सरयू ने उठाए सवाल, जब गले में उंगली डालकर सवालों के जवाब लेने की नौबत आ जाये तो फिर ऐसे सदन का क्या मतलब?

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जिस प्रकार से आज झारखण्ड विधानसभा में वरिष्ठ नेता व निर्दलीय विधायक सरयू राय ने आसन के माध्यम से राज्य के मंत्रियों व उनके अधिकारियों की नकेल कसी है, वैसा नकेल कसने की कोशिश आज तक किसी ने नहीं की। सरयू राय ने आज सदन में स्पष्ट रुप से कहा कि राज्य के कुछ विभागों के अधिकारी सदन में उठ रहे सवालों का जवाब सहीं ढंग से नहीं दे रहे हैं, और अगर ये इसी प्रकार से अपने कामों को अंजाम देते रहें तो ये सदन के लिए स्वस्थकर नहीं होगा।

सरयू राय ने विधानसभा में ताल ठोककर क्या कहा, हम हुबहू  उसे यहां प्रकाशित कर रहे हैं – “मैंने क्या पूछा था और इन्होंने (मंत्री) क्या जवाब दिया? सरकार भी जानती है। मैंने मुख्यमंत्री को इस सबंध में नहीं लिखा है, अभी जानकारी इसकी जरुर मिलेगी, पर मुझे लगता है कि प्रवृति हो गई है। अधिकारी ये समझते हैं कि इस सरकार में अगर उनके कारनामों की सही सूचनाएं सदन में जायेंगी, तो उनकी बदनामी होगी।

उनका नुकसान होगा। सदन या सरकार अधिकारियों के प्रति जिम्मेदार नहीं है, अधिकारी जिम्मेदार है। अगर यही हाल रहा मुझे जैसे लोगों की आरजू, विनती, मिन्नतें सब बेकार जायेगी तो फिर हमें उपाय लगाना होगा, कि उनकी गले में उंगली डालिये और सही सूचना निकालिये, अगर ये परिपाटी शुरु होती है, तो ये सदन के लिए भी स्वस्थकर नहीं होगी।

इससे सदन की प्रतिष्ठा बढ़ेंगी नहीं, इसलिए जो सदन के प्रति जिम्मेदार है, वो इन बातों को कहें और जो हमारी योजनाएं हैं, वो गतिशील बनें, क्योंकि हम महसूस कर रहे हैं कि इससे अच्छा है कि सूचना के अधिकार के तहत सवाल करें, क्योंकि उसमें तो मात्र दस रुपये लगते हैं, साथ ही उसमें अपील का भी अधिकार है, यहां तो प्रश्न अनागत में चले जाते हैं, इसलिए अगर कोई सवाल कर रहा है तो मंत्री व सरकार को चाहिए कि वे इस पर अधिकारियों की क्लास लगाये, उनसे सही जवाब मिले, ऐसी व्यवस्था करें, नहीं तो इससे सदन की प्रतिष्ठा प्रभावित होगी।”

अब सवाल उठता है कि क्या केवल सरयू राय ऐसे माहौल से अंसतुष्ट है, नहीं ऐसे कई विधायक है, जो स्वयं द्वारा पूछे गये प्रश्नों के उत्तर सुनकर खफा है, पर वे इस प्रकार मुखर नहीं होते, जैसा कि सरयू राय मुखर है, सत्ता पक्ष के ही झामुमो के वरिष्ठ नेता लोबिन हेम्ब्रम ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उनके जो सवाल है, उसके जवाब सुनकर वे संतुष्ट नहीं हैं, आखिर सदन में उपस्थित विधायकों के सवालों के सही जवाब कौन देगा? उत्तर है मंत्री? उन सवालों के उत्तर बनायेगा कौन? उत्तर है – अधिकारी और सवालों के उत्तर में अंततः घिरेंगे कौन? उत्तर है – अधिकारी, तो ऐसे में अधिकारी खुद को, या अपने जैसे अधिकारियों को बचाने के लिए कसरत अवश्य करेंगे।

ऐसे में तो सरकार में शामिल मंत्रियों की यह पहली और अंतिम ड्यूटी बन जाती है कि वे सवालों के बने उत्तरों को जांचकर खुद भी संतुष्ट हो लें, पर ऐसे कितने मंत्री हैं जो सदन में प्रश्नों के उत्तर देने के पहले  होमवर्क करके आते हैं? ज्यादातर मंत्रियों का समय तो स्वयं के गुमान और घमंड में ही चला जाता है, जिसका फायदा अधिकारी व उनके चाटुकार उठाते हैं, ऐसे में तो जो होना है, वो होगा ही, चाहे लोबिन हेम्ब्रम या सरयू राय कितना भी सवाल उठा दें।

अंततः जैसा कि उन्होंने सदन में कहा कि गले में उंगली डालकर उत्तर निकलाने की कला का इस्तेमाल करना होगा, तो देखते है कि सदन में कही हुई बात, सदन के बाहर कब इस्तेमाल होती है, क्योंकि जो कई सालों से चलता आ रहा है, वो अभी चल ही रहा है, और इसी  चलने के क्रम के कारण कई भ्रष्ट अधिकारी स्वयं को हर प्रकार से मुक्त होकर, झारखण्ड से कई हजारों किलोमीटर दूर जाकर, अपने जीवन का स्वर्गिक आनन्द ले रहे हैं, क्योंकि वे जानते है कि झारखण्ड विधानसभा में बैठे मंत्रियों का समूह हो या कोई अन्य दल का विधायक, उन्हें कैसे और कब अपने गिरफ्त में लिया जाता है? उन्हें पता है

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