घोर आश्चर्य, प्रतिदिन कानून को ठेंगा दिखानेवाले ही, रांची पुलिस को ज्ञान दिये जा रहे हैं

कमाल है, जो नित्य-प्रतिदिन कानून तोड़ते हैं, वह भी पुलिस के सामने और उसके बावजूद पुलिस उन्हें सलाम भी ठोकती हैं, वे इन दिनों एक समाचार को लेकर, अपने अखबार, अपने पोर्टल, अपने चैनल पर रांची पुलिस को खूब खरी-खोटी सुना रहे हैं। जिन्होंने जिंदगी में कभी ईमान से दो रोटी नहीं कमाई, वे भी पुलिस को अनुशासन और ड्यूटी की सीख दे रहे हैं। है न आश्चर्य।

कमाल है, जो नित्य-प्रतिदिन कानून तोड़ते हैं, वह भी पुलिस के सामने और उसके बावजूद पुलिस उन्हें सलाम भी ठोकती हैं, वे इन दिनों एक समाचार को लेकर, अपने अखबार, अपने पोर्टल, अपने चैनल पर रांची पुलिस को खूब खरी-खोटी सुना रहे हैं। जिन्होंने जिंदगी में कभी ईमान से दो रोटी नहीं कमाई, वे भी पुलिस को अनुशासन और ड्यूटी की सीख दे रहे हैं। है न आश्चर्य।

दरअसल कल एक घटना घटी, एक मां-बेटी, बिना हेलमेट के स्कूटी चला रही थी, ट्रैफिक पुलिस ने उसे रोकने की कोशिश की, लड़की ने ट्रैफिक पुलिस को झांसा देने की कोशिश करते हुए भागने की कोशिश की, पुलिस ने उसे पुनः रोकने की कोशिश की, जिसमें दोनों मां-बेटी स्कूटी से गिर पड़ी, हल्की चोटें आई, और लीजिये अखबारौं-चैनलों-पोर्टलों और सोशल साइट में इसे लेकर बवाल हो गया।

बवाल कौन कर रहे हैं, तो बवाल वे कर रहे हैं, जो अपनी मोटरसाइकिल में प्रेस लिखवाकर चलते हैं, जो पूर्णतः अवैध हैं। बवाल कौन कर रहे हैं, जो खुद हेलमेट का प्रयोग नहीं करते, क्योंकि वे पत्रकार हैं, शायद उन्हें ईश्वर से यह वरदान मिला है कि जब उनका कभी एक्सीडेंट होगा तो उनके सिर नहीं फटेंगे, चूंकि उनके सिर को स्पेशल कंपनी द्वारा बनवाया गया हैं। कुछ लोग तो अपनी औकात भूलकर पुलिस को गालियों से भी सुशोभित कर रहे हैं।

अब सवाल उठता है कि एक मामूली कांस्टेबल, जो हमारी सुरक्षा के लिए ही तैनात है, अगर वह रुकने का सिग्नल दे रहा हैं तो वह लड़की क्यों नहीं रुकी? वो तो पुलिस को झांसे देकर, भाग निकलना चाहती थी, जिसके कारण हादसा हुआ, अगर वह झांसा देकर निकल जाती, तो ये ही प्रेस वाले लिखते कि एक छोटी सी लड़की रांची पुलिस को औकात बता दी, और लड़की की मां अपनी बेटी की तुलना घर में जाकर झांसी की रानी से कर देती कि उसने तो उस कांस्टेबल को ऐसा झांसा दिया कि वह देखता रह गया और स्कूटी सवार दोनों वहां से फुर्र से निकल गई।

यह कैसी मां हैं, जो अपनी बेटी को यह नहीं बताती कि उसका सिर, उसके लिए ही नहीं, बल्कि उसके परिवार के लिए कितना कीमती है?  यह कैसी मां है, जो अपने बेटी को बिना हेलमेट पहने निकलने देती है? ये कैसी मां है, जो अपनी बेटी को कानून तोड़ने का संदेश देकर, वहीं से फुर्र से निकलने की तमाशा को देखते रहती हैं और एक शब्द इसके खिलाफ बोलती नहीं? और ये कैसा देश हैं जहां गलत को गलत न कहकर, सीधे उसको गलत कहां जा रहा हैं, जिसने गलत को रोकने की कोशिश कर दी? इसीलिए न कि वह कांस्टेबल हैं।

