पहले FIR को जस्टिफाइ करने के लिए दूसरा FIR दायर, चुनाव आयोग संज्ञान लें – विनोद सिंह, CPIML

पिछले दिनों हिंदपीढ़ी में निर्दोष 16 मुसलमानों के खिलाफ दायर किये गये प्राथमिकी की भाकपा माले के वरिष्ठ नेता विनोद कुमार सिंह ने कड़ी आलोचना की है। आज विद्रोही24.कॉम से बातचीत के क्रम में उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इस मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए तथा इस प्रकार के घटनाक्रम को रोकना चाहिए, नहीं तो स्थितियां बिगड़ेगी, लोगों का चुनाव आयोग पर से विश्वास डिगेगा,

पिछले दिनों हिंदपीढ़ी में निर्दोष 16 मुसलमानों के खिलाफ दायर किये गये प्राथमिकी की भाकपा माले के वरिष्ठ नेता विनोद कुमार सिंह ने कड़ी आलोचना की है। आज विद्रोही24.कॉम से बातचीत के क्रम में उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इस मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए तथा इस प्रकार के घटनाक्रम को रोकना चाहिए, नहीं तो स्थितियां बिगड़ेगी, लोगों का चुनाव आयोग पर से विश्वास डिगेगा, क्योंकि अंततः इस स्थिति में जो भी कुछ करना है, वो चुनाव आयोग को करना है।

विनोद कुमार सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी वंचित समाज अपनी मांगों को रख सकता है, इसलिए उनकी मांगों को आचार संहिता का उल्लंघन मानना, सही नहीं ठहराया जा सकता, उनका कहना था कि पहले 16 मुसलमानों को चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी और अब विश्व ब्राह्मण संघ के अध्यक्ष धर्मेन्द्र तिवारी के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन की प्राथमिकी, साफ बताता है कि प्रशासन यह दिखाना चाहता है कि देखिये हमने अगर आपको नहीं छोड़ा तो इन्हें भी नहीं छोड़ रहे।

भाकपा माले नेता ने साफ कहा कि ये मामला साफ बताता है कि पहला मुकदमा जो गलत किया गया, उसको इससे जस्टिफाइ करने की कोशिश कर दी गई, जिसे सही नहीं ठहराया जा सकता, उनकी मांग है कि चुनाव आयोग को इस पर संज्ञान लेना चाहिए, ताकि इसकी आड़ में कोई निहायत शरीफ या लोकतंत्र का हिमायती केस-मुकदमे के चक्कर में न पड़ जाये, क्योंकि इससे लोकतंत्र मजबूत नहीं होगा, बल्कि इससे लोकतंत्र खतरे में पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि देश की कौन ऐसी राजनीतिक पार्टियां नहीं हैं, जो धर्म व जाति के नाम पर वोट नहीं मांग रही है, यहां तो जाति व धर्म देखकर ही सीटों का बंटवारा और वोट मांगे जा रहे हैं, ऐसे में इनके द्वारा उचित बातों के लिए  किये गये चिन्तन बैठक को आप गलत नहीं ठहरा सकते, इसे चुनाव कार्य में लगे अधिकारियों को समझना होगा।

इधर चुनाव आचार संहिता के जानकार बताते है कि दरअसल चुनाव कार्य में लगे अधिकारियों को पता ही नहीं है कि चुनाव आचार संहिता क्या है? वे कैसे-कैसे प्राथमिकी दर्ज कर दे रहे हैं? उन्हें पता नहीं है, हालांकि ये मामला ज्यादा दिनों तक अदालत में टिकेगा भी नहीं और न ही आज तक जिन नेताओं पर चुनाव आचार संहिता के आरोप लगे, उन्हें कभी सजा हुई, पर नेता तो नहीं, लेकिन सामान्य लोग जिनकी राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं, इन अधिकारियों के गलत रिपोर्टिंग के कारण वे अदालत के चक्कर में अपना सुख-चैन और पैसे जरुर बर्बाद कर लेंगे।

सचमुच, भाकपा माले नेता विनोद कुमार सिंह ने अगर ये कहा है कि चुनाव आयोग को इस पर संज्ञान लेना चाहिए तो इसमें देर नहीं होना चाहिए। नहीं तो लोगों का अगर चुनाव आयोग पर से विश्वास उठ जायेगा तो स्थिति दयनीय हो जायेगी, क्योंकि बहुत वर्षों बाद चुनाव आयोग पर विश्वास लोगों का जमा हैं, और इसका सारा श्रेय निःसंदेह टी एन शेषण को जाता है।

Krishna Bihari Mishra

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