वाह रे भास्कर, रघुवर भक्ति में इतने लीन हो गये कि पीएम मोदी को रघुवर के सामने बौना बना दिया

देखिये, रांची के एक अखबार को, देखिये आज की पत्रकारिता को, और देखिये अखबारों के मैनेजमेंट को, कि कैसे वह आम जनता की आंखों में धूल झोकता है? पूरा देश जानता है, यहां तक कि बच्चा-बच्चा जानता है कि झारखण्ड ही नहीं, बल्कि पूरे देश में भाजपा के पक्ष में जो भी चुनाव परिणाम आये हैं, उसका अगर कोई श्रेय लेने का हकदार हैं तो वे स्वयं है – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, न कि कोई ओर।

देखिये, रांची के एक अखबार को, देखिये आज की पत्रकारिता को, और देखिये अखबारों के मैनेजमेंट को, कि कैसे वह आम जनता की आंखों में धूल झोकता है? पूरा देश जानता है, यहां तक कि बच्चा-बच्चा जानता है कि झारखण्ड ही नहीं, बल्कि पूरे देश में भाजपा के पक्ष में जो भी चुनाव परिणाम आये हैं, उसका अगर कोई श्रेय लेने का हकदार हैं तो वे स्वयं है – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, न कि कोई ओर। पर आज का रांची से प्रकाशित अखबार “दैनिक भास्कर” के पन्नों को पलटिये, तो आपको साफ पता लग जायेगा कि इस अखबार ने कैसे अपने मुख्य पृष्ठ और अंदर की पृष्ठों पर झारखण्ड में संपन्न हुए इस लोकसभा चुनाव परिणाम का हीरो राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास को बना दिया।

उदाहरण स्वरुप समाचारों के हेडिंग देखिये और उन समाचारों को बारीकी से पढ़िये, आपको पता लग जायेगा कि कैसे सुनियोजित तरीके से राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास की इमेज को बनाने का काम दैनिक भास्कर ने प्रारम्भ किया है, सच्चाई यह है कि जिनको राजनीति का एबीसीडी का भी ज्ञान हैं, वे जानते है कि राज्य में भाजपा सरकार की क्या स्थिति हैं? और उनके कारगुजारियों से जनता कितनी प्रसन्न है? सच्चाई यह है कि खुद मुख्यमंत्री रघुवर दास चतरा में भाजपा प्रत्याशी के नोमिनेशन में गये थे, तब वहां सुनील कुमार सिंह के विरोध में हुजूम उमड़ पड़ा था, जिसमें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने खुद कहा था कि आप न तो सुनील को देखिये और न ही रघुवर दास को, देखना है तो मोदी को देखिये, अब भास्कर बताएं कि इसका मतलब क्या होता है?

यहीं नहीं, जब कांके में रोड शो के लिए सीएम रघुवर दास निकले थे, तो कैसे उनका विरोध लोगों ने किया और एक महिला उनके रोड शो में ही घेरकर अपना आक्रोश व्यक्त किया था, तो क्या ये जनता का आक्रोश बनावटी था, और लोगों ने रघुवर के कामकाज से खुश होकर भाजपा के पक्ष में वोट गिरा दिया, तब तो फिर मोदी की विधानसभा चुनाव में प्रचार की कोई जरुरत ही नहीं, रघुवर दास पर ही विधानसभा को छोड़ दिया जाये, देखते है कि ये कितना सीट लाते हैं, सच्चाई यह है कि पीएम मोदी हाथ खींच लें, तो राज्य की पूरी भाजपा बिलबिला कर मर जाये।

जरा आज का “दैनिक भास्कर देखिये” पूरा अखबार ही रघुवर स्तुति से रंगा हुआ हैं, पृष्ठ संख्या 1 – सरना को अपना कर भाजपा ने दोहराया इतिहास (भास्कर विश्लेषण)। पृष्ठ संख्या 3 – रांची में चेहरा संजय थे, चुनाव तो खुद मुख्यमंत्री लड़ रहे थे। सिटी भास्कर, पृष्ठ संख्या 1 – झारखण्ड में भाजपा की जीत के शिल्पकार रहे रघुवर। सिटी भास्कर, पृष्ठ संख्या 1 – सीएम ने एक तीर से दो निशाने साधे। सिटी भास्कर, पृष्ठ संख्या 3 – रघुवर बने संजय के सारथि, तो रांची में नवीन जायसवाल विधायक नंबर वन।

यानी केवल आप हेडिंग देखिये, सब आपको पता लग जायेगा कि इस अखबार ने कितनी सुनियोजित ढंग से रघुवर दास के इमेज को जनता के बीच परोसने की कोशिश की है, ताकि उसके बदले राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास की उस अखबार पर कृपा बनी रहें, अखबार फलता-फूलता रहे, अखबार दूधो नहाओ-पूतो फलो की कृपा से अनुप्राणित रहे। भले ही उससे देश व राज्य का नुकसान ही क्यों न हो जाये।