नहीं तो पूछो, इन प्रेसवालों से कि पिछले साल इसी दुर्गा पूजा में बिना हेलमेट के राज्य के सीएम रघुवर दास जमशेदपुर घुम गये थे, क्यों नहीं इन प्रेसवालों ने इसे लेकर बावेला मचाया, क्या उस वक्त सीएम द्वारा दिये जानेवाले गिफ्ट और प्रलोभन याद आ गये थे, ये तो वहीं बात हो गई कि ‘निबरा के जोरु सबके भौजाई’, एक कांस्टेबल उस पर उलझ जाओ, और खुद गलत पर गलत करते जाओ और अपना दीदा मत देखो।

इधर देश में एक नया फंडा देखने को मिल रहा हैं, जो जितना कानून तोड़े, उसके समर्थक उतने ही ज्यादा और उतने ही प्रभावशाली। अब जरा कोई हमें बताएं कि किसी स्टेशन पर टिकट चेकिंग अभियान चल रहा हो, और अचानक कोई बेटिकट युवा, इस टिकट चेकिंग अभियान को देखकर खुद को बचाने के लिए, ट्रेन की पटरी पर छलांग लगा दें और उसी दरम्यान कोई ट्रेन, उसे चीरती हुई निकल जाये तो उसमें क्या ट्रेन की गलती होगी, टिकट चेकिंग अभियान में लगे लोगों की गलती होगी?

मैं तो यहां करीब से बहुत पत्रकारों को देखा हूं कि जो भी यहां पुलिस अधीक्षक आता है, बहुत सारे पत्रकारों का वह भैया बन जाता है, और इस भैयागिरी में उक्त पत्रकार इतना अच्छा कमा लेता है कि उसके रिश्ते उक्त पुलिस अधीक्षक के घर तक पहुंच जाते हैं, फिर वह पुलिस अधीक्षक पदोन्नति करता है, तो उससे और रिश्ते गहराते जाते हैं और फिर वह पत्रकार भी कई कट्टे जमीन व संपतियों का मालिक हो जाता है, इसी आड़ में वह पुलिस पदाधिकारी कई गलत काम करता है, पर उक्त पत्रकार के मन में, उसके लिए शहद ही टपकते हैं, पर एक मामूली कांस्टेबल के लिए, अखबार रंगा जाता हैं, चैनल रंगा जाता है, पोर्टल रंगा जाता है, जैसे लगता है कि जनाब वैद्यनाथधाम में चढ़ाये जानेवाले पंचामृत से भिंगोये गये हो।

हाल ही में अमृतसर में जो घटना घटी, क्या उसके लिए वह ट्रेन डॉइवर दोषी है, जो ट्रेन चला रहा था, या वे लोग दोषी हैं, जो पटरी पर चढ़कर तमाशा देख रहे थे, हमारा मानना है कि जहां भी गलती हो, जो गलत कर रहा हैं, जो कानून को मजाक बनाने की कोशिश कर रहा हैं, उसकी कड़ी आलोचना करिये, न कि जो सही करने में लगा है, उसे ही कटघरे में रख दीजिये, क्योंकि अगर ऐसा होता रहा तो फिर स्थिति बड़ी विकट होगी, क्योंकि तब पुलिस जेल के अंदर होगी और चोर थाना चलायेंगे, ठीक उसी प्रकार जैसे आज ईमानदार पत्रकार दो रोटी को तरस रहे हैं और बेईमान पत्रकारों का समूह, लंदन में जाकर चम्मच चुराकर मस्ती कर रहा होता हैं। ऐसे कल की घटना की फोटो, हमने भी दे दी हैं, और खुद देखिये कि गलत कौन कर रहा हैं, स्कूटी सवार लड़की और उसकी मां या वह कांस्टेबल, जिसे जिम्मेदारी दी गई है कि वह कानून का पालन कराएं।

Krishna Bihari Mishra

Next Post

जिस-जिसने अपने चरित्र को संभाल कर रखा, वे आज भी आदरणीय हैं और जिसने चरित्र को...

Thu Oct 25 , 2018
तुम जो चाहते हो, वह प्राप्त होता है, पर ये तुम्हें निश्चय करना हैं कि वह चीज जो तुम प्राप्त करना चाहते हो, कैसे प्राप्त करना चाहते हो? असत्य का मार्ग अपनाकर, या सत्य का मार्ग अपनाकर, अगर तुम्हे कोई कष्ट होता है या दर्द का अनुभव होता है तो समझो तुम पर ईश्वर बहुत प्यार लूटा रहा है, वह तुम्हारे साथ है, क्योंकि जिन्हें ईश्वर सुख प्रदान करता है, उससे ईश्वर बहुत दूर चला जाता है।

Breaking News