Author: Krishna Bihari Mishra

अपनी बात

बिहारी महिलाओं का मजाक उड़ानेवाली मैत्रेयी को बिहारी महिला रत्ना पुरकायस्था का करारा जवाब

बिहार की महिलाओं को अपमानित करनेवाली तथा उनका मजाक उड़ानेवाली साहित्यकार मैत्रेयी पुष्पा अब खुद मजाक बन कर रह गई है। बिहार की तेजतर्रार संभ्रात महिलाएं इसे अपनी आन-बान-शान से जोड़ लिया है। वे संयुक्त रुप से सोशल साइट पर उनके बयान का मुंहतोड़ जवाब दे रही है। चूंकि आजकल हर बात में, खुद को प्रगतिशील कहलाने के चक्कर में कई वामपंथी महिलाएं अथवा खुद को प्रगतिशील कहलाने में ज्यादा …

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धर्म

अभिनन्दन, भगवान भास्कर एवं छठि मइया का…

माथे पर पीले कपड़ों से बांधे दौरा-सुप ले जाते विभिन्न जलाशयों की ओर बढ़ते लोगों, पियरी पहने और हाथ में लोटा लिए छठव्रतियों का समूह और ठीक उसके पीछे बड़ी संख्या में छठ की पारंपरिक गीतों को गाती महिलाओं का समूह बरबस आपको अपनी ओर खींच लेती है। आज सूर्य सप्तमी है, आज उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य समर्पित कर, छठव्रतियों ने व्रत तोड़ दिया है और सभी अपने- अपने घरों में जाकर भगवान भास्कर और छठि मइया को …

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अपनी बात

मैत्रेयी ने किया बिहारी महिलाओं का अपमान, सिंदूर लगाने पर बिहारी महिलाओं का उड़ाया मजाक

जब आपके हृदय में, स्वयं को एक बहुत बड़ा साहित्यकार होने का अहं स्थापित हो जाये और इस अहं के स्थापित होने के बावजूद, हालात ऐसे हो जाये कि कोई कुत्ता भी आपको न पूछे, तो बस आपको बड़ा साहित्यकार पुनः स्थापित करने के लिए या ऐहसास दिलाने के लिये, ज्यादा कुछ करने की जरुरत नहीं हैं। बस, मूर्ख हिन्दूओं और उनके महिलाओं पर चोट कर दीजिये, बस लीजिये तुरंत आप लोकप्रियता के सारे पायदान को पार कर …

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धर्म

आओ छठ मनाएं पर कैसे?

आओ छठ मनाएं, पर कैसै? क्या अखबार पढ़कर या चैनल देखकर या बेसिर-पैर के छठगीतों को सुनकर, या नेताओं द्वारा स्वयं के पापों को धोने के लिए चलाये जा रहे छठसामग्रियों का दान लेकर, फैसला आपको करना है… ऐसा नहीं कि आप पहली बार छठ कर रहे है, आपके पहले भी लोगों ने छठ किया है, आनेवाले समय में भी लोग छठ करेंगे, पर जब भाव न होकर, छठव्रत बाह्याडंबर और पाखंड का शरण ले लें तो फिर वह छठ, छठ नहीं रह जाता,

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अपनी बात

CM और मुख्य सचिव को भूख के मुद्दे पर कटघरे में खड़ा करनेवाले मंत्री को हुआ दिव्य ज्ञान

कभी आपने त्रेतायुग के ‘रघुवर’ के शासन में भूख से मौत सुना है? कभी आपने ‘रघुवर’ के ‘दास’ यानी ‘हनुमान’ के कार्यस्थली ऋष्यमूक पर्वत पर  भूख से मौत की खबर सुनी है? कभी आपने ‘सरयू’ के तट पर किसी को भूख से तड़प-तड़प कर मरने की कथा सुनी है? अगर नहीं, तो फिर आपने ये कैसे समझ लिया कि इस कलियुग में जहां ‘रघुवर’ और ‘सरयू’ एक साथ बैठे हो, शासन का आनन्द ले रहे हो, वहां भूख से मौत हो जायेगी?  

