जमशेदपुर की तेजतर्रार महिला पत्रकार ने धमकी देनेवाले राज्य के एक मंत्री की चुनौती स्वीकार की, 2024 में देगी जवाब

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जमशेदपुर की वरिष्ठ महिला पत्रकार अन्नी अमृता आज आक्रोशित दिखी। आक्रोशित होने का कारण, हेमन्त सरकार में शामिल एक मंत्री द्वारा उन्हें धमकी देना बताया जा रहा है। अन्नी ने इसी आक्रोश में एक पर एक ट्विट करना शुरु किया है, जो उनकी वेदनाओं को स्पष्ट कर दे रही हैं। अगर उनके ट्विट को देखा जाये तो लगता है कि उनके इरादे बुलंद हैं और हो सकता है कि वो 2024 के विधानसभा चुनाव में जमशेदपुर पश्चिम से राज्य के वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री की चूलें हिला दें।

वो मैं इसलिए कह रहा हूं कि अन्नी जमशेदपुर के सभी इलाकों में अपने पत्रकारिता और सेवा कार्यों से काफी लोकप्रिय है, खासकर महिलाओं में तो उसकी लोकप्रियता की कोई सानी ही नहीं, चाहे गरीब महिला हो या धनी, सभी में वो समान भाव से लोकप्रिय है, क्योंकि वो बिना किसी भेदभाव के सबके लिए सुलभ रही है तथा पूरा पत्रकारिता काल उसका गौरवपूर्ण रहा है।

बताया जाता है कि किसी बात को लेकर जमशेदपुर पश्चिम में ही रह रहे राज्य के एक मंत्री ने उन्हें धमकी देने की कोशिश की, जिसको लेकर अन्नी ने उस चुनौती को एक तरह से स्वीकार कर लिया है और देखने में आ रहा है कि जमशेदपुर के लोग अन्नी को सपोर्ट भी कर रहे हैं।

अन्नी ने अपने टिव्ट में यह भी स्पष्ट किया है कि वो अब न्यूज 11 में अपनी सेवा नहीं दे रही, बल्कि स्वतंत्र रुप से लेखन कर रही है, पत्रकारीय कार्य कर रही है, अन्नी का यह भी कहना है कि आज का युग सोशल मीडिया का युग है और इसके सहारे किसी भी गलत को पराजित किया जा सकता है। वो एक तरफ राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के स्वभाव की प्रशंसा करती है, तो दूसरी तरफ वो ऐसे मंत्रियों को लेकर उन्हें आगाह भी करती है कि कही ऐसा न हो, कि ऐसे लोगों के कारण उनका पराभव हो जाये।

वो बड़े ही तार्किक अंदाज से अपने विरोधियों को जवाब देते हुए अपने टिव्ट के माध्यम से कहती है कि भाई-बहन कह देने से कोई भाई बहन नहीं हो जाता, मन में उसके प्रति श्रद्धा भी होनी चाहिए, चूंकि अन्नी ने चुनौती दे डाली है और उसकी शुरुआत आज देखने को मिल भी गई, अगर अन्नी अमृता ने सही में राजनीतिक कैरियर को लेकर सजग हो गई तो ये जमशेदपुर की दुसरी सरयू राय हो सकती है। फिलहाल अन्नी का ट्विट देखिये…

सत्ता का घमंड चूर होना 2019 के अंत में देखा है। जनता ही सबक सिखाती है। जो मंत्री, नेता, विधायक या अफसर सत्ता के मद में चूर हैं, उनको भी 2024 में सबक मिलेगा। नाम लेना फिजूल है, क्योंकि सत्ता का पावर हैं। लेकिन मीडिया को दबाना-धमकाना भी बेकार है, क्योंकि अब सोशल मीडिया है।

 

बड़ी बहन या बड़ा भाई कहना एक बात है और दिल से आदर देना एक बात और जब बात अपने भाई/बहन की आ जाए तो मुंहबोले की क्या औकात? लेकिन एक बात याद रखने की जरुरत है, अगर पत्रकार अपना रोल सही करता है तो उससे कोई डरे या न डरे वह किसी से नहीं डरता, हां संस्थान को सत्ता डरा सकती है।

हेमन्त सोरेन जी हमेशा से पत्रकारों/लोगों में अपनी सौम्यता को लेकर लोकप्रिय रहे चाहे वो सीएम रहे या न रहे हो। वर्तमान दौर बहुत तकलीफदेह है। कुछ लोग सत्ता के नशे में चूर है। ऐसा दौर अच्छे नेतृत्व के लिए भी पराभव का कारण बन जाता है। समय रहते चेत जाए तो ठीक।

पत्रकार के पास एक ही ताकत है और वह है उसकी कलम से सत्य को उजागर करने की। मित्रों कई लोग ध्यान नहीं दिए कि मैंने अपने प्रोफाइल में क्या लिखा? मैंने 15 मई को ही न्यूज 11 से इस्तीफा दे दिया है। इस वक्त मैं बिल्कुल स्वतंत्र पत्रकारिता कर रही हूं और न्यूज 11 की खबरों की जिम्मेवारी मेरी नहीं।

अगर नेता या मंत्री पत्रकार को धमका सकता है तो पत्रकार भी 2024 में चुनाव लड़ सकता है। विकल्प बेहतर नजर आए तो क्या हो सकता है, ये जमशेदपुर पूर्वी में दिखा था। हो सकता है पत्रकार पैसेवाला न हो, ईमानदारी से 18 सालों तक सिर्फ अपनी सैलरी कमाई हो, लेकिन जन सेवा और अपना रोल करने में पीछे न हो।

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