धनबाद-झरिया में बिजली के लिए हाहाकार, पर रघुवर सरकार को इससे कोई मतलब नहीं

धनबाद के भूली और पूरे झरिया में बिजली के लिए हाहाकार हैं, पर रघुवर सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही, यहीं हाल राज्य के अन्य इलाकों में भी हैं, पर वहां की आवाज राज्य सरकार तक नहीं पहुंच रही, अखबारों में पढ़िये तो मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा इस मामले को लेकर बैठकें जारी है, पर नतीजा सिफर। आज अपने इलाके भूली में हो रहे भीषण बिजली संकट पर धनबाद के भाजपा विधायक राज सिन्हा मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिले,

धनबाद के भूली और पूरे झरिया में बिजली के लिए हाहाकार हैं, पर रघुवर सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही, यहीं हाल राज्य के अन्य इलाकों में भी हैं, पर वहां की आवाज राज्य सरकार तक नहीं पहुंच रही, अखबारों में पढ़िये तो मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा इस मामले को लेकर बैठकें जारी है, पर नतीजा सिफर। आज अपने इलाके भूली में हो रहे भीषण बिजली संकट पर धनबाद के भाजपा विधायक राज सिन्हा मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिले, अब देखना यह है कि सीएम रघुवर से मिलने का क्या फायदा धनबाद के भूलीवासियों को मिला।

इधर झरिया के लोग पिछले चार दिनों से बिजली समस्या से त्रस्त है, पर उनकी कोई सुन नहीं रहा, मीडिया से जुड़ी एवं झरिया निवासी भारती ओझा ने इस मुद्दे को सोशल साइट फेसबुक पर उठाया है, जिसे कई लोगों ने शेयर किया। भारती ओझा का कहना है कि उनके झरिया में चार दिनों से बिजली नहीं है, उन्होंने जनता से कहा कि क्या वह अनुरोध कर सकती है कि झरिया की समस्या को सभी लोग आगे बढ़ाये।

भारती कहती है कि उनके शहर झरिया (झारखण्ड) में पिछले चार दिनों से ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण लाइट नहीं है, जब ट्रांसफार्मर ठीक होता हैं तब भी 24 घंटे में मात्र 10 से 12 घंटे बिजली रहती है। 48 डिग्री की भीषण गर्मी झेलने को मजबूर यहां के लोग बिजली के नहीं रहने पर हाहाकार कर रहे हैं। वह मुख्यमंत्री के सलाहकार से बात कर, इस मामले को उठाती है, वार्ता के बाद एक घंटा बिना वोल्टेज की बिजली आती हैं और फिर वह भी गुल हो जाती है।

भारती ने लोगों की वेदना को फेसबुक के माध्यम से रखा हैं वह बताती है कि इधर पानी भी नहीं हैं,  गर्मी अलग से परेशान किये हुए हैं, मच्छड़ों का प्रकोप भी उसी तरह हैं, जिसके कारण चार दिनों से कोई यहां पलक नहीं झपकाया है। वह लिखती है कि डीवीसी के अधिकारीगण को कोई फर्क नहीं पड़ता, जनता लाचार है सो अलग, एक ओर जमीन की धधकती आग, दूसरी ओर भीषण गर्मी और उस पर बिजली का नहीं होना, झरियावासियों के लिए भीषण समस्या लेकर आ गया हैं, अब ये करें तो क्या करें।

भारती ओझा ने अपनी वेदना को हर जगह पहुंचाने की कोशिश की है, पर उनकी समस्या को आज की तिथि में लोग सुलझा पायेंगे, कहना मुश्किल है। अंत में भारती ओझा ने यह भी कहा कि जल्द समाधान करें, चार दिनों से झरिया के लोग सोए नहीं हैं, पर क्या बेहतर शासन का दंभ भरनेवाली रघुवर सरकार को यह भी पता है कि धनबाद के झरिया के लोगों की क्या हालत, उन्होंने बना दी।

Krishna Bihari Mishra

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जरा कल्पना कीजिये, अगर कल पीएम नरेन्द्र मोदी को जनादेश नहीं मिला तो क्या होगा?

Wed May 22 , 2019
कभी- कभी मैं सोचता हूं कि अगर कल पीएम मोदी को जनादेश नहीं मिला तो क्या होगा? अगर जनादेश मिला भी और उनकी पार्टी को अकेले बहुमत नहीं मिला तो क्या होगा? क्या फिर पीएम मोदी 2014-19 वाली मुद्रा में ताकतवर होंगे या नीतीश कुमार जैसे नेताओं के हाथों की अंगूलियों की कठपुतली बन जायेंगे? फिर भाजपा के धारा 370, समान कानून, राम मंदिर निर्माण का क्या होगा?

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