सबका मोदी जी करेंगे बेड़ा पार, उदासी मन काहे को करें, इसलिए सभी मिल कर बोले – हर-हर मोदी, घर-घर मोदी, भर-भर मोदी

चुनाव हो गया, परिणाम आ गये, नये-नये निर्वाचित सांसद दिल्ली पहुंच गये, राजनैतिक पंडित विश्लेषण में लग गये, कि आखिर ऐसा परिणाम कैसे आ गया? वह भी तब, जबकि जनता अपने सांसद से इतनी नाराज थी कि पूछिये मत, कई इलाके तो ऐसे थे, जहां पत्रकार जाते थे, तो लोग अपने सांसद का नाम सुनते ही भड़क जाया करते थे, पर जैसे ही वोट का दिन आया, पता चला कि उक्त सांसद के पक्ष में रिकार्ड मतदान हो गये,

चुनाव हो गया, परिणाम आ गये, नये-नये निर्वाचित सांसद दिल्ली पहुंच गये, राजनैतिक पंडित विश्लेषण में लग गये, कि आखिर ऐसा परिणाम कैसे आ गया? वह भी तब, जबकि जनता अपने सांसद से इतनी नाराज थी कि पूछिये मत, कई इलाके तो ऐसे थे, जहां पत्रकार जाते थे, तो लोग अपने सांसद का नाम सुनते ही भड़क जाया करते थे, पर जैसे ही वोट का दिन आया, पता चला कि उक्त सांसद के पक्ष में रिकार्ड मतदान हो गये, और जब परिणाम आया तो जनाब ने एक रिकार्ड ही बना दिया।

यह रिकार्ड बनानेवाले सांसद का नाम है –पशुपति नाथ सिंह, जिन्हें लोग पीएन सिंह के नाम से ज्यादा बुलाते हैं, ऐसे हम आपको बता दें कि पूरे झारखण्ड में जिस प्रकार भाजपा कार्यकर्ताओं की समर्पित टीम धनबाद में हैं, वैसी कहीं नहीं दिखती, इसे आपको स्वीकार करना ही होगा, जिसका लाभ यहां चुनाव लड़ रहे प्रतिनिधियों को प्राप्त हो ही जाता है। जरा धनबाद की जनता की समस्याओं पर नजर दौड़ाइये…

1. यहां बिजली और पानी की समस्या बराबर बनी रहती है, जिसके कारण सालों भर लोग अपने सांसदों को कोसते हैं। 2. भारत के दस प्रमुख प्रदूषित शहरों में शामिल है, धनबाद। जिसमें झरिया और निरसा की हालत ऐसी है कि आप उस इलाके में पहुंच गये तो आप बीमार पड़े बिना नहीं रह सकते, फिर भी लोग यहां बड़ी संख्या में रह रहे हैं, जीवन यापन कर रहे हैं।

3. लगभग दो सालों तक धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन से करीब 52 जोड़ी ट्रेन गायब रही, बिना किसी प्लानिंग के, और अचानक चुनाव का समय आया, तो आनन-फानन में इस रेल लाइन पर ट्रेन सेवा बहाल कर दी गई। धनबाद होकर गुजरनेवाली कई ट्रेनों में आरक्षण कोटे कम कर दिये गये।

4. इस इलाके में बेतरतीब हाइवा चलते है, जिसके चलने से हर कुछ दिन के बाद यहां एक मौतें हो जाया करती है, जबकि जानकार बताते है कि 35 टन से अधिक लोड लेकर चलनेवाली किसी भी वाहन के लिए एक अलग परिवहन की व्यवस्था होनी चाहिए, पर यहां यात्रियों और हाइवा के लिए एक ही सड़क मार्ग है।

