आनेवाले चुनाव में भाजपा का नाम लेनेवाला कोई नहीं होगा

झारखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है, संवाददाताओं से बातचीत के क्रम में, उन्होंने कहा कि यह बहुमत का दुरुपयोग है एवं तानाशाही की ओर बढ़ता कदम है और इस तरह राज्य में एक नई परंपरा की शुरुआत हुई।

झारखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है, आज संवाददाताओं से बातचीत के क्रम में, उन्होंने कहा कि यह बहुमत का दुरुपयोग है एवं तानाशाही की ओर बढ़ता कदम है और इस तरह राज्य में एक नई परंपरा की शुरुआत हुई, जो विधायी व्यवस्था को और कमजोर करेगी। उन्होंने कहा है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोकसभा हो या विधानसभा, अध्यक्ष को काफी अधिकार रहते हुए सामान्य तौर पर सदन को चलाना या सत्र को बुलाना ये जिम्मेवारी सरकार और सदन के नेता मुख्यमंत्री का होता है और कल जिस तरह से बजट पर बिना चर्चा कराये बजट पारित कराकर झारखण्ड विधानसभा का सत्र अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया, ये लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं।

बाबू लाल मरांडी ने कहा कि सरकार और मुख्यमंत्री द्वारा सदन सत्र को समय पूर्व समाप्ति का निर्णय यह प्रमाणित करता है कि सरकार भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने के लिए किसी भी सीमा को लांघ सकती है। उन्होंने कहा कि यदि केवल इन तीनों आरोपित पदाधिकारियों के गलत कामों की चर्चा सदन में हो जाती, जो विपक्ष की प्रमुख मांग थी, तो सरकार का बंटाधार तय था, लेकिन इन्हें बचाने के लिए झारखण्ड के हितों को ताक पर रखकर चर्चा कराने तक के लिए मुख्यमंत्री तैयार नहीं हुए। झारखण्ड की जनता 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में इसका जवाब देगी।

उन्होंने कहा कि झारखण्डी नौजवानों के हक की लडाई जो उनकी पार्टी लड़ रही है, कल सदन के परिदृश्य को देखकर यानी जिस प्रकार सत्ताधारी विधायक, सरकार के नियोजन नीति एवं स्थानीय नीति के विरोध में खड़े हुए हैं। वे कह सकते है कि उनकी लड़ाई अब झारखण्ड की लड़ाई बन गई है। जनदबाव में सत्ताधारी विधायकों को मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा है, अभी सत्ताधारी भाजपा समय रहते नहीं चेती तो झारखण्ड के आनेवाले चुनाव में भाजपा का नाम लेनेवाला नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि संविधान की अनुच्छेद 16 के पारा – 3 के अनुरुप झारखण्ड के सभी श्रेणियों की नौकरियों में 20 वर्षों के लिए झारखण्डी नौजवानों के लिए सीटे आरक्षित करें। स्थानीयता को पुनः परिभाषित करते हुए खतियानी रैयत यानी अंतिम सर्वे ऑफ सेटलमेंट में दर्ज लोगों को ही स्थानीय निवासी माना जाये। जेपीएससी एवं कर्मचारी चयन आयोग को सरकार यह निर्देश दे कि आरक्षण के नियमों का वह कड़ाई से पालन करें, साथ ही दारोगा बहाली एवं उच्च विद्यालय शिक्षक नियुक्ति में झारखण्डी नौजवानों की बहाली के लिए शर्तों पर पुनर्विचार हो।

Krishna Bihari Mishra

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