वाह रे CM, दूसरे दल खानदानी तंत्र विकसित करें तो गलत, और भाजपा करें तो सहीं…

झारखण्ड में सिर्फ एक ही व्यक्ति, जिनका नाम रघुवर दास है और पूरे देश में एक ही दल, जिसका नाम भाजपा है, राजनीति में पूरी तरह दूध से धुला हैं, ये कभी गलत करते ही नहीं हैं और अगर गलत कर भी दिया तो आप इन पर अंगूली नहीं उठा सकते, क्योंकि ये साक्षात इस कलियुग के भगवान तथा एकमात्र देशोद्धारक व झारखण्डोद्धाकर है।

झारखण्ड में सिर्फ एक ही व्यक्ति, जिनका नाम रघुवर दास है और पूरे देश में एक ही दल, जिसका नाम भाजपा है, राजनीति में पूरी तरह दूध से धुला हैं, ये कभी गलत करते ही नहीं हैं और अगर गलत कर भी दिया तो आप इन पर अंगूली नहीं उठा सकते, क्योंकि ये साक्षात इस कलियुग के भगवान तथा एकमात्र देशोद्धारक व झारखण्डोद्धाकर है।

जरा देखिये, दो दिन पहले की बात है, जनाब सीएम रघुवर दास, पटना में तेली साहू समाज के एक सम्मेलन में शिरकत करने गये थे, जनाब सीएम रघुवर दास, स्वयं भी तेली साहू समाज से आते हैं और जहां भी तेली साहू समाज की रैली या सम्मेलन होता हैं, चाहे वह रैली महाराष्ट्र, छतीसगढ़, दिल्ली, बिहार, झारखण्ड या देश के किसी भी कोने में क्यों न हो, बड़ी श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करने से ही देश और झारखण्ड मजबूत होगा।

पटना के ही तैली साहू समाज की रैली में उन्होंने एक बयान दिया कि देश में तेजी से खानदानीतंत्र की बीमारी फैल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में हर साल, दो साल पर एक नई बीमारी का वायरस फैलता है। 2018 में एक नया रोग आया है, वह है सत्ता का रोग। विपक्ष के हर दल का मुखिया इस रोग की चपेट में है।

लोकतंत्र की हत्या करनेवाली पार्टी कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, बसपा की मायावती, सपा के अखिलेश यादव एवं उनके पिता मुलायम सिंह यादव पर भी इस संक्रमण का प्रभाव है। ऐसा ही रोग बिहार के एक लड़के को भी लग गया है कि वह भी पीएम बन सकता है, यानी उनका इशारा लालू यादव के बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव की ओर था।

वे अपने सोशल साइट फेसबुक में जातीय रैली का फोटो लगाते हुए, एक बयान पोस्ट करते हैं कि कांग्रेस पार्टी में मां हटीं तो बेटे आ गए। मुलायम हटे तो अखि‍लेश आ गए। ममता बनर्जी को देखि‍ए अपने भतीजे को परफॉर्म कराने में लगी है। झारखण्ड में देखि‍ए, गुरुजी अध्यक्ष हैं, बेटा कार्यकारी अध्यक्ष है,ये खानदानी तंत्र है। 2019 के चुनाव में लोकतंत्र बनाम ख़ानदानी तंत्र का मुक़ाबला होगा, पर ये बयान देते ये भूल जाते है कि जिस पार्टी में वे हैं, वहां भी खानदानी तंत्र का बीजारोपण हो चुका हैं, और उनकी पार्टी के कई नेता इसके शिकार हैं और इसका लाभ ले रहे हैं।

वे खुद भी अपने बेटे ललित दास को भी अभी से ही राजनीति के तिकड़म सिखाने शुरु कर दिये हैं, ताकि उनके जीते-जी, वह भी राजनीति में खुद को इस तरह फिट कर लें, ताकि वह भी आराम से ठाठ-बांट की जिंदगी जी सकें, इसीलिए उनके बेटे ललित दास को भी टाटा की नौकरी में उतनी दिलचस्पी नहीं, जितनी सामाजिक क्रियाकलापों में खूब मन लग रहा हैं, ललित दास के कार्यक्रम में आइएएस/आइपीएस भी रुचि लेते है, क्योंकि वे जानते है कि ललित नाराज तो उनकी कुर्सी भी खतरे में।