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अपनी बात

विजय पाठक का फतवा 2100 दीजिये, प्रेस क्लब का सदस्य बनिये, पत्रकारों ने जताया कड़ा विरोध

प्रभात खबर के स्थानीय संपादक और रांची प्रेस क्लब के मनोनीत सदस्य विजय पाठक ने कल फतवा जारी किया, कि जो 2100 रुपये जमा करेगा, वहीं रांची प्रेस क्लब का सदस्य बनेगा, जो 2100 रुपये जमा नहीं करेंगे, वे सदस्य नहीं बन पायेंगे और न ही उन्हें वोट देने का अधिकार मिलेगा। आज विजय पाठक का फतवा सभी अखबारों में छपा हैं। विजय पाठक ने कहा है कि पत्रकार अपनी सुविधानुसार इस राशि को दो चरणों में दे सकते है,

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राजनीति

मुरझाते कमल को खिलाने में अपनी पूरी ताकत झोक दिया एक झामुमो विधायक ने

झारखण्ड में भारतीय जनता पार्टी की लोकप्रियता में आ रही गिरावट से चिंतित झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के एक बड़े नेता ने भाजपा को पूरे राज्य में मजबूत करने का फैसला कर लिया है। झामुमो के इस बड़े नेता ने, इसके लिए छठ व्रत को ही निशाने पर ले लिया है, ताकि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा को लोग हिन्दू विरोधी, बिहारी विरोधी मान लें और अपने मन में इस पार्टी के प्रति ऐसी शत्रुता पाल लें कि लाख चाहने के बावजूद भी…

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धर्म

भीड़ त दीखी पर छठि मइया ना दिखाई दीहे…

अल कर, बल कर, छठ पर आर्टिकल, लिख चल… अल कर, बल कर, छठ पर, अलबल बोल चल… अल कर, बल कर, छठ पर रिपोर्टिंग कर चल… टीवी पर अनाप-शनाप बक चल…एक बार फिर, पिछले कई दिनों से हमारे आंख-कान दोनों पक गये… अखबारों और टीवी चैनलों तथा गुगुल पुराणों ने छठ महापर्व की धज्जियां उड़ानी शुरु कर दी है… जितने अखबार, उतनी बुद्धि, जितने टीवी उतनी बक-बक और सभी ने अपने ज्ञान से छठ की ऐसी-तैसी करनी शुरु कर दी

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राजनीति

रघुवर सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संपूर्ण विपक्ष का महाजुटान

जब राज्य के सारे मीडिया हाउस मुख्यमंत्री रघुवर दास की चरणवंदना कर रहे हो, जहां राज्य की गरीब जनता अनाज के अभाव में भूख से दम तोड़ रहे हो, जहां किसान आत्महत्या कर रहे हो, जहां गरीब जनता के सपने तिल-तिल कर मर रहे हो, जहां विपक्ष की आवाज को दबाने का भरपूर प्रयास किया जा रहा हो, वहां विपक्ष की राजनीति करना खतरे से खाली नहीं है, फिर भी राज्य की सभी विपक्षी संगठनों एवं जनसंगठनों की एकसाथ जुटान काफी मायने रखती है।

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राजनीति

कृषि मंत्री का मुस्लिमों पर और मुख्यमंत्री का चर्च पर वार

एक ओर पूरे देश में भूख से मरी 11 वर्षीया संतोषी और वृद्ध रिक्शाचालक वैद्यनाथ दास की चर्चा जोरों पर है, पर इन सबसे बेफिक्र अगर कोई इस राज्य में है तो एक कृषि मंत्री रणधीर कुमार सिंह तो दूसरे हमारे राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास। इनका इनसे कोई लेना देना नहीं, ये तो मुस्लिम और चर्च से बाहर ही नहीं निकलना चाहते, क्योंकि वे जानते है कि भूख से हुई मौत से उनका अपना असली चेहरा उजागर होता है…

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