मुरझाते कमल को खिलाने में अपनी पूरी ताकत झोक दिया एक झामुमो विधायक ने

झारखण्ड में भारतीय जनता पार्टी की लोकप्रियता में आ रही गिरावट से चिंतित झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के एक बड़े नेता ने भाजपा को पूरे राज्य में मजबूत करने का फैसला कर लिया है। झामुमो के इस बड़े नेता ने, इसके लिए छठ व्रत को ही निशाने पर ले लिया है, ताकि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा को लोग हिन्दू विरोधी, बिहारी विरोधी मान लें और अपने मन में इस पार्टी के प्रति ऐसी शत्रुता पाल लें कि लाख चाहने के बावजूद भी…

झारखण्ड में भारतीय जनता पार्टी की लोकप्रियता में आ रही गिरावट से चिंतित झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के एक बड़े नेता ने भाजपा को पूरे राज्य में मजबूत करने का फैसला कर लिया है। झामुमो के इस बड़े नेता ने, इसके लिए छठ व्रत को ही निशाने पर ले लिया है, ताकि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा को लोग हिन्दू विरोधी, बिहारी विरोधी मान लें और अपने मन में इस पार्टी के प्रति ऐसी शत्रुता पाल लें कि लाख चाहने के बावजूद भी बाहर से आकर, झारखण्ड में बसे लोग झारखण्ड मुक्ति मोर्चा को आनेवाले चुनाव में वोट ही न देने पाये तथा झामुमो एक बार फिर सत्ता में आने के बजाय, विपक्ष में ही रहने को मजबूर हो जाये।

यह नेता हैं – चंपई सोरेन। इसने बड़ी सोची-समझी रणनीति के लिए छठ महाव्रत को चुना है और इस व्रत के खिलाफ यहां के रहनेवाले ग्रामीणों को इतना भड़का दिया, ऐसा नफरत का बीज बो दिया कि अब कोई ग्रामीण दूसरे समुदाय की बातों को सुनने को तैयार ही नहीं। जैसे ही चंपई सोरेन के इस घटिया स्तर की मानसिकता की बात भाजपा को मिली, भाजपा की बांछे खिल गई, भाजपा के लोगों के लोगों में नवजीवन का संचार हो गया, बैठे ही बैठे उन्हें नया मुद्दा मिल गया और वे खुश होकर, सड़कों पर आ गये।

जरा देखिये, झामुमो के चम्पई सोरेन ने क्या गुल खिलाया है? लोग बता रहे हैं कि जुगसलाई, बागबेड़ा समेत आस-पास के करीब 20 हजार श्रद्धालुओं को झिंलिंगगोड़ा होकर खरकई नदी छठ घाट जाने में इस बार दिक्कत होगी, क्योंकि ग्रामीणों ने छठव्रतियों के घाट जानेवाले रास्ते पर रोक लगा दी है और ये सब हुआ है झामुमो नेता चंपई सोरेन के इशारे पर। मामले को लेकर तनाव भी व्याप्त है। आज तक कभी ग्रामीणों ने किसी को आने-जाने पर रोक नहीं लगाया था।

आम तौर पर यह भारतीय परंपरा रही है कि कोई भी व्रत-त्यौहार आने पर लोग एक दूसरे की मदद करते है, एक दूसरे की सेवा करते है। अब पहला मौका देखने को मिल रहा है कि एक नेता के इशारे पर ग्रामीणों का समूह किसी पर्व को संपन्न कराने में सहयोग न देकर अड़ंगा लगा रहा है, और वह भी एक नेता के इशारे पर।

चंपई सोरेन चाहते है कि छठव्रती गांव के रास्ते न चलकर वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करें। वे कहते है कि वैकल्पिक मार्ग तैयार करने के लिए स्थानीय प्रशासन को कहा गया है। हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि वे छठ आने के पूर्व तक वैकल्पिक मार्ग बना देगा, पर दूसरी ओर कई सामाजिक संगठनों ने इसे चंपई सोरेन की साजिश बताया, तथा इससे सामाजिक विद्वेष फैलने की संभावना करार दिया।

भोजपुरी नवचेतना मंच ने झामुमो नेता चंपई सोरेन की इस हरकत की कड़ी आलोचना की है तथा इसके कारण चंपई सोरेन का पुतला भी फूंका है। भाजपा प्रवक्ता अंकित आनन्द ने पर्व त्यौहार का विरोध किये जाने पर झामुमो विधायक चंपई सोरेन की कड़ी आलोचना करते हुए, इसे ओछी मानसिकता बताया। भाजपा सरायकेला के महामंत्री गणेश महाली ने चंपई सोरेन पर आरोप लगाया कि वे एक बहुत बड़ी राजनीतिक साजिश के तहत ऐसा कर रहे है, जिससे समाज के हर तबके में आक्रोश है। बागबेड़ा प्रखण्ड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रमन खां ने भी चंपई सोरेन की इस हरकत की कड़ी आलोचना की है।

कुछ भी हो, बीस हजार से भी ज्यादा छठव्रतियों को उनके व्रतोपवास में अवरोधक बनकर आने में झामुमो कितना फायदा उठायेगी, झामुमो सोच लें, पर इतना तो तय है कि इस हरकत से झामुमो को नुकसान छोड़कर फायदा नहीं ही होगा, क्योंकि नफरत की खेती से, कोई लाभ का फसल आज तक नहीं काट पाया, ये झामुमो को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।

Krishna Bihari Mishra

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