राजनीति

भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल के खिलाफ संपूर्ण विपक्ष का झारखण्ड बंद 5 जुलाई को

भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक को लेकर आज नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन के आवास पर राज्य की सभी प्रमुख विपक्षी दलों एवं राज्य के विभिन्न सामाजिक संगठनों की बैठक संपन्न संपन्न हो गई, बैठक संपन्न हो जाने के बाद संवाददाताओं से बातचीत के दौरान नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने कहा कि भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक के खिलाफ आगामी 5 जुलाई को संपूर्ण विपक्ष झारखण्ड बंद कराने के लिए सड़कों पर उतरेगा, जिसमें राज्य के प्रमुख सामाजिक संगठन भी सहयोग करने को तैयार है।

हेमन्त सोरेन ने कहा कि भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक को लेकर पूरे राज्य  में जनाक्रोश हैं। हर गांव, कस्बा, मुहल्ला सरकार के इस विधेयक के खिलाफ अपना मन बना चुका हैं। चाहे आदिवासी हो या मूलवासी सभी को लग रहा है कि राज्य सरकार उसके साथ भूमि को लेकर छल कर रही हैं। जिसका जवाब देना बहुत जरुरी हो गया है।

हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज की बैठक में जनांदोलन को एक रुप देने के लिए कार्डिनेशन कमेटी का भी गठन कर दिया गया है, जिसकी जिम्मेवारी हेमन्त सोरेन को दी गई है। हेमन्त सोरेन ने कहा कि जनांदोलन की शुरुआत 19 जून से प्रारम्भ होगा, कल यानी 19 जून को पूरे राज्य में राज्य सरकार का पुतला दहन किया जायेगा, 21 जून को राज्य के सभी प्रखण्डों में धरना व प्रर्दशन, 25 जुन को जिलास्तर पर प्रदर्शन तथा 28 जून को राजभवन के समक्ष महाधरना का आयोजन किया जायेगा, जिसमें पूरे राज्य से करीब 50 हजार से भी ज्यादा आंदोलनकारी शामिल होंगे, जो रांची से लेकर दिल्ली में बैठी केन्द्र सरकार तक अपनी आवाज पहुंचायेंगे और कहेंगे कि वे जो झारखण्ड की जनता के खिलाफ कुचक्र रच रहे हैं, वो बर्दाश्त के बाहर है।

हेमन्त सोरेन ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को चुनौती दी कि अगर उनमें थोड़ी सी भी नैतिकता है तो वे भूमि मामले में श्वेत पत्र जारी करें और राज्य की जनता को बताएं कि झारखण्ड बनने के बाद कितने जमीने सरकार के पास थी? कितनी जमीनें सीएनटी-एसपीटी के तहत थी? मोमेंटम झारखण्ड के दौरान कितनी जमीनें उद्योगपतियों को रेवड़ी की तरह बांटी गई? ये सारा ब्यौरा प्रस्तुत करें? हेमन्त सोरेन ने कहा कि दरअसल राज्य सरकार पूरी तरह से अपना हिडेन एजेंडा चला रही है,  राज्य की जनता के साथ छल कर रही है, जो शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा ही हाल रहा, तो आनेवाले समय में भाजपा का एक भी कार्यकर्ता पूरे झारखण्ड के गांवों में कहीं मुंह दिखानेलायक नहीं रहेगा।

उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में जनता त्राहिमाम कर रही हैं, पर सरकार को इसकी कोई चिन्ता नहीं है, राज्य की महिलाएं-लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं, कानून-व्यवस्था ठप है, राज्य में साम्प्रदायिक सद्भाव खत्म हो रहा हैं, राज्य की जनता को लग रहा है कि उसकी जल, जंगल जमीन पर भी खतरा मंडराने लगा है, ऐसे में संपूर्ण विपक्षी की जिम्मेदारी बन जाती है कि ऐसी सरकार के खिलाफ निर्णायक आंदोलन चलाया जाये, जिसके लिए आज संपूर्ण विपक्ष और सामाजिक संगठन पूरी तरह से तैयार हैं।