क्या ‘आम आदमी पार्टी’ और ‘दैनिक भास्कर’ झारखण्ड की जनता की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब हो पायेंगे?

सर्वप्रथम 9 दिसम्बर 2023 दिन शनिवार को रांची से प्रकाशित दैनिक भास्कर का पृष्ठ संख्या 11 देखिये। दैनिक भास्कर ने अपने विज्ञापनदाता या यों कहिये उसके अन्नदाता पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को वो पृष्ठ बड़ी ही श्रद्धा भाव से समर्पित किये हैं। ठीक उसी प्रकार जैसे एक भक्त अपने भगवान को अपनी श्रद्धा निवेदित करता है।

इस पृष्ठ में भगवंत सिंह मान की आरती उतारी गई है। खूब जमकर उनके भजन गाये गये हैं और उन भजनों को समाचार का रुप दे दिया गया है। उपर में एक कोने में छोटे से अक्षरों में वो भी जब आप बारीकी से ढूंढेंगे तब एक जगह लिखा मिलेगा – ‘इम्पैक्ट फीचर’ और बस इसी दो शब्दों से दैनिक भास्कर ने लगता है कि अपने पाप धोने का एक तरह से काम कर दिया है। ताकि वो लोगों को कह सकें कि यह पृष्ठ विज्ञापन पृष्ठ है न कि समाचार से संबंधित पृष्ठ।

अब सवाल उठता है कि दैनिक भास्कर का आम पाठक इम्पैक्ट फीचर का सही अर्थ समझता है? जो दैनिक भास्कर समझता है। क्या अंग्रेजी जानने व समझनेवाले इम्पैक्ट फीचर का मतलब वहीं बतायेंगे, जैसा कि दैनिक भास्कर बतायेगा? जिस राज्य/देश की जनता (इसमें पढ़े-लिखें, अनपढ़, गरीब-अमीर, अमीर मतलब धीरज साहू जैसा जिसके घर से करोड़ों नोट के बंडल मिल रहे हैं, सब शामिल हैं) दैनिक भास्कर के चाय की छन्नी और चाय बनाने वाली बर्तन, मग, टब, बाल्टी, मसाले के चक्कर में अपना दिमाग गिरवी रखकर अखबार की बुकिंग कर देती हैं, वो क्या जनता ये समझ पायेगी कि इम्पैक्ट फीचर का मतलब क्या होता है?

हालांकि राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जिस राज्य/देश की जनता लालची हो जाती है। उस राज्य/देश में दैनिक भास्कर जैसे अखबार या अखबारों का समूह फलते-फूलते हैं तथा जब तक ये उस राज्य/देश में रहते हैं। उन नागरिकों का मन-मस्तिष्क में गंदगी फैलाते रहते हैं। इसमें कोई किन्तु-परन्तु नहीं हैं। नहीं तो जब विज्ञापन के नाम पर ही सब कुछ छपना-छपाना हैं तो उन सारी चीजों को विज्ञापन के रुप में ही क्यों न अखबार प्रदर्शन करता है और उस पृष्ठ पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिख देता है कि यह पृष्ठ विज्ञापन का पृष्ठ है। ठीक उसी प्रकार जैसे आजकल सिनेमा में जब कोई अभिनेता/अभिनेत्री अल्कोहल या सिगरेट का उपयोग कर रहा होता हैं तो नीचे लिख दिया जाता है कि अल्कोहल या सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

अब बात आम आदमी पार्टी की। ये वहीं आम आदमी पार्टी है न जिसकी बुनियाद ही भ्रष्टाचार के खिलाफ लिखी गई थी। ये वहीं आम आदमी पार्टी है न जिसे दिल्ली की जनता ने अपने माथे पर बिठाया। ये वहीं आम आदमी पार्टी है न, जिसके नेताओं ने पार्टी का नाम ही आम आदमी रखा ताकि इसके आचार-विचार आम आदमी जैसे हो। ये वहीं आम आदमी पार्टी है न, जिसने अपना चुनाव-चिह्न झाड़ू रखा था ताकि वो देश/राज्य से भ्रष्टाचार का सफाया कर सकें। लेकिन जब इसे दिल्ली व पंजाब की सत्ता मिली तो ये कर क्या रहा है? ये वो सारा काम कर रहा हैं, जो आम आदमी तो नहीं ही कर सकता।

ये अपना चेहरा चमकाने के लिए लाखों नहीं, करोड़ों फूंक रहा हैं और वो भी नीतिगत तरीके से नहीं, अनैतिक तरीके से। जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए। ताकि लोग समझ सकें कि पंजाब और दिल्ली तो देश के अन्य राज्यों की तरह नहीं, बल्कि कुछ विशेष ही हैं और इसके लिए ये पेड न्यूज देकर अखबारों से अपनी चरणवंदना करवा रहे हैं और अखबारों के समूह चंद पैसों की लालच में चरणवंदना कर भी रहे हैं और दोनों मिलकर देश/राज्य की जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। लेकिन सवाल अभी भी यहीं है कि क्या ये अपने मकसद में कामयाब हो पायेंगे, राज्य/देश की जनता की आंखों में धूल झोंक पायेंगे?