सरकार ने कहा, “आजा मेरी गाड़ी में बैठ जा”, वे उछलकर गाड़ी में बैठ, सरकार के आगे दंडवत हो गये

सरकार ने कहा, “आजा मेरी गाड़ी में बैठ जा”, और वे उछलकर गाड़ी में बैठ, सरकार के आगे दंडवत हो गये। वाह री सरकार और वाह री यहां की मीडिया। दोनों का जवाब नहीं। विज्ञान की “सहजीविता” के आधार को इस प्रकार कस के पकड़ लिया कि सारी पत्रकारीय मर्यादाएं ही धूल-धूसरित हो रही हैं, और इसमें आप केवल एक को दोषी नहीं ठहरा सकते, इसमें सभी ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर ली है।

सरकार ने कहा, “आजा मेरी गाड़ी में बैठ जा”, और वे उछलकर गाड़ी में बैठ, सरकार के आगे दंडवत हो गये। वाह री सरकार और वाह री यहां की मीडिया। दोनों का जवाब नहीं। विज्ञान की सहजीविता के आधार को इस प्रकार कस के पकड़ लिया कि सारी पत्रकारीय मर्यादाएं ही धूलधूसरित हो रही हैं, और इसमें आप केवल एक को दोषी नहीं ठहरा सकते, इसमें सभी ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर ली है।

संपादकीय पृष्ठों को पेड न्यूज में बदलने के इस दौर में, झारखण्ड में अब पत्रकारिता के नये दौर का समावेश हो चुका है, और चूंकि झारखण्ड में बस दोतीन महीने के बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं, इसलिए राज्य सरकार ने मीडिया के लोगों पर सामदामदंडभेद की नीति अपनानी शुरु कर दी है, जो अर्थतंत्र के आगे झूकने को तैयार है, उन्हें अर्थतंत्र से।

जो नाना प्रकार के प्रलोभनों से सरकार के आगे झूकने को तैयार हैं, उन्हें प्रलोभनों से और जो सरकार के आगे किसी भी कीमत पर झूकने को नहीं तैयार है, उन पर अपने कार्यकर्ताओं से कहकर ऐसा केस में फंसाने की तैयारी की जा रही हैं और उसमें पुलिस के उच्चाधिकारियों को लगा दिया जा रहा है कि उस व्यक्ति के सम्मान का तेल ही निकल जाये, ये तो चूंकि यहां अभी भी न्यायालय है, जिस पर लोगों को थोड़ा भरोसा है, तो चल रहा हैं, नहीं तो लोग यहां तो सरकार और ही यहां के पुलिस पदाधिकारियों पर भरोसा करते हैं। चूंकि उनका सम्मान ईश्वर रख रहा हैं, इसलिए ईश्वर पर वे ज्यादा भरोसा करते हैं।

खैर, इधर मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय के इशारों पर, मीडिया को अपने कब्जे में लेने की तैयारी युद्धस्तर पर शुरु हो चुकी है, कई मीडिया के लोग इसके लिए पहले से ही कमर कस चुके हैं, ज्यादातर अपनी कमर झूका कर रघुवर शरणम् गच्छामि बोल चुके हैं और उसका प्रमाण है, अखबारों में छप रही सरकार का गुणानवाद्।

सूत्र बताते हैं कि राज्य सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के रघुवर भक्त अधिकारियों ने राज्य में फिर से रघुवर दास को मुख्यमंत्री बनाने के लिए नई योजनाएं तैयार की है। इस योजना को मूर्तरुप भी दिया जाने लगा है, और इसमें अखबारचैनल के सारे लोगों को लगा दिया गया है, चूंकि अखबार के लोगों को मनचाहा विज्ञापन मिल रहा है, इसलिए ये सरकार के आगे वो हर प्रकार की हरकत करने को तैयार है, जिसकी इजाजत समाज नहीं देता।

सूत्र बताते है कि सरकार की इमेज जनता के बीच बेहतर बने, इसके लिए पत्रकारों को राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कराया जा रहा है, जहां इन्हें रहने, भोजभात की विशेष व्यवस्था भी कराई जा रही है, तथा इनके माध्यम से राज्य के सभी प्रमुख अखबारों के प्रथम पृष्ठ पर पेड न्यूज की तरह समाचार लिखनेलिखाने की तैयारी शुरु हो चुकी है।

