29 अप्रैल से गायब तीन बच्चों को ढूंढ पाने में पुलिस विफल, ग्रामीणों ने दिया दो दिनों का अल्टीमेटम

राजधानी रांची के जगन्नाथपुर मौसीबाड़ी निवासी मनोज उरांव एवं उनकी पत्नी सुमति उरांव की नींद उड़ी हुई हैं। उनके तीन बच्चे पिछले 29 अप्रैल से गायब है, ये बच्चे कहां गये? किस स्थिति में हैं? इसकी चिंता मनोज और उनकी पत्नी सुमति को सताये जा रही है, पर स्थानीय प्रशासन उसकी सुध नहीं ले रहा, क्योंकि पूरे राज्य की सच्चाई यहीं है कि इस राज्य में प्रशासन नाम की कोई चीज ही नहीं, अगर आप गरीब है, ईमानदार हैं तो कोई नहीं सुनेगा और अगर आप पैसेवाले है, आलादर्जे के बेईमान हैं तो पूछिये मत, स्थानीय प्रशासन आपके आगे नाक रगड़ेगा।

मनोज उरांव और सुमति उरांव के तीन बच्चे, जिनमें महिमा कुमारी की उम्र दस वर्ष, अंजली कुमारी की उम्र 7 वर्ष और बेटा कृष जिसकी उम्र पांच वर्ष है, लापता है। स्थानीय प्रशासन बच्चों को खोजने में लापरवाही बरतते हुए, टालमटोल किये जा रहा है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता आलोक दूबे कल पीड़ित परिवार से मिले और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का वायदा किया। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में 17 मई को मुख्यमंत्री रघुवर दास से भी मिलेंगे। इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। बच्चों को खोज निकालने के लिए जो भी कुछ होगा, किया जायेगा, इसमें सभी के सहयोग की आवश्यकता है।

आश्चर्य की बात है कि लापता बच्चों के माता-पिता बेहद गरीब और लाचार है, वे दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं, उन्होंने इस संबंध में नगड़ी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन बच्चों का सुराग आज तक नहीं मिला। इधर स्थानीय लोगों ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि वे बच्चों को खोज निकाले, स्थानीय ग्रामीणों ने कहा है कि अगर प्रशासन ने बच्चों को खोज नहीं निकाला तो वे प्रोजेक्ट बिल्डिंग का घेराव करेंगे।