जिस भोजन में स्वच्छता, ग्राह्य योग्य वस्तुएं तथा सम्मान सम्मिलित हैं, वही भोजन सर्वश्रेष्ठ है, ऐसे ही भोजन ग्रहणीय हैं
अनादिकाल से समस्त जीवों की पहली आवश्यकता – भोजन ही रही है। पशु और मनुष्य में भोजन को लेकर केवल एक ही अंतर है। पशु को सिर्फ भोजन चाहिए, वह भोजन कैसे उपलब्ध हुआ, उसकी वो चर्चा या उस पर ध्यान नहीं देता, जैसे भी उसे प्राप्त हुआ, उसे वो ग्रहण करता है और मनुष्य ऐसा नहीं करता। उसे भोजन चाहिए अवश्य, पर वो भोजन स्वच्छ, ग्राह्य योग्य तथा सम्मानपूर्वक होना चाहिए,
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