5. माइनिंग आउटसोर्सिंग में यहां करीब 42 कम्पनियां लगी है, जो अपराधियों व नेताओं के सांठगांठ से काम करती है, और बारुद लगाकर कोयले को निकालने का काम कर रही है, इनका बीसीसीएल से एमओयू है कि ये कोयले निकालने के बाद उन क्षेत्रों का समतलीकरण कर, वृक्ष लगायेंगे, पर आजतक धनबाद के किसी क्षेत्र में ऐसा देखा नहीं गया, और खान सुरक्षा महानिदेशालय की हिम्मत नहीं कि ऐसे आउटसोर्सिंग में शामिल कम्पनियों की नकेल कस सकें।

6. आज भी शौचमुक्त का नारा देनेवाली इस मोदी और रघुवर सरकार में यहां कई ऐसे विद्यालय हैं, जहां शौचालय नहीं हैं, अगर कही हैं भी तो वहां बालिकाओं के लिए अलग शौचालय नहीं हैं, विद्यालयों का भवन ऐसा है कि वह जर्जर हैं, कब गिर जायेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता।

7. धनबाद में स्वास्थ्य सेवा का कितना बुरा हाल है, उसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस पाटलिपुत्र मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 100 सीटें हुआ करती थी, उसे घटाकर 50 कर दिया गया। इस अस्पताल से जुड़ी एक से एक कहानी है, बताया जाता है कि यहां तो एक ऐसा विभाग है, जिसमें उस रोग से संबंधित एक ही डाक्टर हैं, उनका स्थानान्तरण जब दूसरे जगह कर दिया गया।

जब उक्त डाक्टर ने कहा कि अगर आप हमारा स्थानान्तरण कर देंगे, तो उनके विभाग में ताला लटकाने की नौबत आ जायेगी, वह खुद उसके विभाग में ताला न लगे, इसके लिए पैरवी करते रहे, और स्वास्थ्य विभाग के लोग, उससे घूस मांगने लग गये कि उनका स्थानान्तरण वे रोकवा देंगे, पर उसके लिए कुछ दक्षिणा चाहिए, लेकिन जब वो डाक्टर कहता है कि उसके विभाग में ताला लगे या न लगे, उससे उसे क्या मतलब?

वह जहां स्थानान्तरण हुआ हैं, चला जायेगा और जब दूसरे विभाग के वरीय अधिकारी जब उक्त डाक्टर के उपयोगिता को समझते हैं, तब भी उन्हें शर्म नहीं आती, फिर भी उस डाक्टर को एक अन्य काम के लिए पचास हजार रुपये घूस देने पड़ गये, जो शर्मनाक है। फिलहाल वे डाक्टर अवकाश प्राप्त कर चुके हैं, जिनके साथ ये घटना घटी, यानी स्वास्थ्य विभाग का कारनामा, आपके सामने है।

8. जिस सिंदरी खाद कारखाना को खुलवाने के लिए पीएम मोदी ने बड़ा ताम-झाम किया था, आज भी वह बंद पड़ा है। 9. धनबाद के बगल में देवघर में एयरपोर्ट बनकर तैयार हो रहा है, बोकारो में हैं, धनबाद में नहीं है, जबकि पूर्व में लोग कहते है कि कभी 70-80 के दशक में धनबाद से वायूदुत कंपनी की फ्लाइटें उड़ान भरती थी, जिसमें बीसीसीएल के अधिकारी आया-जाया करते थे।

9. पिछले बीस सालों से धनबाद के लोग एक दिल्ली के लिए स्पेशल ट्रेन चाहते थे, पर आज तक उन्हें इसका लाभ नहीं मिला। 10. कानून व्यवस्था ऐसा है कि लड़कियों के साथ दुष्कर्म के मामले यहां खूब प्रकाशित होते रहते है। 11. यहां तो भाजपा का ही एक विधायक, अपनी ही पार्टी के जिला मंत्री का यौन शोषण करता है, और उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती और वह महिला दर-दर भटकती रही हैं, ये भयावह दृश्य है।

