CM ने पेश किया 80,200 करोड़ के बजट, अपनी पीठ थपथपाई, विपक्ष का कड़ा ऐतराज

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज झारखण्ड विधानसभा में 2018-19 के लिए 80,200 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। बजट पेश के दौरान, उन्होंने पूर्व की तरह अपनी पीठ थपथपाई, फिर वहीं राग अलापा कि उनकी सरकार पर पिछले तीन साल में एक भी दाग नहीं है, जबकि सच्चाई यह है कि गढ़वा में बजट परिचर्चा के दौरान उनके दिये गये बयान को लेकर ऐसा दाग लगा है कि गढ़वा न्यायालय में इनके खिलाफ एक केस भी दर्ज हो चुका है। विपक्ष तो साफ कह रहा है कि जिस दिन उनकी सरकार आई, ठीक उसी दिन कौशल विकास और मोमेंटम झारखण्ड की उच्चस्तरीय जांच कराने का जिम्मा सीबीआई को सौंप जायेगा। भ्रष्टाचार के मामले और भूख से हुई मौत को लेकर कई बार रघुवर सरकार में शामिल मंत्री सरयू राय ही कई बार सरकार को घेर चुके हैं।

बहरहाल रघुवर दास ने बजट पेश के दौरान एक बार फिर राज्य की जनता को कई ख्वाब दिखाये है। जैसे उन्होंने घोषणा कर दी कि रांची के मोरहाबादी मैदान का आधुनिकीकरण किया जायेगा, नगर निकायों में एक-एक, दादा-दादी पार्क बनाय़े जायेंगे। बजट में पूर्व की तरह युवाओं को रोजगार, ग्रामीणों, किसानों के विकास और महिलाओं के सशक्तिकरण के लंबे-चौड़े वायदे किये गये हें। सीएम ने कहा किसानों, खेतिहर मजदूरों की अस्वाभाविक-असामयिक मृत्यु पर राज्य सरकार उन्हें आकस्मिक निधि से चार-चार लाख रुपये की सहायता देगी।

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अपने भाषण में डेवलेपमेंट पर खूब चर्चा की। उन्हें हालांकि 2019 में एक बार फिर जनादेश के लिए जनता के पास जाना है, पर वे कहने से नहीं चूके कि 2022 तक राज्य को समृद्ध बना देंगे, उनकी यह घोषणा ऐसा लग रहा था कि जनता ने उन्हें पहले से ही अगले जनादेश देने का उनसे वायदा कर दिया है।

आश्चर्य यह भी रहा कि जब मुख्यमंत्री रघुवर दास बजट पेश कर रहे थे, तब सदन में एक भी विपक्ष का सदस्य उपस्थित नहीं था, क्योंकि विपक्ष द्वारा काली टोपी, काला रुमाल सदन में लहराने के कारण स्पीकर ने कह दिया कि इससे सदन की गरिमा गिरी है, जिन्होंने सदन की गरिमा को गिराया है, उन्हें निलंबित किया गया है, बाकी विपक्ष तय कर लें। इसके पूर्व विपक्ष के इस कार्य की संसदीय कार्य मंत्री सरयू राय ने यह कहकर कड़ी आलोचना की कि विधानसभा में आज जो दृश्य प्रस्तुत हुआ, उसे रोकना जरुरी हैं, विपक्ष ने सारी सीमाएं लांघ दी है, इसलिए सदन की कार्यवाही से उन विधायकों को एक दिन के लिए निलंबित किया जाये, जिन्होंने ऐसा किया। इस पर विधानसभाध्यक्ष ने सदस्यों से राय मांगी, सत्ता पक्ष के लोगों ने सुर में सुर मिलाया और सदस्यों ने ध्वनिमत से उन विधायकों को निलंबित करने का अनुरोध स्पीकर से कर डाला, फिर क्या था, सदन से एक-एक कर सारा विपक्ष वाक्आउट कर गया।