ये तो “बिरसा का गांडीव” के संपादक का “संपादकीय पाप” है, जिसका कोई प्रायश्चित ही नहीं
दिनांक 09 जून 2020, पूरा झारखण्ड भगवान बिरसा मुंडा का शहादत दिवस मना रहा था, आशा की जा रही थी कि रांची से प्रकाशित वे अखबार जो भगवान बिरसा के नाम का खुलकर अपने अखबार के हित में सदुपयोग करते हैं, कम से कम इस दिन भगवान बिरसा का मान रखेंगे, उनके मूल्यों को आत्मसात करेंगे और वहीं करेंगे, जो भगवान बिरसा ने सिखाया। अरे आम दिनों में जो करते हैं, सो करिये न, कौन मना कर रहा हैं, पर भगवान बिरसा के शहादत दिवस को तो छोड़ देते हैं,
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