जिस दिन ईसाई मिशनरियों का षडयंत्र सफल हुआ, हेमन्त सोरेन या उनके परिवार का कोई सदस्य फिर कभी CM नहीं बन पायेगा: जगन्नाथ शाही

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“मैं कौन होता हूं, यह तय करनेवाला कि आगे क्या होना है? यह तो समाज व देश के लोगों को तय करना है, कि वे कैसा समाज, कैसा देश चाहते हैं, रणनीति तो समाज व देश को तय करनी होगी, जैसे परतंत्र भारत में देशवासियों ने यह तय किया कि देश को स्वतंत्र कराना है, देश स्वतंत्र हो गया।” यह उद्गार है विश्व हिन्दू परिषद् के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगन्नाथ शाही के, जो खूंटी में पत्रकारों से बात कर रहे थे

जगन्नाथ शाही ने कहा कि देश के नेताओं ने लोगों को जगाया, देश जगा, आज देश स्वतंत्र है, ठीक उसी प्रकार जो आदिवासी को मिटाने पर तूले है, उनकी संस्कृति की जड़ को खोदने का प्रयास कर रहे हैं, उन क्रिश्चियन मिशनरियों को कैसे जवाब देना है? ये समाज को तय करना है, देश को तय करना है, इसमें हम कहां से आते हैं, मैं तो स्वयंसेवक हूं, सेवक का कार्य स्वामी की सेवा करना है, तो मेरे लिए स्वामी कौन है? सारा देश व समाज जानता है।

उन्होंने कहा कि ईसाई मिशनरियों ने जो झारखण्ड में आदिवासियों को हिन्दूओ से अलग करने का षडयंत्र रचा है, उसे हम कभी सफल नहीं होंने देंगे। आज खूंटी आने का कार्यक्रम इसलिए हमने बनाया, क्योंकि जिस करिया मुंडा ने अपने पूर्वजों तिलका मांझी से लेकर भगवान बिरसा मुंडा तक के सपनों को पूरा करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, वैसे करिया मुंडा का पुतला दहन ईसाई मिशनरियों द्वारा खूंटी में किया गया, यह हमें ही नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी व हिन्दू समाज को झकझोर कर रख दिया है, ये असहनीय है।

अच्छा तो यह होता कि राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन स्वयं इसका संज्ञान लेते, और ऐसे लोगों पर कार्रवाई करते, क्योंकि अपने लोगों का जो व्यक्ति सम्मान करता है, दरअसल वहीं व्यक्ति समाज का भविष्य में नेतृत्व कर यश प्राप्त करता है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि करिया मुंडा का पुतला दहन कर ये ईसाई मिशनरियां अपने दो लक्ष्यों को इससे साधना चाहती है। पहला ये बताना चाह रही है कि जो लोग आदिवासी समाज को बचाने के लिए जीवन समर्पित कर दिये हैं, उन्हें मालूम हो जाये कि हम आज यहां इतने मजबूत हो गये है कि हम तुम्हारा पुतला दहन भी कर सकते हैं।

दूसरा आदिवासी समाज जो हिन्दू समाज का प्रहरी है, वो हिन्दू समाज जान लें कि हिन्दूओं का यह प्रहरी अब उनका नहीं रहा, ईसाई मिशनरियों का हो चुका है, और ये ईसाई मिशनरियों का खुला एजेंडा रहा है, कोई नया नहीं है, ये यही करते आ रहे हैं, पर इसका जवाब अब समाज को देना है, देना ही होगा, नहीं तो ये नागालैंड, मेघालय व अरुणाचल प्रदेश की तर्ज पर काम करना शुरु कर दिये है, वे चाहते है कि झारखण्ड भी उसी तर्ज पर चलें।

उन्होंने कहा कि करिया मुंडा के पुतला दहन के अपमान का बदला तो आदिवासी समाज को खुद लेना चाहिए, क्योंकि अपने पूर्वजों का अपमान जो व्यक्ति या समाज चुपचाप देखता है, वो कालांतराल में स्वयं समाप्त हो जाता है। यहां के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को समझ लेना चाहिए कि जब आदिवासी हिन्दू रहेंगे तभी वे मुख्यमंत्री बन पायेंगे, नहीं तो नागालैंड-मेघालय की तरह जैसे कि वहां अब ईसाई ही मुख्यमंत्री बनते हैं, आप(हेमन्त सोरेन) नहीं बन पायेंगे, क्योंकि ईसाई मिशनरियों का ये खुला एजेंडा है, इसे स्वीकार करना ही होगा। जगन्नाथ शाही को क्या है, वो मुख्यमंत्री बनने के लिए थोड़े ही पैदा हुआ है, जिन्हें राजनीति करनी है, जिन्हें मुख्यमंत्री बनना है, वे सोचे कि क्या ऐसा कर वे फिर कभी या उनके परिवार के लोग मुख्यमंत्री या मंत्री भी बन पायेंगे, या झारखण्ड में ईसाई मिशनरियों का राज चलवायेंगे।

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