चले थे “उगाही” का दाग मिटाने पर खुद की ईज्जत गवां बैठी रांची प्रेस क्लब वो भी दिन-दहाड़े

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रांची प्रेस क्लब में मिशन ब्लू फाउंडेशन, कमलभद्र फैसिलिटीज व प्रेस क्लब द्वारा आयोजित प्रेस कांफ्रेस में अपनी बात रख रही अस्पताल में कार्यरत महिला कर्मचारी और पुरुष कर्मचारी ने जो संवाददाताओं के बीच में बात रखी हैं, वो बातें अकल्पनीय व एक महिला के साथ अपमान की एक नई गाथा कह रही है। आप कह सकते है कि इन तीनों ने जो कांफ्रेस की थी, वो कांफ्रेस ठीक उस लोकोक्ति को साकार कर रही है कि “आए थे हरिभजन को ओटन लगे कपास।”

मतलब चले थे अपने उपर लगे उगाही के आरोप को मिथ्या साबित करने और स्थानीय सांध्य अखबार “बिरसा का गांडीव” को लपेटने पर खुद लपटा गये। महिला कर्मचारी व पुरुष कर्मचारी ने बारी-बारी से इस बात को कहा कि उनके साथ दो दिन पहले संस्थान में बहुत ही गलत हुआ हैं, और ये गलत करनेवाले कोई दूसरे नहीं बल्कि रांची प्रेस क्लब से जुड़े लोग ही थे, महिला कर्मचारी ने तो एक अधिकारी का खुलकर नाम भी लिया (मैं तो रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों को कहूंगा कि एक बार फिर उस महिला का बयान सुन लें और खुद पर शर्म करें।)

महिला व पुरुष कर्मचारी ने बयान दिया कि उक्त दिन अजब-गजब हो रहा था, उनके साथ गाली-गलौज की जा रही थी, हाथा-पाई की जा रही थी, विडियो बनाये जा रहे थे, जबकि उनदोनों ने कोई ऐसी हरकत नहीं की थी, जैसा कि एक अखबार ने छापा। सच्चाई यह भी है कि जिसने विडियो बनाया होगा, जिसने फोटो भी खींचा होगा, उसने रांची प्रेस क्लब के व्हाट्सएप्प ग्रुप में उक्त लड़की का फोटो भी डाला होगा।

सच्चाई यह भी है कि उक्त फोटो डालने के बाद कोई न कोई रांची प्रेस क्लब का अधिकारी ही होगा, जो उसका स्क्रीन शॉट लिया होगा और उसे बाहर वायरल किया होगा, जिसके कारण उक्त बालिका के सम्मान को ठेस पहुंची, अब रांची प्रेस क्लब ही बताएं कि कार्रवाई किस पर होनी चाहिए? ऐसे ही बहुत सारे सवाल हैं, जिसे रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों को उसके जवाब देने ही होंगे…

  1. रांची प्रेस क्लब से जुड़ा वो कौन अधिकारी है, जिसने रांची प्रेस क्लब कमेटी नामक व्हाट्सएप्प ग्रुप में लिखी गई गोपणीय बातों को, उसका स्क्रीन शॉट लिया और वायरल भी किया? क्योंकि इस ग्रुप का स्क्रीन शॉट वही ले सकता है, जो उस ग्रुप में शामिल हो।
  2. जब महिला एक स्टाफ है, तो उस स्टाफ को व्हाटसएप्प ग्रुप में एक लड़की और पुरुष पदाधिकारी को लड़का कहकर संबोधित करना, कहां तक उचित है? क्या रांची प्रेस क्लब के अधिकारी को इतनी सी बात की भी जानकारी नहीं थी?
  3. क्या महिला या पुरुष कर्मचारी की जबर्दस्ती फोटो लेना, विडियो बनाना, उनके साथ हाथा-पाई करना, गाली-गलौज करना सही हैं? खुद रांची प्रेस क्लब के बड़े-बड़े पदाधिकारी बताएं?
  4. कैंटीन संचालक को किसने अधिकार दिया कि वो इस प्रकार की बवंडर खड़ी करें, उससे सूत्र पूछा जाये कि किसके कहने पर विवादास्पद चीजें लिखकर रांची प्रेस क्लब और अन्य को गुमराह किया?
  5. महिला कर्मचारी बार-बार स्वयं को अनुसूचित जाति की महिला बता रही है, मतलब उसे बहुत बड़ा ठेस लगा है, अगर वो कानून का सहारा लेती हैं, तो क्या रांची प्रेस क्लब के वे अधिकारी बच जायेंगे, जिन्होंने उसके साथ बदतमीजी की, या वो संस्थान बच जायेगा, जहां ये सब हरकतें हुई?
  6. रांची प्रेस क्लब के महासचिव अखिलेश कुमार सिंह ने आज फेसबुक पर लिखा कि 30 पत्रकारों की मौत के बाद पत्रकारों को फ्रंट लाइन वारियर घोषित करने के लिए क्लब आंदोलन कर रहा था, कौन सा आंदोलन अब तक खड़ा किया भाई? हमने तो देखा नहीं, और आप किसे विभीषण, जयचंद और मीरजाफर कह रहे हैं, पहले विभीषण का मतलब तो जानिये, विभीषण रामभक्त था, तो क्या विभीषण को रामभक्त या सत्य का साथ नहीं देना चाहिए था? रही बात जयचंद और मीरजाफर कौन है, वो तो महिला व पुरुष कर्मचारी ने आज प्रेस कांफ्रेस में सबके सामने बता दिया, है ताकत तो लीजिये एक्शन?

आप लोग कितने बुद्धिमान है, वो तो आज के प्रेस कांफ्रेस में ही चल गया। मिशन ब्लू फाउंडेशन व कमलभद्र फैसिलिटीज अपनी पूरी टीम के साथ जिसमें उनके लीगल एडवाइजर भी थे, पहुंचे थे, वे पाक-साफ होकर, आपके सामने रांची प्रेस क्लब से बाहर निकले। लेकिन आप सब पूरी तरह से बदनाम हो चुके हैं, इसे स्वीकार करिये। एक का नाम सभी के सामने आज डंके की चोट पर वो महिला स्टाफ ली है, अगर हिम्मत है तो शुरुआत अपने घर से करिये, करिये कार्रवाई, अरे आप कैसे करेंगे, क्योंकि आप को तो दूसरों में जयचंद और मीरजाफर दिखाई पड़ता है, पर अपनों में नहीं।

आज भी जो प्रेस कांफ्रेस हुआ, उसमें जिस प्रकार से मिशन ब्लू फाउंडेशन व कमलभद्र फैसिलिटीज ने अपनी बात ठोस रुप से रखी, वो आप नहीं रख सकें, इन दोनों ने वो कहावत है न “आपकी जूती, आपका सर” सिद्ध करते हुए, स्वयं को बचा लिया। मैं तो कहता हूं कि उगाही अब शब्द बहुत पीछे छूट चुका है, आप महिला का सम्मान दिलाइये, बाद में “बिरसा का गांडीव” अखबार को पकड़ियेगा, सबसे पहले घर में छुपे उस बदमाश को पकड़िये, जिसके बारे में उक्त महिला व पुरुष कर्मचारी ने जुबां खोली है, कहा है कि गाली-गलौज कर रहे थे, जबर्दस्ती फोटो ले रहे थे, अगर फोटो वहां नहीं लिया जाता तो संभव था बात ही नहीं आगे बढ़ती, पर पता नहीं कौन सा सनक आपलोगों के दिमाग में छाया रहता है, जिसमें आपको अपनी गलती नहीं दिखती।

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