CM रघुवर दास जी, वे सफेदपोश आखिर कब पकड़े जायेंगे?

याद करिये, रांची की वह हृदय विदारक घटना, जब इस घटना से सारे रांचीवासी उद्वेलित हो गये थे, और जिस घटना ने रांचीवासियों की कई दिनों तक नींद उड़ा दी थी। वह घटना थी – रांची के बूटी में बीटेक की छात्रा से रेप की घटना, जिसे गला दबा कर मार डाला गया और फिर उसे जला दिया गया। 17 दिसम्बर 2016 को, यह घटना रांची के करीब-करीब सारे अखबारों की प्रथम पृष्ठ पर थी, जो सुर्खियां बन गई।

रांची में सदर थाना क्षेत्र बूटी बस्ती निवासी 19 वर्षीया छात्रा के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया गया था, विरोध करने पर अपराधियों ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी तथा साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से उसके शव को जला दिया गया था। 16 दिसम्बर 2016 की सुबह पुलिस को छात्रा का शव उसके कमरे से मिला। छात्रा मूल रुप से बरकाकाना स्थित सीएमपीडीआई कॉलोनी की रहनेवाली थी।

वह रांची में बूटी बस्ती में अपनी बड़ी बहन के साथ रहकर ओरमांझी के आनन्दी स्थित आरटीसी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बीटेक कर रही थी। इस कांड ने पूरे रांचीवासियों को उद्वेलित किया। समाचार पत्रों से लोगों को मालूम हुआ कि सीआइडी ने उस वक्त कहा था कि इस कांड में स्थानीय युवकों का हाथ है, छात्रा का गैंग रेप तथा मोबाइल चार्जर व तार से गला घोटने की बात भी सामने आयी और फिर उस लड़की के शव को जलाया गया, इसकी पुष्टि की खबरें दूसरे दिन अखबारों में आई।

उस दौरान कई अखबारों ने इस घटना से मर्माहत होकर संपादकीय भी लिखा था। इस घटना से दुखी होकर कई सामाजिक, राजनीतिक संगठन सड़कों पर उतरे थे। जिसमें आइसा, एआइडीएसओ व एपवा की भूमिका महत्वपूर्ण थी। 17 दिसम्बर 2016 की रात्रि में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं ने विशाल कैंडल मार्च निकाला था, रोष इतना भारी था कि करीब-करीब रांची से प्रकाशित सारे अखबारों ने इसे लेकर एक स्पेशल पेज तक दे डाला। जो 18 दिसम्बर 2016 को प्रकाशित हुआ।

इधर पुलिस अपराधियों को पकड़ने के लिए दबिश डाल रही थी पर उसे सफलता नहीं मिल रही थी, और इधर विभिन्न छात्र संगठनों का गुस्सा बढ़ता जा रहा था, कई जगहों पर महिलाएं सड़कों पर उतरी, जो 19 अक्टूबर 2016 को सभी अखबारों में प्रकाशित हुआ। यही हाल 19 अक्टूबर 2016 को रांची का था, जब छात्रों व युवाओं ने चार घंटे तक सड़क को जाम रखा। इधर छात्रों और युवाओं का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा था, इसी दौरान एक प्रतिनिधिमंडल 21 दिसम्बर 2016 को मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिला तथा 22 दिसम्बर 2016 को इस घटना के विरोध में रांची बंद बुला दिया। जिसे सभी राजनीतिक दलों व छात्र संगठनों का समर्थन प्राप्त था।

इसी बीच मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बयान दे डाला था जब रांची के सांसद रामटहल चौधरी और आरटीसी इंजीनियिरंग कॉलेज के एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने गया था। उनका कहना था कि पुलिस इस मामले को 90 फीसदी सुलझा चुकी है, उसे 48 घंटे का समय और देना चाहिए। 48 घंटे में अगर पुलिस मामले का खुलासा नहीं करेगी तो सीबीआइ को जांच का जिम्मा दे दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने इसी दौरान इस घटना में सफेदपोशों के शामिल होने की भूमिका का भी जिक्र किया था, पर यहां तो असंख्य दिन बीत गये, न तो सफेदपोश धराए और न वे अपराधी जिन्होंने इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया।

इसी बीच इस हैवानियत के शिकार बेटी का पिता जब मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिला तो मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उस पिता के साथ कैसे बदसलुकी की? वह सभी जानते है, आज भी वह विजूयल यूटयूब पर हैं आप देख सकते हैं, अब सवाल उठता है कि आखिर बूटी मोड़ की उस पीड़िता के आरोपी को जमीन खा गया या आसमान निगल गया, मुख्यमंत्री बताते क्यों नहीं?  मीडिया पूछती क्यों नहीं? या खुद को ईमानदार बतानेवाली पुलिस अपनी गलती क्यों नहीं स्वीकार करती? कि वह मजबूर है, उन अपराधियों के नाम बताने में, उन्हें गिरफ्तार करने में। यह सवाल पूछा जाना चाहिए या नहीं, निर्णय आप करें, क्योंकि जिनके घर में बेटियां हैं, वे आज जान लें कि वे शत प्रतिशत सुरक्षित नहीं है, इस राज्य में।