जब नाथूराम गोडसे चौक बन ही गया तो सरकार बताए, झारखण्ड गांधी की नीतियों पर चलेगा या गोडसे की नीतियों पर

शर्मनाक, जो झारखण्ड के चक्रधरपुर से समाचार आ रहा हैं, वह बता रहा है कि देश किस रास्ते पर जा रहा है? आश्चर्य है कि गुमराह लोग गलत पर गलत किये जा रहे हैं, पर सरकार और उनके लोग उनकी गलतियों पर पर्दा ढंक रहे हैं, आंखें मूंद ले रहे है। ऐसे हालत में जब सरकार और उनके लोग ऐसी हरकतों पर आंख मूंद लें तो झारखण्ड की अमनपसंद जनता और बुद्धिजीवियों को आगे आना चाहिए और इसका कड़ा विरोध करना चाहिए।

उन्हें इस सोई सरकार से कहना चाहिए कि यह झारखण्ड है, यह गांधी का देश है, जहां बड़ी संख्या में टाना भगत रहते हैं, जो गांधीवादी तरीके से जीवन व्यतीत करते हैं, 19 मई को चक्रधरपुर में घटित घटना उनकी आत्माओं पर चोट हैं, यह असहनीय हैं, सरकार इस पर एक्शन लें, साथ ही इस संवेदनशील घटनाओं का दुबारा जन्म न हो, इसका विशेष ख्याल रखें, क्योंकि इससे सामाजिक ताना-बाना को खतरा उत्पन्न हो रहा है।

ज्ञातव्य है कि चक्रधरपुर में गत 19 मई को संतोषी मंदिर के निकट पापड़ हाता में गिरिराज सेना और कुछ वहां के स्थानीय लोगों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या करनेवाले नाथू राम गोडसे की जयंती ही नहीं मनाई बल्कि नाथू राम गोडसे के नाम पर एक चौक का नामकरण भी कर दिया। इस दौरान नाथू राम गोडसे के नाम का शिलापट्ट भी लगाया गया। जयकारे लगाये गये। कमाल है, इस कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने एक स्वर से नाथू राम गोडसे को महान देशभक्त बताया।

गिरिराज सेना के संरक्षक कमलदेव गिरि का कहना था कि महात्मा गांधी की हत्या की सजा भारतीय संविधान दे चुका हैं, नाथूराम गोडसे की देशभक्ति प्रशंसनीय है। कमलदेव गिरि के अनुसार यदि प्रशासन नाथू राम गोडसे को देशद्रोही मानता है तो वह चौक का नामकरण हटा सकता है, इस चौक का नामकरण बड़े ही सोच समझ कर किया गया है।

अगर कानून की बात करें, तो आम तौर पर किसी भी चौक या मार्ग का नामकरण नगरपालिका स्थानीय लोगों की सहमति के बाद करती हैं, पर इस मामले में नहीं लगता कि नगरपालिका का सहयोग लिया गया हैं, और न ही नगरपालिका ऐसा करने को कह ही सकती है, मामला गंभीर है, इसे लेकर पूरे झारखण्ड में गांधीवादियों के मन में आक्रोश देखने को मिल रहा हैं, कई जनजातीय समाज के लोग भी इस घटना से आक्रोशित हैं।

कुछ का कहना है कि जब झारखण्ड के एक शहर के चौक को नाथूराम गोडसे के नाम पर कर ही दिया गया तो राज्य सरकार को भी अब स्पष्ट कर देना चाहिए कि यह राज्य महात्मा गांधी की नीतियों पर चलेगा या उनके हत्यारे नाथू राम गोडसे की नीतियों पर। जितनी जल्द अगर राज्य सरकार इस पर अपना निर्णय दे देगी, उतना ही अच्छा रहेगा, क्योंकि चक्रधरपुर में 19 मई को घटित यह घटना पूरे झारखण्डवासियों के लिए एक कलंक का काम कर गया।