बकोरिया कांड पर SC ने खारिज की रघुवर सरकार की SLP याचिका, राज्य सरकार की हुई किरकिरी

हुआ वहीं, जो होना था।  राज्य की सारी जनता और बुद्धिजीवी जानते थे, कि सर्वोच्च न्यायालय राज्य सरकार की बकोरिया कांड को लेकर दायर की गई एसएलपी याचिका को खारिज कर देगी, पर शायद राज्य के होनहार सीएम रघुवर दास को इस बात की जानकारी नहीं थी। लीजिये सुप्रीम कोर्ट ने भी झारखण्ड सरकार को एक बहुत बड़ा झटका दिया है,

हुआ वहीं, जो होना था।  राज्य की सारी जनता और बुद्धिजीवी जानते थे, कि सर्वोच्च न्यायालय राज्य सरकार की बकोरिया कांड को लेकर दायर की गई एसएलपी याचिका को खारिज कर देगी, पर शायद राज्य के होनहार सीएम रघुवर दास को इस बात की जानकारी नहीं थी। लीजिये सुप्रीम कोर्ट ने भी झारखण्ड सरकार को एक बहुत बड़ा झटका दिया है, और बकोरिया कांड की सीबीआइ जांच रोकने के आदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार द्वारा दायर की गई याचिका को उसने आज खारिज कर दिया है।

ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार की ओर से सर्वोच्च न्यायालय की स्टैंडिंग काउंसिंल तापेश कुमार सिंह ने यह एसएलपी याचिका दायर की थी, वह भी तब जब झारखण्ड  हाई कोर्ट ने 22 अक्टूबर को बकोरिया कांड की सीबीआइ जांच करने के आदेश दिये थे, अंततः सुप्रीम कोर्ट ने झारखण्ड हाई कोर्ट के दिये आदेश पर मुहर लगा ही दी।

हाईकोर्ट ने सीबीआइ जांच के आदेश देने के समय इस बात के संकेत दिये थे कि राज्य की सीआइडी अनुसंधान में काफी गड़बड़ियां हैं और इसकी बेहतरी जांच के लिए सीबीआइ उपयुक्त है। इधर सीबीआइ ने हाईकोर्ट द्वारा मिले जांच के आदेश के बाद 19 नवम्बर को प्राथमिकी दर्ज कर इसकी जांच प्रारंभ कर दी। ज्ञातव्य है कि इस मुठभेड़ को लेकर कई संगठनों ने अंगूलियां उठाई थी, मामला संसद में गूंजा तथा नाबालिगों की हुई संदेहास्पद मौत को फर्जी मुठभेड़ करार दिया गया। बकोरिया कांड 8 जून 2015 को हुआ था, जिसमें 12 लोग मारे गये थे।

इस कांड में मारे गये उदय के पिता जवाहर यादव ने हाई कोर्ट में मामला दायर करते हुए, इस मुठभेड़ को फर्जी मुठभेड़ बताया था, तथा इसकी जांच सीबीआइ से हो, हाइकोर्ट से गुहार लगाई थी, जबकि राज्य सरकार और उनके अधिकारी नहीं चाहते थे कि इसकी जांच सीबीआइ से हो। सीबीआइ जांच रोकने के लिए राज्य सरकार और उनके संदिग्ध पदाधिकारियों ने खूब जमकर कोशिश की, कि सीबीआइ जांच रुक जाये, यहां तक की सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा तक खटखटा दिया, फिर भी उन्हें सफलता नहीं मिली, अब लोगों को लग रहा है कि सीबीआइ जांच हो जाने के बाद इस फर्जी मुठभेड़ में शामिल लोगों को दंड अवश्य मिलेगा।

बकोरिया कांड को दबाने के लिए राज्य के कई पुलिस अधिकारी लगे रहे, जिसमें पुलिस महानिदेशक डी के पांडेय की भूमिका भी संदिग्ध ही रही, पर राज्य के ही एक वरीय पुलिस अधिकारी एमवी राव की भूमिका की सभी ने प्रशंसा की, सीआइडी के तत्कालीन एडीजी एमवी राव ने जैसे ही पदभार ग्रहण किया, इस बकोरिया कांड की जांच की और उसी वक्त से दुध का दुध, पानी का पानी होना शुरु हुआ, पर जैसे ही राज्य सरकार को लगा कि उनके अधिकारी इसमें फंसते नजर रहे हैं तथा राज्य सरकार की किरकिरी होनी सुनिश्चित है, एमवी राव का तबादला कर दिया गया। 

पर ये भी सच्चाई है कि एमवी राव ने तबादला मंजूर किया, पर सच के रास्ते से डिगे नहीं। अब सब का ध्यान सीबीआइ जांच की ओर हैं, देखना है कि वह अपने जांच को कितना जल्द पूरा करती है, जबकि ज्यादातर लोगों का कहना है कि एमवी राव की टीम ने जिस प्रकार से जांच की है, उस जांच के बाद नहीं लगता कि सीबीआइ को ज्यादा परेशानी उठानी पड़ेगी, बकोरिया कांड के पीड़ितों को न्याय मिलना अब बहुत ही आसान लग रहा हैं।

Krishna Bihari Mishra

Next Post

शर्मनाक, देवघर में हेमन्त द्वारा कुंवर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण के विरोध में कुछ लोगों ने प्रतिमा को स्नान कराया

Sat Feb 23 , 2019
भाई इतनी नफरत क्यों? अगर नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने बाबू कुंवर सिंह के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दिया तो कौन सा पहाड़ टूट गया, ये तो गर्व की बात है, कि हेमन्त सोरेन ने बाबू कुंवर सिंह को अपना माना, उन्हें सम्मान दी, देश के गौरव के रुप में स्वीकार किया, अगर यह भी किसी को अच्छा नहीं लगे तो समझ लीजिये, देश को रसातल में जाने से कोई रोक नहीं सकता।

You May Like

Breaking News