जिसकी शुरुआत 30 जुलाई 2019 से शुरु हुई। पहली शुरुआत में तीन जिलों को चुना गया। ये जिले थे पाकुड़, लातेहार और चाईबासा। ये तीनों जगहों पर गई टीम कल यानी 2 अगस्त को रांची लौटी है, और इनके लौटने के बाद, जो अखबार आज दिखा है, उसमें राज्य सरकार की इमेज सुधारने की छवि स्पष्ट दिख रही है।

इन दौरों पर गये पत्रकारों ने अपनी जिम्मेदारी ईमानदारीपूर्वक निभाई है, उन्होंने सरकार की इमेज बहुत बढ़िया से चमका दी है, और हमें लगता है कि इसका फायदा भविष्य में अगर भाजपा की सरकार बनी तो इन पत्रकारों और अखबारों के संपादकों और मालिकों को अवश्य मिलेगा।

सूत्र बताते है कि इस दौरे में शामिल होने के लिए, हिन्दुस्तान अखबार से भी आइपीआरडी के लोगों ने संपर्क किया था, पर हिन्दुस्तान अखबार ने रांची से पाकुड़, लातेहार या चाईबासा जाने से इन्कार कर दिया। इस अखबार का कहना था कि जब उनकी टीम इन जिलों में हैं ही, तो वहीं टीम इस प्रकार के काम कर देगी, क्या जरुरत है, यहां से इन जिलों में जाने की।

सूत्र ये भी बताते है कि उक्त अखबार ने यह भी दबे जबान से कह दिया कि जब विज्ञापन का आधार पेड न्यूज और चेहरा चमकाना ही है, तो फिर यहां से पत्रकारों को ले जाने की क्या जरुरत है, आप ही किसी से अपने चेहरे चमकाने के लिए कुछ भी बना दीजिये और छपवा लीजिये, क्या फर्क पड़ता है?

सूत्र बताते है कि इन तीन जिलों में गई टीम में बड़े से लेकर छोटे अखबारों के लोग थे, जो अपनेअपने संपादकों के कहने पर इन तीन जिलों में गये और सरकार तथा सम्पादकों के इशारे पर न्यूज बनाकर रख दिया, जिसका कोई औचित्य नहीं था, लेकिन जो देश में स्थिति हैं, उसका असर झारखण्ड में न हो, ये कैसे हो सकता है?

राजनीतिक पंडितों की मानें तो राज्य सरकार के पास बहुत सारी संस्थाएं और धन हैं, जिसका उपयोग वह अपने इमेज बनाने के लिए कर सकती है, पर विपक्ष को ये सब करने के लिए कहां से धन या संस्थाएं उपलब्ध होगी, और ये अखबारचैनल जब सरकार के इशारे पर ही चलेगी तो इसका क्या आधार है कि आनेवाले समय में या जब कभी विधानसभा के चुनाव होंगे तो ये पत्रकारीय धर्म को प्रतिष्ठित करेंगे, जब वे आज ही सरकार के आगे बिछने को तैयार है, तो कल ये क्यों नहीं बिछेंगे?

सूत्र बताते है कि इन टीमों के साथ आइपीआरडी ने एक विशेष व्यक्ति को भेजा था, जो इनके हर प्रकार से ख्याल रखें, साथ ही जहां ये टीम गई थी, वहां के जिलाधिकारियों और सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग को हिदायत दे दी गई थी, कि इन महानुभावों को किसी प्रकार की तकलीफ हो, क्योंकि ये फिलहाल मुख्यमंत्री के इमेज को बनाने के लिए निकले हैं, और सचमुच जैसे ही वे कल लौटे और आज अखबारों में जो कुछ दिखा, अखबार और उनके द्वारा भेजे गये पत्रकारों ने अपनी भूमिका शत प्रतिशत ईमानदारी से निभा दी।

राजनीतिक पंडित कहते हैं कि पत्रकारिता को बचाना है, तो इन सभी हरकतों पर अंकुश लगाना होगा, ये एक प्रकार का दाग है, इससे जितना बचा जाय, उतना अच्छा रहेगा, नहीं तो इस कलंक में केवल अखबार-चैनल ही नहीं, बल्कि पूरा राज्य स्वाहा हो जायेगा, और जो नई पीढ़ी पत्रकारिता के पवित्र पेशे में आने की कोशिश कर रही हैं, वो हमें कभी माफ नहीं करेगी।

Krishna Bihari Mishra

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