गुमला के दो दर्जन मजदूर बंधक बने हैं आंध्र प्रदेश में, आखिर इन्हें मुक्त करायेगा कौन?

गुमला से खबर है कि आंध्र प्रदेश के राजामंद्री स्थित गोदावरी नदी के किनारे कबूर गांव में गत् 11 दिसम्बर को भवन निर्माण कार्य के लिए गुमला से जिन दो दर्जन मजदूरों को लाया गया था। उन्हें वहां बंधक बनाकर रखा गया हैं तथा न तो उन्हें खाना-पीना दिया जा रहा और न ही उन्हें मजदूरी दी जा रही हैं। अपने उपर हो रहे इन जुल्म को देख, वहां के एक मजदूर ने गुमला में एक मीडियाकर्मी को सूचना दी तथा उससे मुक्त कराने का अनुरोध किया है।

गुमला से खबर है कि आंध्र प्रदेश के राजामंद्री स्थित गोदावरी नदी के किनारे कबूर गांव में गत् 11 दिसम्बर को भवन निर्माण कार्य के लिए गुमला से जिन दो दर्जन मजदूरों को लाया गया था। उन्हें वहां बंधक बनाकर रखा गया हैं तथा तो उन्हें खानापीना दिया जा रहा और ही उन्हें मजदूरी दी जा रही हैं। अपने उपर हो रहे इन जुल्म को देख, वहां के एक मजदूर ने गुमला में एक मीडियाकर्मी को सूचना दी तथा उससे मुक्त कराने का अनुरोध किया है।

बताया जाता है कि इन सारे मजदूरों को बसिया थाना के महाबीर महतो जो टेम्पू चालक है, ने आंध्र प्रदेश जाकर छोड़ दिया था, और बताया था कि यहां काम करने पर प्रतिदिन उनलोगों को 350 रुपये मजदूरी मिलेगा। लोग बताते है कि जब दो महीने बीतने के बाद इन लोगों ने झारखण्ड वापस जाने की बात की, तो ठेकेदारों के गुंडों ने उन्हें धमकाया तथा नजरबंद कर उनसे काम कराने लगा। मजदूरों को उचित खानापीना भी नहीं मिल रहा और ही मजदूरी दी जा रही है, जिससे उनके उपर संकट मंडराने लगा है।

इसी बीच वहां काम कर रहे चैतन्य महतो ने बसिया के स्थानीय मीडिया को मोबाइल पर बताया कि नंद किशोर महतो, मथुरा महतो, विजय साहू, सिरनुस खड़िया, राज मोहन महतो, समेत 21 मजदूरों को जबर्दस्ती रख लिया गया है। यह जानकारी प्राप्त होने के बाद स्थानीय संवाददाताओं ने जानकारी प्राप्त की तो पता चला कि तपन प्रधान नाम का एक ठेकेदार और मजदूर एजेंट विष्णु साहू के माध्यम से इन सभी को आंध्र प्रदेश भेजा गया हैजो पिछले दो महीनों से बंधुआ मजदूर बने हुए है।

इधर सभी ने राज्य सरकार से इन्हें मुक्त कराने की मांग की हैं, क्या राज्य सरकार इन्हें मुक्त कराने में रुचि लेगी, आंध्र प्रदेश सरकार से इस संबंध में बात करेगी, या बंधुआ मजदूरों को उनके हाल पर छोड़ देगी।

Krishna Bihari Mishra

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