यानी इतनी समस्याएं और यहां के सांसद पीएन सिंह जो दो टर्म सांसद रहे, फिर ये तीसरा टर्म पूरा करने निकल गये, कभी संसद में इन सभी मामलों को लेकर संसद में आवाज नहीं उठाया, क्योंकि अगर संसद में आवाज उठाया होता तो उसका असर भी दिखता, जबकि इन सारी समस्याओं को लेकर, बराबर यहां की जनता पीएन सिंह का दरवाजा खटखटाती रही, लेकिन क्या मजाल कि आम जनता को उनकी समस्याओं से निजात मिल जाये, पर जब लोकसभा 2019 का चुनाव आया तो यहीं जनता उन्हें रिकार्ड मतों से जीता कर संसद भेज रही हैं, आखिर ये क्या हैं? क्या जनता खुद चाहती है कि वह समस्याओं से घिरी रहे? क्या जनता जान चुकी है कि कोई भी सांसद बनेगा तो यहीं करेगा जो वर्तमान सांसद कर रहा है?

कभी इसी धनबाद से मार्क्सवादी समन्वय समिति की ओर से ए के राय सांसद हुआ करते थे, जिनके सत्यनिष्ठ और चरित्रता के आगे पीएन सिंह कही भी नहीं ठहरते, इस बात को धनबाद ही नहीं, बल्कि झारखण्ड की सारी जनता जानती है, फिलहाल ए के राय अभाव ग्रस्त हैं, जो उनको जानते है, वे उनका ध्यान रखते है, क्योंकि उनका मानना है कि सत्यनिष्ठ और चरित्रवानों का अगर समाज मे सम्मान नहीं होगा तो आनेवाले समय में कोई भी व्यक्ति सत्य और चरित्र को नहीं अपनायेगा, सभी चोर-उचक्कों की तरह कार्य करेंगे।

राजनैतिक पंडित बताते है कि दरअसल समाज का भी चरित्र बदला है, वह अभावों-समस्याओं में जीना सीख लिया है, वह जानता है कि नेता कोई भी आयेगा, अपना पेट भरेगा, वो आजकल विभिन्न मीडिया में पैसों के बल पर चल रहे प्रचार और पेड न्यूज के चक्कर में फंस जाता है, उसे लगता है कि जिसका ज्यादा चेहरा देखने को मिल रहा हैं, वो बहुत ही अच्छा है, और लीजिये इसी चक्कर में अपने विवेक को ताखा पर रखकर, अपने सारे अरमानों का गला घोटकर, उस तोते की तरह कि जो रट लगाता था, “शिकारी आयेगा जाल बिछायेगा, लोभ में फंसाना नहीं” और जाल में फंसने के बाद भी वो तोता यहीं रट लगा रहा था “शिकारी आयेगा, जाल बिछायेगा, लोभ में फंसना नहीं,” कहता रहता है।

यहां की जनता का भी उसी तोते के समान हाल हो गया है, यानी न कभी सुधरी थी, और न कभी सुधरेगी। मोदी जैसे लोग आते रहेंगे और ये उनके जाल में फंसते रहेंगे, धनबाद और देश इसी तरह चलता रहेगा, लोग चिल्लाते रहेंगे, हर-हर मोदी, घर-घर मोदी, धर-धर मोदी, भर-भर मोदी, गा-गा मोदी, सुन-सुन मोदी और इसी रटन्त मंत्र से वे परम आनन्द को प्राप्त करेंगे, जैसे हरिभजन से परम आनन्द की प्राप्ति होती है।

Krishna Bihari Mishra

Next Post

वे जीते नहीं, आप हारे, क्योंकि आप जहां एक होकर लड़े, वहां झंडा गाड़ा और जहां बिखड़े, साफ हो गये

Sun May 26 , 2019
ऐसा नहीं कि 2019 में मोदी लहर थी, अंडर करंट था, और मोदी ने भारी सफलता अर्जित कर ली, अगर ऐसा था तो केरल, तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना आदि राज्यों में मोदी ने क्यों नहीं बाजी मार ली? आपके बगल में ही पड़ोस के राज्य ओड़िशा में नवीन पटनायक ने दुबारा सत्ता कैसे हासिल कर लिया? कल तक एनडीए में रहनेवाले चंद्रबाबू नायडू जब एनडीए छोड़कर अलग हुए,

You May Like

Breaking News