वप्रथम झारखण्ड के विभिन्न नगरों से प्रकाशित होनेवाले प्रभात खबर पर उसने पहला प्रहार किया है। जिसमें इसका सहयोग प्रभात खबर में काम करनेवाले लोगों ने भी खुलकर किया है। आश्चर्य इस बात की भी हैं, जो संपादक हर दम सीएम रघुवर के इशारे पर सीएमओ में हाजिर हो जाया करते थे,

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क्या कहते हैं 2019 में इस बार बारिश के भारतीय नक्षत्र?

पूरे देश में पड़ रही भीषण गर्मी ने सभी को बेचैन कर रखा है। इधर मानसून में हो रही देरी ने लोगों की नींद उड़ा दी हैं, सभी आकाश की ओर टकटकी लगाए हुए हैं कि कब काले-काले बादल आकाश में आए और धरती पर बरस कर सिर्फ धरती को ही नहीं, सभी के दिलों को ठंडक पहुंचाएं। जब भारत में सभ्यता का उदय हुआ, तो हमारे ऋषियों-मणीषियों ने अपने ज्ञान के आधार पर नक्षत्रों की भाषा को जानने की कोशिश की,

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जो आप 21 जून को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के दिन करेंगे, वह केवल व्यायाम है, न कि योग

इसमें कोई दो मत नहीं कि जो आप 21 जून को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के दिन करेंगे, वह केवल व्यायाम है, न कि योग, तो फिर योग है क्या? योग कसरत करने का नाम नहीं, योग व्यायाम करने का नाम नहीं, योग हाथ-पांव या सिर-गाल हिलाने का नाम नहीं। योग का मतलब है चित्त को विभिन्न वृत्तियों अर्थात् आकारों में परिणत होने से रोकना, जिसे उपनिषद ने कह डाला – योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः। तदा द्रष्टुः स्वरुपेSवस्थानम्।

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खेल को खेल ही रहने दें, उसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखें, खेल में कोई किसी का बाप नहीं होता

आज रांची से प्रकाशित एक अखबार ने पाकिस्तान के उपर भारत की शानदार जीत को राजनीतिक चश्मे से देखने में ज्यादा रुचि दिखाई। आम-तौर पर जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट का मैच होता हैं तो इस मैच को देखने का नजरिया लोगों को बदल जाता है, और यह सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट में ही देखने को मिलता है, जबकि भारत-पाकिस्तान के बीच केवल क्रिकेट ही नहीं, बल्कि और भी कई मैच खेले गये हैं,

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IPRD झारखण्ड ने बताई राज्य के लोक-कलाकारों की औकात, अब ठेकेदार निर्धारित करेंगे उनके भविष्य

एक कलाकार न तो पैसों का मोहताज होता है और न ही किसी ठाठ-बांट का, अपनी कलाकारी दिखाने के दौरान उसे जो भी मिल गया, उसी से वो खुश रहने की कला जानता हैं, तभी तो वो कलाकार है, पर राज्य के होनहार मुख्यमंत्री रघुवर दास और उनके आगे-पीछे घुमनेवाले लोगों की बात करें, तो उन्हें लगता है कि दुनिया की सारी ज्ञान उनके चरण-कमलों में आकर ही दम तोड़ देती हैं।

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भगवान बिरसा के नाम पर आज का रांची बंद पूर्णतः विफल, बिरसा के अनुयायियों ने जताई चिन्ता, दिखा आक्रोश

कल जिस प्रकार लाल झंडे और हरे झंडे का सम्मिश्रण और मशाल जुलूस रांची में दिखा था, जैसा जनाक्रोश देखने को मिला था, उससे लगा था कि आज रांची बंद का व्यापक असर देखने को मिलेगा, पर आज ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला, बंद का आंशिक असर देखा गया। शायद बंद करानेवालों को इस बात का आभास था कि सरकार और उनके नुमाइंदे तथा पुलिस उन्हें बेवजह निशाना बनायेगी,

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तालिबानी भाषा बोलने का अधिकार सिर्फ CM रघुवर को हैं, कृपया विपक्षी नेता ऐसी भाषा का प्रयोग न करें?

आज रांची से प्रकाशित बहुत सारे अखबारों में खबर पढ़ने को मिले, जिसमें भाजपा प्रवक्ता का बयान है कि राज्य में तालिबानी राज लाना चाहते हैं हेमन्त सोरेन। समाचार में लिखा है कि भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने हेमन्त सोरेन के उस ट्विट की आलोचना की है, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री के लिए अपशब्दों का प्रयोग करते हुए कहा था कि उन्हें रस्सी से बांधकर राज्य के बाहर छोड़ना चाहिए।

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बेचारे प्रदीप यादव, आज भाजपा में होते तो न उनके पीछे पुलिस होती और न ही वे कोई चुनाव हारते, निश्चय ही आराम से वे बम-बम कर रहे होते

बेचारे प्रदीप यादव, आज भाजपा में होते तो न उनके पीछे पुलिस होती और न ही वे कोई चुनाव हारते, निश्चय ही आराम से वे बम-बम कर रहे होते, सरकार उनकी जय-जयकार कर रही होती, उन्हे बचाने के लिए पूरा सिस्टम उनके आगे-पीछे लगा देती, उनके पीछे अगर कोई केस भी लगा होता तो उन केसों को हटाने के लिए जोर लगा दी होती।

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भगवान बिरसा की प्रतिमा के एक हाथ को असामाजिक तत्वों ने तोड़ डाला, पूरे राज्य में भड़का जनाक्रोश

अभी एक सप्ताह भी नहीं हुए, पूरा झारखण्ड गत् 9 जून को भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि मना रहा था, राज्य सरकार और उनके अधिकारी तथा कई भाजपा नेता भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर रहे थे और सेल्फियां ले रहे थे, उसे फेसबुक पर लगा रहे थे और आज देखिये क्या हो रहा है, रांची के लालपुर स्थित समाधिस्थल कोकर में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा की हाथ तोड़ डाली गई हैं।

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