शर्मनाक, एक पत्रकार, बिहारियों पर ऐसा दाग लगाया कि ये दाग कभी धूलनेवाला नहीं

जब से मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित कहानी नमक का दारोगा के अलोपीदीन ज्ञानचक्षु खुलने के बाद, ईमानदार वंशीधर के घर जाना छोड़ दिये, तभी से हमारे समाज में ब्रजेश ठाकुर जैसे दैत्यों का बोलबाला और उनका जाल इस कदर फैला कि वह दैत्य हाथों में हथकड़ी पहनने तथा जेल जाने के बाद भी न तो उसने अपना मुंह छुपाया, बल्कि अट्टहास करता हुआ, फोटो खिंचवाते हुए जेल की ओर चल पड़ा।

जब से मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित कहानी नमक का दारोगा के अलोपीदीन ज्ञानचक्षु खुलने के बाद, ईमानदार वंशीधर के घर जाना छोड़ दिये, तभी से हमारे समाज में ब्रजेश ठाकुर जैसे दैत्यों का बोलबाला और उनका जाल इस कदर फैला कि वह दैत्य हाथों में हथकड़ी पहनने तथा जेल जाने के बाद भी न तो उसने अपना मुंह छुपाया, बल्कि अट्टहास करता हुआ, फोटो खिंचवाते हुए जेल की ओर चल पड़ा। आप जान लीजिये, वह ऐसे ही नहीं हंसा था, वह अच्छी तरह जानता है कि जो लोग उसे अभी जेल भेज रहे हैं, या उसके खिलाफ बोल रहे हैं, या लिख रहे हैं, वे बाद में कुछ समय बीत जाने के बाद एक बार फिर उसके साथ बैठकर फोटो खिंचवायेंगे, माला पहनायेंगे, बस जेल से बाइज्जत बरी होने का समाचार आने दीजिये।

सच्चाई यह है कि अब बिहार पुरी तरह बदल चुका है, ये नया बिहार हैं, इसमें दूसरे के असंख्य बेटियों के साथ हुई नृशंसता या दुष्कर्म पर बिहार के लोगों को खून नहीं खौलता है, शायद वे ऐसी घटनाओं के आदि हो चुके हैं, कमाल हैं सृजन घोटाला के बाद, इतनी बड़ी नृशंस दुष्कर्म कांड, जहां बेटियां वर्षों से त्रस्त थी, उसके साथ अमानवीय हरकत किया जा रहा था, वह भी ऐसी हरकत करनेवाला और कोई नहीं, बल्कि प्रातः कमल अखबार का संपादक, एक अखबार का मालिक, प्रेस अधिमान्यता प्रमाणीकरण समिति का सदस्य, जिसका काम ही है, ऐसी घटनाओं का उजागर करना, दोषियों को उसके किये की सजा दिलवाना, पर वहीं आज ऐसी घटनाओं को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभाता हैं, वह नेताओं के साथ मिलकर बिहार की बेटियों के साथ क्रूरता की पराकाष्ठा को लांघ जाता है और ऐसे लोगों के साथ बिहार के कई नेताओं, पत्रकारों के बहुत ही अंतरंग संबंध हैं, लोग इसके साथ फोटो खिंचवाकर स्वयं को धन्य समझते थे।

पटना के एक बहुत बड़े पत्रकार हैं, वे अपने फेसबुक में एक पत्रकार का फोटो डालकर, उसकी प्रशंसा करते हुए लिखते है कि इसी ने इस घटना का उद्भेन किया। ये वहीं पत्रकार है, जो जदयू के विधायक के चैनल में काम करता है। ये वहीं चैनल है जहां कभी देश के जानेमाने पत्रकार रवीश कुमार बैठकर पत्रकारिता और देश के बारे में भाषण देते हैं और कुछ वहां बैठे घटियास्तर के लोग उनके साथ फोटो खिंचवाकर धन्य-धन्य हो उठते हैं, ये वहीं चैनल हैं, जिसके यहां काम कर रहे एक कैमरामैन को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव के सुरक्षागार्डों ने बिहार विधानसभा परिसर में कुटाई कर दी थी, जिसको लेकर कभी बिहार के ही कुछ पत्रकारों ने राजद की रैली का बहिष्कार कर दिया था, पर इस चैनल या कुटाई का शिकार होनेवाले कैमरामैन ने अपने साथ हुई घटना को लेकर एक प्राथमिकी तक दर्ज नहीं कराई थी। हम तो कहते है कि केवल उस चैनल की दिव्यता की ही सुशासन बाबू सीआइडी जांच करा लें तो और भी बहुत कुछ निकल आयेगा, सीआइडी जांच कराने में तो दिक्कत नहीं होनी चाहिए?