अब जरा मुख्यमंत्री रघुवर दास बताएं कि शिबू सोरेन,अपने बेटे हेमन्त सोरेन को, सोनिया गांधी राहुल गांधी को, लालू यादव अपने बेटे तेजस्वी यादव को प्रोजेक्ट करें तो गलत और आपके नेता यहीं कुकर्म करें तो सही कैसे, आप खुद अपने बेटे को राजनीति का ककहरा सिखाते हुए, उसे प्रोजेक्ट करने की अभी से तैयारी शुरु करने प्रारम्भ कर दिये, वह सही कैसे?

क्या ये सही नहीं है कि भाजपा की ही वसुंधरा राजे सिंधिया, जो राजस्थान की मुख्यमंत्री है, वह अपने बेटे दुष्यंत सिंह को प्रोजेक्ट करते हुए, अपने पावर का उपयोग करते हुए, उसे झालावाड़ संसदीय सीट से सांसद बनवा दिया। क्या ये सही नहीं कि केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने बेटे पंकज सिंह को नोएडा से विधायक बनवा दिया, क्या ये सही नहीं कि कभी लखनऊ संसदीय सीट से सांसद रहे वरिष्ठ भाजपा नेता लाल जी टंडन का बेटा आशुतोष टंडन उर्फ गोपाल जी टंडन, लखनऊ पूर्व से विधायक हैं तथा उत्तर प्रदेश राज्य का स्वास्थ्य मंत्री हैं। क्या ये सही नहीं कि राजस्थान के राज्यपाल, वरिष्ठ भाजपा नेता कल्याण सिंह का बेटा राजवीर सिंह एटा से सांसद हैं।

यानी आप कुकर्म करो, आपके नेता अपने बेटे-परिवार को प्रोजेक्ट करें, अपने पावर का इस्तेमाल करते हुए, उन्हें जनता के माथे पर चढ़ा दें, तो बहुत बढ़िया और दूसरे करें तो गलत, भाई मुख्यमंत्री रघुवर दास जी, आप कौन सा चश्मा प्रयोग करते हैं, क्यो जनता को इतना बेवकूफ आप समझते हैं, अगर आप बेवकूफ समझते हैं तो समझते रहिये।

हमें लगता है कि आप जनता को बेवकूफ ही समझते हैं, तभी तो जातिवाद की राजनीति खुलकर कर रहे हैं, हाथी उड़ा दे रहे हैं, आपके लाख प्रयासों के बावजूद कोई निवेश नहीं होता और झारखण्ड को स्वच्छता के लिए बेस्ट परफार्मिंग स्टेट का खिताब मिलने के बावजूद यहां चिकनगुनिया और डेंगू के बड़े पैमाने पर मिल रहे मरीज बता देते हैं कि यहां स्वच्छता का क्या हाल है? आप बकते रहिये, जातिवाद का जहर फैलाते रहिये, दूसरों में खोट देखते रहिये, पर आपको शायद नहीं मालूम कि, जनता आपका इलाज करने के लिए 2019 का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।

Krishna Bihari Mishra

One thought on “वाह रे CM, दूसरे दल खानदानी तंत्र विकसित करें तो गलत, और भाजपा करें तो सहीं…

  1. CM bahut hi jatiwad grast hai.apny jati ke bhrst adhikario ko bachaty hai aur khas jhgah apni jatio ko bhaithaty hai.CMO.jnswand me Sunil wernwal,Gupta,.esi tarah dagi promote IAS Manoj Kumar nidesak smaj klyan ko apny nigrani vivag me bacha rahy.JSSC me apni jati ko tainati kr rahy.ye jhanch ki visay hai.

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