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जान लो भाजपाइयों, कोरोना काल और सीमा पर चीन की धमक के दौरान रैली की नौटंकी आपको बहुत महंगी पड़ेगी

भाजपाइयों गरम दूध से भरे बर्तन में निंबू की एक बूंद मत डालो, नहीं तो दुध फट जायेगा, वो पीने लायक नहीं रहेगा। हसुंआ के ब्याह में खुरपी के गीत मत गाओ, गीत वहीं गाओ, जो गाने लायक हो। जब देश कोरोना से लड़ रहा हैं, जब पूरा विश्व कोरोना से लड़ रहा हैं, तो इस कोरोना काल में कोरोना की बात करो, कैसे उससे मुक्ति मिले, इसका प्रयास करो। चीन ने जो किया और आपने जो किया, वह भी देश देख रहा हैं,

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क्रिया योग का अर्थ योगासन नहीं, ईश्वर की प्राप्ति हैः ईश्वरानन्द गिरि

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर यह जानना जरूरी है कि जिसे आज विश्व अपना रहा है, वह क्रिया योग है क्या और इसकी महिमा क्या है? जो लोग इसे अपना चुके हैं, वे निश्चय ही जानते होंगे कि यह हठ योग जैसा कुछ भी नहीं है, अपितु यह एक जीवन शैली है। जिससे आधुनिक विश्व को परमहंस योगानन्द ने परिचय कराया था। योगानन्द ने आम भारतीय को इससे अवगत कराने के उद्देश्य से पश्चिम बंगाल के आसनसोल के निकट दिहिका में योग विद्यालय की स्थापना 1917 में की,

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PM मोदी सर्वदलीय बैठक में सोशल डिस्टेसिंग का पालन कर रहे थे, उसी समय रांची में भाजपा के बडे़ नेता इसका धज्जियां उड़ा रहे थे

राज्यसभा का चुनाव कोई जीते, सवाल तो सिर्फ यह है कि इससे झारखण्ड को क्या मिल जायेगा? सवाल तो यह भी है कि इस बात की जानकारी तो सत्तापक्ष और विपक्ष में शामिल सभी विधायकों व उनसे जुड़े नेताओं को पता था कि जिस प्रकार की स्थितियां व परिस्थितियां हैं, झामुमो अपनी सीट आराम से निकाल लेगी और रही बात भाजपा की तो उसे बाकी मतों को अपनी ओर आकर्षित करने में ज्यादा दिमाग लगाना नहीं पड़ेगा, क्योंकि निर्दलीय सरयू राय जब देंगे तो भाजपा को ही अपना मत देंगे।

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भारतीयों द्वारा चीनी वस्तुओं के बहिष्कार से पस्त हुआ चीन, ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में शुरु किया रोना

भारत में चीन की गुंडागर्दी के खिलाफ एक स्वर से आवाज क्या उठी, कल तक भारत के खिलाफ हर जगह आग उगलनेवाले, भारत समेत कई देशों को आंख दिखानेवाले  चीन की घिग्घी ही बंद होने लगी। अब उसके “ग्लोबल टाइम्स” भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह, सोनम वांगचुक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, स्वदेशी जागरण मंच, तथा ऐसे ही सैकड़ों संगठन और लोगों के बयानों पर संपादकीय लिखने लगा है।

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कभी अमेरिका, कभी नेपाल-पाकिस्तान, आखिर चीन भारत से इतना डरा हुआ क्यों है, औकात पता चल गया क्या?

जब चीन स्वयं को इतना बड़ा शूरमा समझ ही रहा हैं तो फिर विधवा प्रलाप क्यों कर रहा हैं, वो बार-बार भारत को गीदड़ भभकी क्यों दे रहा हैं, कभी उसका ग्लोबल टाइम्स यह कह रहा है कि भारत को अमरीका भड़का रहा है। कभी कहता है कि अमेरिका भारत को झूठा दिलासा दिलाना चाह रहा है कि भारत के साथ अमेरिका सहित पश्चिमी देशों का समर्थन है, जबकि भारत ने न तो अमेरिका और न ही पश्चिमी देशों से समर्थन की मांग की है।

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विदेशी अखबारों में भारतीय सैनिकों के पराक्रम के चर्चे, और इधर मोदी विरोध के चलते भारत की अंग्रेजी मीडिया ने किया परहेज

