अगर सभी इच्छाओं का दमन करना हैं तो भागवत कथा में लीन हो जाइये – मणीषभाई

रांची के चुटिया स्थित कतारीबगान में नवनिर्मित वृंदावनधाम में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिन कथाश्रवण करने आये श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र से आये भागवताचार्य संतश्री मणीष भाई जी महाराज ने कहा कि इच्छाएं अनन्त है, ये कभी समाप्त नहीं हो सकती, इच्छाओं पर काबू पाने का एक ही मार्ग हैं भगवद्प्राप्ति, अगर आप ईश्वर को प्राप्त कर लेते हैं तो आपकी सारी इच्छाएं समाप्त हो जाती है, आप परमआनन्द को प्राप्त कर लेते हैं।

रांची के चुटिया स्थित कतारीबगान में नवनिर्मित वृंदावनधाम में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिन कथाश्रवण करने आये श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र से आये भागवताचार्य संतश्री मणीष भाई जी महाराज ने कहा कि इच्छाएं अनन्त है, ये कभी समाप्त नहीं हो सकती, इच्छाओं पर काबू पाने का एक ही मार्ग हैं भगवद्प्राप्ति, अगर आप ईश्वर को प्राप्त कर लेते हैं तो आपकी सारी इच्छाएं समाप्त हो जाती है, आप परमआनन्द को प्राप्त कर लेते हैं। परमआनन्द को प्राप्त करने, अलौकिकता को प्राप्त करने का मार्ग ही भागवत कथा है, इसलिए जिसने भी भागवत कथा की ओर अपना ध्यान किया, उसे परमआनन्द-अलौकिक आनन्द की प्राप्ति हो गई।

मणिष भाई जी महाराज ने भगवान को प्राप्त करने का बड़ा ही सरल मार्ग बताया। उनका कहना था कि भगवान को प्राप्त करने के चार मार्ग हैं, पहला मार्ग है ईश्वर पर आस्था, दुसरा मार्ग ईश्वर की चाहत, तीसरा मार्ग ईश्वर को प्राप्त करने के लिए दृढ़ विश्वास तथा चौथा मार्ग उनके जैसे बनने की इच्छा का मन में भाव जगना। उन्होंने सरल शब्दों में कहा कि आप इसे ऐसे समझे – मानो, चाहो, पाओ और बनो अर्थात् ईश्वर को मानो, उन्हें चाहो, उन्हें पाओं और उनके जैसा बन जाओ। उन्होंने कहा कि ये तभी संभव है जब आपका मन भगवान में रमेगा, और इसके लिए आपको भागवत कथा का आश्रय लेना पड़ेगा, ठीक उसी प्रकार जैसे राजा परीक्षित ने भागवत की कथा सुनने में अपना मन रमाया।

उन्होंने कहा कि हमारे धर्मग्रंथों ने साफ कहा है कि जो भगवान को चाहेगा वो भगवान का बन जायेगा। इसमें कोई संशय या किन्तु-परन्तु की बात ही नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि ये अधिकमास है और इस मास में भगवान के कथा श्रवण और उनकी भक्ति में लगने से अत्यधिक फल प्राप्त होता है। उन्होंने भागवत कथा के महात्मय के बारे में बताते हुए कहा कि भागवत कथा तभी किसी व्यक्ति को सुनने को मिलता है, जब उसका भाग्योदय होता है, और ये भाग्योदय तभी होता हैं, जब उस व्यक्ति को सत्संग की प्राप्ति होती है।

मणिषभाई जी महाराज ने कहा कि आज बहुत ही सुंदर दिन है, कि आज हम भगवान और भक्त एक दूसरे से परिचय प्राप्त कर रहे हैं, ये परिचय भी बहुत ही जरुरी है, क्योंकि जब आप किसी से परिचय प्राप्त करते हैं, उसके बारे में जानने की कोशिश करते हैं तब आपको संबंधित व्यक्ति के बारे में बहुत कुछ जानकारी मिल जाती है, लेकिन जब उस व्यक्ति के प्रति अनिच्छा रखते है, तो उसे जान नहीं पाते, आइये हम भगवान को भागवत के माध्यम से जाने, क्योंकि भागवत तो सरल माध्यम हैं, भगवान को जानने का, भगवान के हो जाने का।

उन्होंने दावा किया कि भागवत कथा में जो लीन होंगे, वे सारे सांसारिक कष्टों से दूर हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि ये वहीं कथास्थल हैं, जहां आप आते हैं तब आपके मन निर्मल हो जाते हैं, क्योंकि यहां सिर्फ आप और भगवान की कथा  होती हैं, दुसरा कुछ नहीं होता, आप जितने देर तक यहां रहेंगे, आप दुनियादारी से दुर सिर्फ और सिर्फ भगवान के होकर रहेंगे, ऐसे में परम आनन्द प्राप्त किये बिना आप रह ही नहीं सकते, क्योंकि भगवान की कथा सभी बुराइयों का अंत कर देती है, सारी समस्याओं का अंत कर देती है, हमें जीने की कला सीखा देती है, हमें भगवान से प्रेम करना सीखा देती है तथा जीवन-मृत्यु के समस्त दांव-पेचों से हमें मुक्त कर देती है। उन्होंने कहा कि यही वक्त है कि हमें भक्ति और मुक्ति के इस अवसर का लाभ उठाते हुए भागवत कथा में रम जाना है तथा भगवान में लीन होकर इस जीवन को सार्थक बना लेना है।

श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ को सफल बनाने में पं. चंद्रकांत शास्त्री, राजीव कुमार सिंह, मुकेश कुमार मधुकर, छत्रधारी महतो, विक्की शर्मा, कैलाश केसरी, संजीव सिंह, लक्ष्मी सिंह, आकाश सिंह, अमित गुप्ता, सुरेश साहु, राम लखन महतो, राम प्रवेश सिंह, संजीव सिंह सतीश साहु, अजित सिंह, सुरेन्द्र सिंह,अमित गुप्ता, मुन्ना ठाकुर के नाम उल्लेखनीय है।

Krishna Bihari Mishra

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