ब्रजेश ठाकुर जैसा अखबार का पत्रकार/मालिक रुपी दैत्य आजअकेला नहीं है, आजकल ऐसे दैत्य आपको पूरे देश के राज्यों में प्रमुखता से बैठे हैं, ऐसे दैत्यों को तो मैं प्रतिदिन देखता हूं। आजकल ये दैत्य दिल्ली में बैठकर विभिन्न राज्यों द्वारा बनाये गये सदनों में प्रतिदिन भोजन करते हैं और उनसे कोई पैसे भी नहीं मांगता, एक पांव इनका राज्य की राजधानी और दूसरा पांव प्रतिदिन दिल्ली में होता है, जबकि इनके वेतन से तो इनका घर तक नहीं चले, पर इनके बेटे हाइ-फाइ स्कूलों तथा देश के नामी गिरामी निजी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हैं, ये सब चलता कैसे हैं?

हम आपको बता देते हैं, क्योंकि हमारे देश में अब कोई लाल बहादुर शास्त्री टाइप का नेता नहीं हैं, 98 प्रतिशत चिरकूट टाइप का नेता हैं, जिसको छपास, अपना चेहरा चमकाने, खुद को महिमामंडित करने का बहुत बड़ा बीमारी लगा हुआ है, ऐसे लोगों को ऐसे पत्रकार टाइप दलाल एवं लड़कियों का शौक रखनेवाले, माल इधर से उधर करनेवाले लोगों की जरुरत होती है, और इसके बदले ये नेता, उन पत्रकारों को प्रेस अधिमान्यता प्रमाणीकरण समिति का सदस्य, उसके चिरकूट टाइप अखबारों को मुंहमांगा विज्ञापन तथा उपर से दिल्ली में फार्म हाउस, जमीन, राज्यों के महत्वपूर्ण शहरों में पॉश इलाकों में बेशकीमती जमीन, करोड़ों रुपये के अनुदान, उनके बच्चों को ढेर सारी सुविधाओं का प्रबंध कर देते हैं और फिर शुरु होता है, आम जनता की बेटियों के साथ दुराचार का घिनौना खेल, जिसमें पीसते हैं गरीबों के बेटे-बेटियां, जिनके शरीर से खेलते हैं पत्रकार-नेता-अधिकारी और वे बड़े-बड़े लोग जो अनाचार-अनैतिक तरीकों से धन इकट्ठे करते हैं और बंद होती है, उन पत्रकारों की आवाज, पीसते हैं वे पत्रकार, जिन्होंने कभी ऐसे गंदे नेताओं-अधिकारियों की सुनी ही नहीं, और न अन्न-जल ग्रहण किया, जिनकी संख्या अंगूलियों में गिननेलायक भी नहीं।

शर्मनाक स्थिति यह है कि इतना बड़ा कांड हो गया, पर किसी ने भाजपा-जदयू की इस सरकार पर जंगलराज का तमगा नहीं लगाया और अगर यहीं लालू प्रसाद का शासन रहता तो जंगलराज फेज –तीन, चार पता नहीं क्या-क्या लोग बोल देते, प्रचार कर देते, यानी गजब का मैन्टेन इस नीतीश सरकार ने किया है भाई, यानी इनके राज में कुछ भी बोलो, कर दो, कोई अखबार बोलनेवाला नहीं हैं, कोई नेता बोलनेवाला नहीं।

शर्मनाक ये भी कि जिस गांधी को महात्मा बनाने में बिहार के चंपारण ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसे जयप्रकाश को बिहार ने लोकनायक बनाया, जिस बिहार से क्रांति की धमक सुनाई पड़ती है, उस बिहार में ऐसे घिनौने कार्य पर किसी ने अब तक मुंह नहीं खोला और न सड़कों पर उतरा। हमें आज थोड़ी इस बात को लेकर खुशी है कि इस घिनौने कांड पर, जिसमें अब खुलकर ये बात सामने आ गई कि इसमें एक पत्रकार शामिल हैं, जिसे सहयोग करने में नेताओं व अधिकारियों का दल लगा था, वामदलों ने आज बिहार बंद बुलाया है, जिसका समर्थन भाजपा और जदयू छोड़कर सभी दलों ने किया हैं, बिहार के ज्यादातर निजी स्कूलों ने आज बंद को लेकर, अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए सारे स्कूल बंद रखे हैं, देखना यह हैं कि और जिम्मेवार लोग, इस घटना पर क्या रुख अपनाते हैं? हम तो कहेंगे कि ये घटना मानवीय मूल्यों को शर्मसार करनेवाला हैं, बिहार के लिए कलंक हैं, देखते है इस कलंक के खिलाफ बंद हो रहे आज के बिहार बंद को कितने लोग समर्थन करते हैं?

Krishna Bihari Mishra

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