भारत और चीन के सैनिकों के बीच दो दिन पहले गलवान घाटी में हिंसक संघर्ष हुए, जिसमें बीस भारतीय सैनिक शहीद हो गये और 43 चीनी सैनिक भारतीय सैनिकों के हाथों मारे गये। बताया जाता है कि ये घटना तब हुई, जब भारतीय सैनिक ये देखने को जा रहे थे कि जो वायदा चीन के सैन्य अधिकारियों ने भारत के सैन्य अधिकारियों से किया था, उसे पूरा किया या नहीं, लेकिन चीनी सैनिकों ने अपने आदत के मुताबिक धोखे से भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया।

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कोरोना काल में शानो-शौकत में जीवन व्यतीत करनेवाले केलेवाले भाई के घर दीपक के लिए वोटों की जुगाड़

जिस राज्य में ऐसे शानो-शौकत से जिंदगी बसर करनेवाले नेता होते हैं। वहां की जनता भूखों मरने और पलायन करने के लिए मजबूर होती हैं। वहां के संसाधनों पर दूसरे देशों/राज्यों के निवासियों का कब्जा होता है। वहां के निवासी स्वास्थ्य सेवा के लिए दूसरे राज्यों के चिकित्सालयों पर निर्भर रहते हैं। वहां के निवासी दूसरे राज्यों के नगरों/महानगरों में रहनेवाले संभ्रांत व धनाढ्य परिवारों के जूठन साफ करने का काम करते है।

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जो काम भाजपाई ताउम्र नहीं कर सकें, वो काम CM हेमन्त सोरेन ने कुछ दिनों में ही करके दिखा दिया

सीखों भाजपाइयों, सीखिये हाथी उड़ानेवाले राज्य के पूर्व होनहार मुख्यमंत्री रघुवर दास। सीखने में कोई बुराई नहीं, देश और राज्य सेवा के नाम पर आप लोगों ने कितनी नौटंकी की हैं, कितने हाथी उड़ाए हैं, कितने विदेशी टूर किये हैं, कहां-कहां शंघाई टावर बनाया, वह किसी से छुपा नहीं, और इतनी नौटंकी के बावजूद भी झारखण्डवासियों को जीवन जीने के लिए कितने पापड़ बेलने पड़े हैं, वो भी किसी से छुपा नहीं हैं, पर हेमन्त ने क्या किया?

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ये तो “बिरसा का गांडीव” के संपादक का “संपादकीय पाप” है, जिसका कोई प्रायश्चित ही नहीं

दिनांक 09 जून 2020, पूरा झारखण्ड भगवान बिरसा मुंडा का शहादत दिवस मना रहा था, आशा की जा रही थी कि रांची से प्रकाशित वे अखबार जो भगवान बिरसा के नाम का खुलकर अपने अखबार के हित में सदुपयोग करते हैं, कम से कम इस दिन भगवान बिरसा का मान रखेंगे, उनके मूल्यों को आत्मसात करेंगे और वहीं करेंगे, जो भगवान बिरसा ने सिखाया। अरे आम दिनों में जो करते हैं, सो करिये न, कौन मना कर रहा हैं, पर भगवान बिरसा के शहादत दिवस को तो छोड़ देते हैं,

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हेमन्त इन दिनों अगर चर्चा में हैं, तो कोई ऐसे ही नहीं, बल्कि उन्होंने काम ही कुछ ऐसा किया हैं

जरा दिमाग पर जोर डालियेगा, वह भी कुछ ज्यादा महीने नहीं, बल्कि छह महीने पहले चले जाइये, क्या होता था झारखण्ड में? राज्य के उस वक्त के मुख्यमंत्री रघुवर दास के आगे, हेमन्त सोरेन को झारखण्ड के विभिन्न जिलों से लेकर राजधानी तक की अखबारें भाव नहीं देती थी, यहां तक की चैनल और पोर्टलों तक से हेमन्त सोरेन को गायब करने-कराने का प्रयास किया जाता था, और आज क्या हो रहा है, उन सारे अखबारों-चैनलों व पोर्टलों में हेमन्त सोरेन छाये हुए हैं, आखिर क्यों?

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