रांची के बुद्धिजीवियों ने किया सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण, CS ने बेहतर स्वास्थ्य का दिलाया भरोसा

लहू बोलेगा टीम रांची एवं जनस्वास्थ्य अभियान संघर्ष मोर्चा, झारखंड के नेतृत्व में आज सामाजिक- जनस्वास्थ्य एव बुद्धिजीवियों द्वारा सदर अस्पताल रांची के प्रत्येक विभागों का निरीक्षण किया गया। चूंकि रांची का सदर अस्पताल आम लोगों के लिए संजीवनी का काम कर रहा हैं, जो  गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं के लिए काफ़ी चर्चित है तथा सरकारी होने की वजह से निशुल्क-सहज़ और सुरक्षित के कारण भी यह आजकल सुर्खियों में है।

लहू बोलेगा टीम रांची एवं जनस्वास्थ्य अभियान संघर्ष मोर्चा, झारखंड के नेतृत्व में आज सामाजिक- जनस्वास्थ्य एव बुद्धिजीवियों द्वारा सदर अस्पताल रांची के प्रत्येक विभागों का निरीक्षण किया गया। चूंकि रांची का सदर अस्पताल आम लोगों के लिए संजीवनी का काम कर रहा हैं, जो  गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं के लिए काफ़ी चर्चित है तथा सरकारी होने की वजह से निशुल्क-सहज़ और सुरक्षित के कारण भी यह आजकल सुर्खियों में है।

टीम ने निरीक्षण में पाया कि यहां ज्यादातर मरीज़ बुंडू, तमाड़, खूंटी, खलारी, लाली, टाटीसिलवे,  कांके, मांडर, चान्हो,  नामकुम, पिस्कामोड़, कर्रा, ओरमांझी, पंडरा, रातू प्रखंड, रातू रोड, किशोरगंज, हरमू, हीनू, अपर बाज़ार, चुटिया, हिंदपीड़ी, लोअर बाज़ार, मेन रोड, डोरंडा  एवं अन्य जगहों से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद में आते हैं, तथा रोजाना 250-300  मरीज़ बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाते हैं। जिन्हें लाभ मिलता भी है और मिलना भी चाहिए।

सदर अस्पताल रांची में निरीक्षण टीम ने कई महत्वपूर्ण चीजों को देखा जो ज्वलंत और बुनियादी थी, जिसमें सदर अस्पताल रांची में आठ पर्ची काउंटर पर चार कर्मचारी ही पर्ची काटते हैं, जिसमें महिला काउंटर पर दो  पुरुष और पुरुष काउंटर पर दो  महिलाएं पर्ची काटती है। टीम ने पाया कि अस्पताल के विभिन्न डॉक्टरों एवं संबंधित चिकित्सा पदाधिकारियों की दिन-समय सूची या अस्पताल के अन्य प्रमुख पदाधिकारियों/कर्मचारियों के नाम-पद-स्थान-फोन नंबर की सार्वजनिक सूची मुख्य गेट पर नही टंगी हैं।

सदर अस्पताल में छः  महीनें से कैल्शियम दवा नही हैं, एवं विभिन्न प्रकार की विटामिन्स, एंटीबायोटिक, जेनेरिक मेडिसिन, एवं विभिन्न जीवन रक्षक दवाइयां उपलब्ध नही है, बच्चा वार्ड में 10 वार्मर की कमी हैं, जांच के लिए अत्याधुनिक मशीन नही हैं। प्रत्येक वार्ड में सिर्फ एक-दो डॉक्टर ही उपलब्ध है, जो दो-तीन कर्मचारियों के साथ ही सैकड़ों मरीज़ों को देखते हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए टेटनस की सुई एव शुरुआती जांच-दवा जो डॉक्टर के पास ही उपलब्ध होना चाहिए, वह प्रथम तल्ला पर भीड़ में भेज दिया जाता है। कई कई जांच तो अस्पताल में होता ही नही हैं।

