कीचड़ स्नान के पूर्व दीपिका ने CM हेमन्त से क्यों नहीं पूछा कि NH की बेहतरी के लिए उन्होंने नीतीन गडकरी से जो वादा किया, उसे अमल में क्यों नहीं लाया?

आज का दिन महगामा की कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय का है। यह मैं इसलिए कह रहा हूं कि शायद वो देश में पहली ऐसी विधायक है, जिन्होंने इस प्रकार के आंदोलन कर दिये, जो आज तक किसी ने नहीं किये थे। आम तौर पर लोग जलाशयों में जाकर सत्याग्रह करते हैं, पर महगामा की कांग्रेस विधायक ऐसी जगह सत्याग्रह कर दिया, जिसके बीच से गुजरना भी लोग उचित नहीं समझते, अगर उधर से गुजरे भी तो कम से कम अपने कपड़े खराब न हो, इसका तो ख्याल जरुर रखते हैं और संभल कर निकलते हैं। पर ये क्या?

ये तो कीचड़ युक्त पानी में वो भी सड़क के बीचोबीच बैठकर उस कीचड़ युक्त जल से स्नान करने लगी, और ये करे भी क्यों नहीं, जब देश/राज्य की सरकारें व पदाधिकारी उनकी बातें नहीं सुनें तो ऐसी गूंगी-बहरी सरकारों और अधिकारियों तक बातें पहुंचाने के लिए कोई न कोई माध्यम तो किसी न किसी को अपनाना ही पड़ेगा, इसलिए लगता है कि कांग्रेस की विधायक ने इस ओर सभी का ध्यान आकृष्ट कराने के लिए यही रास्ता चुना कि वो उस सड़क पर पहुंच गई, जहां कीचड़ युक्त पानी हमेशा लगा रहता है और उससे लोगों की परेशानी बढ़ी हुई थी, आश्चर्य हैं दीपिका पांडेय की इस सत्याग्रह की आवाज सुनी गई और उक्त गड्ढे को भरने का काम भी शुरु हो गया।

चलिए एक ओर उनके नेता राहुल गांधी सड़कों पर पैदल यात्रा कर रहे हैं और इधर दीपिका अपने इलाके की सड़कों को बेहतर करने के लिए कीचड़ युक्त जल से स्नान करने लगी हैं, साथ ही संकल्प ले लिया कि जब तक इस सड़क की मरम्मति नहीं होगी, वो वहां से उठेगी नहीं, लीजिये काम भी शुरु हो गया, उसका सबसे सुंदर उदाहरण, नीचे दी गई ये तस्वीर है।

दरअसल जहां का मामला है वो इलाका है राष्ट्रीय राजमार्ग 133 का। चूंकि राष्ट्रीय राजमार्ग हैं तो सीधे मामला बन जाता है केन्द्र का और केन्द्र में किसकी सरकार है, तो केन्द्र में भाजपा की सरकार है, इसलिए भाजपा की सरकार को कटघरे में खड़ा करना है, तो राजनीति होनी ही चाहिए, यहां भी वहीं हुई, राजनीति हुई और अगर राजनीति से काम बनता है तो इस राजनीति को सलाम तो ठोकना ही पड़ेगा।

दीपिका पांडेय ने अपने इस सत्याग्रह के माध्यम से गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दूबे को जमकर कोसा, साथ ही कोसा एनएचआई के अधिकारियों को भी। दीपिका पांडेय कहती है कि एनएच 133 के अंतर्गत पड़नेवाली महगामा से पीरपैती तक की जानेवाली सड़क की हालत बहुत ही खराब है। बड़े-बड़े गड्ढे हैं। कभी भी कोई बड़ा हादसा हो जाये, इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता। इसलिए वो आज इस सड़क पर बने गड्ढों पर जमे कीचड़ युक्त पानी से स्नान करने लगी।

