मुख्यमंत्री के इशारे पर भाजपा में शुरु हुआ ब्राह्मण-भूमिहार हटाओ अभियान

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भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता है, जो बहुत ही बड़े पद पर है, वे अपना नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर खुलकर बताते है, वे कहते है कि दस दिसम्बर को भाजपा की प्रांतीय बैठक में आपत्तिजनक आचरण व व्यवहार करने का आरोप लगाकर सीएम रघुवर दास ने प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा से कहकर सीमा शर्मा को निलंबित करवा दिया। जिस दिन सीमा शर्मा को हटाया गया, उसी दिन ऐसा ही आरोप पलामू के भाजपा नेता रवीन्द्र तिवारी पर लगाकर उन्हें भी उसी दिन निलंबित कर दिया गया, जिस दिन सीमा शर्मा को निलंबित किया गया था। सोशल मीडिया के पूर्व संयोजक कट्टर भाजपा नेता शिशिर ठाकुर को भी ठिकाने लगा दिया गया और अब मंत्री रणधीर सिंह को पार्टी ने नोटिस दे दिया। ये सब क्या है? ये सब बताता है कि फिलहाल भाजपा में छद्म रुप से ब्राह्मण-भूमिहार हटाओ अभियान चल रहा है, ये किसके इशारे पर हो रहा है, ज्यादा दिमाग लगाने की जरुरत नहीं?

ये भाजपा नेता यह भी कहते है कि भाजपा को ये मुगालता हो गया है कि ब्राह्मणों-भूमिहारों की तो मजबूरी है, भाजपा को वोट देना, कांग्रेस को वे वोट दे नहीं सकते, अन्य विपक्षी दल उन्हें घास नहीं दे रही, इसलिए ब्राह्मणों-भूमिहारों पर ध्यान देने से अच्छा है कि अन्य जातियों पर ध्यान दिया जाये, पर ये लोग नहीं जानते कि ये ऐसा बड़ा तबका है, इसे नजरंदाज करने का खामियाजा, वे सारे लोग भुगत रहे हैं, जो पहले इनसे नफरत करते थे। इधर इस प्रकार की हरकत से दुखी इस भाजपा नेता ने कहा कि भाजपा में जातिवाद की राजनीति प्रारंभ होने से भाजपा जल्द ही अपने दुर्गति को पायेगी, कांग्रेस को तो थोड़ा देर लगा, भाजपा को रसातल में जाने में समय नहीं लगेगा।

ये महाशय का ये भी कहना है कि रणधीर सिंह को जो नोटिस दिया गया है, वह सही है, क्योंकि उन्होंने भाजपा के खिलाफ ऐसा बयान दिया, जिसकी जितनी निंदा की जाय कम है, पर ऐसी ही गड़बड़ियां तो मुख्यमंत्री रघुवर दास ने की है, और पार्टी को रसातल में ले जाने का काम किया, ऐसे में रघुवर दास को नोटिस क्यों नहीं? क्या वे पार्टी से उपर है? क्या उनके खिलाफ इसलिए नोटिस नहीं जारी हो सकती, क्योंकि वे मुख्यमंत्री हैं? पीएम और राष्ट्रीय अध्यक्ष के आंखों के तारे हैं?

कौन नहीं जानता कि पलामू में ब्राह्मणों, विधानसभा में विपक्षी नेताओं और जमशेदपुर में महिलाओं के खिलाफ सीएम का विवादास्पद बयान आया, जिससे एक बहुत बड़ा तबका सीएम से नाराज चल रहा है? आज ही के अखबारों में एक समाचार है कि बिना जमीन के ही पीएम से करा दिया गया था डेयरी प्लांट का शिलान्यास और स्पेशल ब्रांच को पांच माह पहले मिला था जिम्मा, बैंक अधिकारी के ट्विट के मामले को जांच करने के लिए, जो सीएस से जुड़ा है, उस मामले में अब तक जांचकर्ता ही नियुक्त नहीं हुआ, ये सब क्या है? इससे पार्टी और पीएम की छवि धूमिल नहीं हो रही।

पिछले चार दिनों से बजट सत्र हंगामें की भेंट किसके लिए चढ़ रहा, किसको बचाने के लिए सीएम एड़ी-चोटी एक कर रहे हैं, जिसे बचाने के लिए सीएम ने विधानसभा में पार्टी को दांव पर लगा दिया, उससे भाजपा को क्या लाभ है?  भाजपा के ही बड़े नेता सरयू राय ने कई बार विभिन्न मुद्दों पर चिट्ठियां लिखी, उन चिट्ठियों पर क्या कार्रवाई हुई?  कैबिनेट की बैठक में मुख्य सचिव को कौन बुलवाता है? किसके कहने पर मुख्य सचिव आती है और अपना काम करती है अर्थात् भाजपा में जो सत्ताधीश हैं, मठाधीश हैं, उन्हें हर प्रकार की गलतियां, गड़बड़ियां तथा कार्यकर्ताओं को नीचा दिखाने का अधिकार है, और बाकी की कोई इज्जत नहीं, जब चाहा नोटिस थमा दिया, वो कुछ बोल नहीं सकता, जिंदगी भर पार्टी का झंडा ढोया और आज उसे कहा जा रहा है कि अब भाजपा छोड़ो, ये कौन सी नीति भाजपा में चलनी प्रारंभ हो गई? संघ के लोगों को इस पर विचार करना चाहिए, नहीं तो 2019 आने में अब ज्यादा देर नहीं, रघुवर दास कितना भाजपा को लोकसभा और विधानसभा की सीट दिलायेंगे, ये राज्य की सामान्य जनता तक को पता है, कई ने तो संकल्प ले लिया है कि इस बार भाजपा को आने ही नहीं देना है, ऐसे में समझ लीजिये, झारखण्ड में भाजपा की क्या स्थिति होने जा रही?

1 Comment
  1. राजेश कृष्ण says

    राज्य की जनता को पता है,
    बमुश्किल 40 सीट लाने में रघुबर का क्या योगदान है..दलबदल पर फैसला टॉलकर सरकार घसीट कर समय पूरा कर रही है..और इन 40 सीट में से कितना और गँवायेंगे ये रघुबर की उपलब्धि होगी..और कोई कुछ नही करेगा ये खुद अपना कब्र खोद लिए और मिटटी डॉलने का कसम वक्त कर ही देगा..

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