सदर अस्पताल कैंटीन में दो कर्मचारियों के ज़रिए खाना बनाने और बांटने का काम होता है। मुख्यमंत्री दाल भात योजना कैंटीन में एक ही जगह खाना बनाना, खिलाना, खाने का भंडारण और वही पर बर्तन धोने का काम भी होता है जो कि अलग अलग होना चाहिए। सदर अस्पताल ब्लड बैंक में एक  डॉक्टर के सहारे ही ब्लड बैंक चल रहा हैं, जबकि यहां दो डॉक्टर और चाहिए। ब्लड लेने वालों को अलग रूम में बैठना चाहिए जबकि उन्हें गेट के बाहर ही बैठाया जाता है।

अल्ट्रा साउंड-इसीजी मशीन में आए दिन खराबी पाय़ी जाती हैं, जिसे हमेशा सही अवस्था में होना चाहिए। आपातकालीन वार्ड में सिर्फ एक डाक्टर और दो कर्मचारियों के सहारे ही सैकड़ों मरीजों को देखा जाता है, अगर ऐसे में कोई अत्यधिक इमरजेंसी मरीज़ आया तो वह भी सब लोगों को छोड़, वही डॉक्टर और उन दो कर्मचारियों को देखना होता है। निरीक्षण टीम ने पाया कि यहां दो डॉक्टरों और चार कर्मचारियों की और आवश्यकता हैं। पूरे सदर अस्पताल में स्थायी 24 कर्मचारी और 71 अस्थायी कर्मचारी हैं। पूरे अस्पताल में पीने का साफ पानी नही हैं।

सदर अस्पताल रांची के निरीक्षण के बाद सिविल सर्ज़न रांची डॉ वी.बी.प्रसाद से यही निरीक्षण टीम मिली। सिविल सर्ज़न ने कहा कि स्वास्थ्य मामलों को लेकर सामाजिक संगठनों द्वारा यह कार्य सराहनीय हैं। उन्होंने टीम को आश्वस्त किया कि जो भी सुझाव आयेंगे, उन्हें कल से ही ठीक करने का वे प्रयास प्रारंभ करेंगे।

सिविल सर्जन ने बताया कि नये अस्पताल भवन में जल्द सभी विभाग स्थानान्तरित होंगे। सदर अस्पताल को 70 लाख की जगह पर मात्र 16 लाख मिले है। 190 करोड़ मशीनों-दवाओं के लिए कॉर्पोरेशन में पड़े हुए है। पूरे जिले में सरकारी दो एमडी फिजिशियन,  चार सर्ज़न है। पार्किंग से गाड़ियां भी चोरी होती हैं। उसे रोकने का काम जारी है, साथ ही पार्किंग का जल्द टेंडर होकर गार्ड के साथ पार्किंग व्यवस्था होगी। निरीक्षण टीम के द्वारा जो उनके संज्ञान में आए है वह जल्द बहाल किया जायेगा।

सिविल सर्ज़न से मांग की गई कि रांची फ़र्ज़ी अस्पतालों-नर्सिंग होमों में रिसर्च-ट्रस्ट सेंटर की जांच की जाये। प्राइवेट डॉक्टरों के मरीज़ के पर्ची की ऑडिट की जाए, जिससे फेक-गैर जरूरी टेस्ट-महंगी दवाओं एव जेनरिक दवाओं की ऑडिट हो सके, कई दवाखानों में व्याप्त नशीले दवाओं-गैर कानूनी दवाओं की जांच की जाए। टीम ने मुख्यमंत्री दाल भात योजना के अंतर्गत चल रही केन्द्र में बन रहे भोजन को ग्रहण भी किया तथा यहां बन रहे भोजन की प्रशंसा भी की।

टीम का आगे भी इन सभी मुद्दों पर अभियान जारी रहेगा। साथ ही स्वास्थ्य के मुद्दों पर प्रधान सचिव स्वास्थ्य विभाग,  झारखंड से जल्द प्रतिनिधिमंडल मिलेगा। निरीक्षण टीम में नदीम खान, रतन तिर्की (टीएसी झारखंड सरकार), झारखंड आंदोलनकारी पत्रकार बशीर अहमद, महिला अधिकारों पर कार्यरत आलोका कुजूर, सामाजिक-जनस्वास्थ्य कार्यकर्ता अभिजीत दत्ता, साज़िद उमर, जमील अख्तर, मो बब्बर, सोनू लकड़ा आदि मौजूद थे।

Krishna Bihari Mishra

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