पर शायद दीपिका पांडेय और यहां के बड़े-बड़े मठाधीश पत्रकार और साथ ही कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता ये भूल गये कि हाल ही के वर्षों में नीतीन गडकरी जो इन सड़कों के मंत्रालय को संभाल रहे हैं, राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और उनके अधिकारियों के साथ मीटिंग की थी, उस मीटिंग में नीतीन गडकरी ने चैलेंज किया था राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को और कहा था कि वो अपने राज्यों के अंदर आनेवाले सारे राजमार्गों की बेहतरी के लिए जल्द ही प्रोजेक्ट बनाये।

साथ ही इन प्रोजेक्टों को पूरा करने के लिए, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों की एक टोली दें, झारखण्ड की सारी सड़कों को ऐसा बना देंगे, कि आज तक किसी ने ऐसी सड़क न देखी हो, क्या दीपिका पांडेय और कांग्रेस के दिग्गज नेता ये बता सकते है कि राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने नीतीन गडकरी के इस चैलेंज को स्वीकार करते हुए प्रोजेक्ट तैयार किये, उनके मंत्रालय में भेजे, ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ लोगों की टोली बनाई और अगर नहीं बनाई तो फिर कोई व्यक्ति-विशेष इसके लिए जिम्मेवार कैसे हो गया? आज भी इसका विजयुल यू-ट्यूब और विभिन्न चैनलों के पास मौजूद हैं, सभी को देखना चाहिए। मैं स्वयं उक्त विडियो को यहां दे रहा हूं, आप सभी देखिये…

अब ऐसे में कीचड़ स्नान के पूर्व दीपिका पांडेय ने CM हेमन्त सोरेन से क्यों नहीं पूछा कि NH की बेहतरी के लिए उन्होंने नीतीन गडकरी से जो वादा किया, उसे अमल में क्यों नहीं लाया? हालांकि राजनीतिक पंडितों की मानें तो गोड्डा व महगामा के ही लोग बताते है कि गोड्डा सांसद निशिकांत दूबे ने गोड्डा के लोगों के लिए कम काम नहीं किया है। गोड्डा में रेल परिचालन हो या पावर प्रोजेक्ट का मामला हो या देवघर में एम्स व हवाई अड्डे का निर्माण, उनके लिए ये सब कोई बड़ा मामला नहीं हैं, वे चुटकियों में इस प्रकार की समस्याओं के समाधान का मादा रखते हैं, पर इस जगह पर इनका क्यों नहीं ध्यान गया, ये आश्चर्य करनेवाली बात है, जिसका राजनीतिक माइलेज दीपिका पांडेय ने उठाने की कोशिश की।

एक बात और, झारखण्ड हो या बिहार यहां के वाशिंदों की एक सबसे गंदी आदत क्या हैं? क्या आप जानते है कि यहां के लोगों को आप कितना भी सुंदर सड़कें या नालियां बनाकर दे दें, ये खुद भी अपने से उन सड़कों और नालियों को बदसुरत और घटियास्तर का बना कर रख देंगे। नहीं तो आप जहां रहते हैं, वहां बननेवाली सड़कों को देखें, आप देखेंगे कि लोग हर दो घर के बीच में एक स्पीडब्रेकर बना देंगे, जो गाड़ियों में सवार लोगों के कमर दर्द व अन्य हड्डी रोग देने का कारण बना जाता है।

ऐसा, मैं ऐसे ही नहीं लिख दिया, ये बिहार व झारखण्ड की खुबसूरती है भाई, यहां की जनता का अद्भुत सोच है। अंत में, मैं यह भी लिख देना चाहता हूं कि दीपिका पांडेय ने जो अपने इलाके में कीचड़ स्नान किया हैं, वैसा दृश्य यहां कौन ऐसा जिला है या अनुमंडल है, जहां नहीं हैं। चलिए ये मामला झारखण्ड सरकार का नहीं, केन्द्र का हैं, पर जो राज्य सरकार का है, वहां पर हेमन्त सरकार क्या कर रही है? ये तो सरकार को बताना ही पड़ेगा?

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