अब भास्कर वालों से पूछिये कि जब झारखण्ड में भाजपा की जीत के शिल्पकार राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास थे, तो फिर नरेन्द्र मोदी और अमित शाह क्या थे? राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास के अनुगामिनी थे क्या? जब सीएम एक तीर से दो निशाने साधना जानते हैं तो फिर सिल्ली और गोमिया विधानसभा उपचुनाव में उनके हालत क्यों खराब हो गये थे, सच्चाई यह है कि यहां की जनता ने इस लोकसभा चुनाव में न तो रघुवर को देखा और न ही लोकसभा में खड़े कैंडिडेट को देखा, उसने सिर्फ यह देखा कि किसे वोट देने से नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे, उन्हें लगा कि भाजपा कैंडिडेट को वोट देंगे तो पीएम नरेन्द्र मोदी बनेंगे और लोगों ने वोट दे दिये।

इसलिए यहां सभी लोकसभा सीटों पर अगर कोई चुनाव लड़ रहा था तो वे थे नरेन्द्र मोदी न कि रघुवर दास या लोकसभा कैंडिडेट। सच्चाई तो यह है कि अगर ये स्वतंत्र रुप से लड़े, तो इनकी औकात पता चल जायेगा, औकात तो राज्य के सीएम रघुवर को भी पता लग जायेगा, जब वे स्वतंत्र रुप से लड़े। जनता भाजपा को जानती है, भाजपा में नरेन्द्र मोदी को जानती है, और किसी को नहीं जानती।

विपक्षी दलों को अभी से ही सावधान होने की जरुरत

राज्य के सभी विपक्षी दलों को अभी से सावधान हो जाने की जरुरत है, नहीं तो जिस प्रकार से अखबारों व चैनलों ने अपना पैतरां अभी से बदलना शुरु कर दिया है और इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को जीताने का श्रेय मोदी को न देकर, रघुवर दास को देने का प्रबंध कर दिया है, उससे साफ है कि ये सुनियोजित ढंग से विपक्ष के नेताओं को जनता के समक्ष बौना सिद्ध करेंगे और सीएम रघुवर को महान बनाने की कोशिश करेंगे।

ये हर उस न्यूज को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करेंगे, जिनका सत्य से कोई मतलब नहीं होगा और वे मुख्यमंत्री रघुवर दास की जय-जयकार करेंगे, इसलिए विपक्षी दलों को चाहिए कि अभी से ही विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट जाये तथा बहुपक्षीय तैयारी करें। ध्यान रखे, उनकी लड़ाई आज की बिकाउ मीडिया से भी हैं, जो विपक्ष और जन-सरोकार की न्यूज को दबाती है और सरकार के आगे ठुमरी गाने में मस्त हैं।

विपक्षी दलों के नेताओं को चाहिए कि आज से ही वे अखबारों और मीडिया की इस चरित्र को जनता तक पहुंचाये, कि वह कैसे विपक्षी दलों के नेताओं की आवाज को दबा रहा और ऐसे-ऐसे समाचार दे रहा हैं, जिससे जनता को कोई फायदा नहीं, प्रमाण की कोई कमी नहीं, कोई भी अखबार लें और जनता के समक्ष रखे, साफ पता लग जायेगा कि भाजपा को इन अखबारों ने अपने पृष्ठों पर कितना स्थान दिया और विपक्ष को कितना स्थान दिया, ये जरुरी भी हैं, क्योंकि शत्रु केवल एक नहीं हैं, विभिन्न मोर्चों पर ये शत्रु खड़ा हैं, और आपको इन सभी से बुद्धिमानी पूर्वक लड़ना होगा, नहीं तो आप एक बार फिर लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा में मुंह की खायेंगे।

जगह-जगह इन विषयों को लेकर सेमिनार-संगोष्ठी अभी से करना शुरु करें, ताकि जनता के बीच इनकी सही छवि पेश किया जा सकें तथा जनता को जागरुक किया जा सकें, नहीं तो फिर आपको ही पछताना होगा, क्योंकि इन लोगों ने तो तैयारी अभी से ही शुरु कर दी, जो अखबार मोदी को ही रघुवर के सामने बौना बना दें, उसे विपक्षी दलों के नेताओं को बौना बनाने में कितना समय लगेगा? इसलिए बात को समझिये, आराम पर विराम लगाइये, दुश्मन ने गजब की तैयारी की है, उससे लड़ने के हौसले को कम होने मत दीजिये।

Krishna Bihari Mishra

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