एक टवीट ने कुछ लोगों की नींद उड़ा दी

अद्वैत हेब्बार की एक ट्वीट ने पूरे झारखण्ड में तहलका मचा दिया है, जो लोग उन्हें जानते हैं, जिनकी उनकी इस ट्वीट पर नजर पड़ी, उसने इसकी एक फोटो ले ली और वायरल कर दिया। सूत्र बताते है कि ये पूरा मामला झारखण्ड से जुड़ा है, पर अद्वैत हेब्बार की इस ट्वीट में कहीं भी झारखण्ड का जिक्र नहीं है, लेकिन इज आफ डूइँग बिजनेस, बेटे का व्यवसाय में निवेश आदि के मामले होने के कारण लोग इसे झारखण्ड से जोड़ कर देख रहे हैं,

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झारखण्ड में भारी वर्षा, स्कूल बंद, पुल-पुलिये बहे, भारी तबाही

झारखण्ड में पिछले चार दिनों से हो रही भारी बारिश ने भारी तबाही मचा दिये है, भारी वर्षा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने स्कूल को बंद करने का आदेश जारी किया है, जन-जीवन अस्त व्यस्त है, सड़कों-बाजारों में सन्नाटा पसरा है, घर में लोग दुबके है, निकल वहीं रहा हैं, जिसे ज्यादा जरुरी कोई काम आ गया है, सरकारी कार्यालयों में भी इस भारी बारिश के प्रभाव है। मुख्य मार्गों पर पानी बह रहा है, कई गांव टापूओं में बदल गये है

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ढाई साल बीत गये, जनाब कठिनाइयों व प्राथमिकताओं का अवलोकन ही कर रहे है, काम कब करेंगे?

ढाई साल बीत गये, और अभी भी मुख्यमंत्री रघुवर दास कठिनाइयों और प्राथमिकताओं का अवलोकन ही कर रहे है, तो फिर काम कब करेंगे? हर बार यहीं रोना रोते है, वह भी ढोल पीटकर कि 70 सालों में झारखण्ड का विकास अपेक्षित नहीं रहा, 14 वर्षों तक राजनीतिक अस्थिरता के कारण भी राज्य का विकास प्रभावित रहा, ये डॉयलॉगबाजी कब बंद होगी?  राज्य की जनता जानना चाहती है, अब तो आपकी सरकार है, स्थिर सरकार है, केन्द्र में भी आपकी सरकार है और फिर भी नीति आयोग को यह कहना पड़े कि झारखण्ड बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई में राष्ट्रीय औसत से पीछे चल रहा है, तो इसके लिए जिम्मेवार कौन है?

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ना इज्जत की चिंता, न फिक्र कोई अपमान की, गिरोह चड्डी-बनियान की, जय बोलो…

आजकल पूरे झारखण्ड में चड्डी-बनियान गिरोह की चर्चा हैं। लोगों की नींद, रातों की चैन गायब है। पुलिसवाले भी माथा-पच्ची में जुटे है, ये कैसा गिरोह हैं भाई, जो चोरी-डकैती करने के पूर्व अतिपवित्र अंतरंग वस्त्रों को धारण करता है, और उसी से अपने चोरी-डकैती के कार्यों को अंजाम देता हैं।

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वनरक्षियों को नियुक्ति पत्र देने के बहाने अपना चेहरा चमकाने की कोशिश

क्या मुख्यमंत्री रघुवर दास बता सकते है कि जिन वनरक्षियों को वे नियुक्ति पत्र दे रहे हैं, वे उनकी कृपा से इस पद पर नियुक्त हो रहे है, कि नियुक्तिपत्र धारकों ने वनरक्षियों के लिए आयोजित परीक्षा में अपनी मेहनत से सफलता पाई है और जब अपने मेहनत से उन्होंने सफलता पाई तो इसका श्रेय वे स्वयं क्यों ले रहे हैं। इस प्रकार के आयोजन कराकर, इससे क्या मैसेज देना चाहते हैं।

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