सवाल, राज्य के होनहार मुख्यमंत्री से, क्या झारखण्ड के पत्रकार, पत्रकारिता करना छोड़ दें?

भाई, सवाल सीधा राज्य के होनहार मुख्यमंत्री रघुवर दास से ही हैं। वे बताएं, क्या झारखण्ड के पत्रकार, पत्रकारिता करना छोड़ दें? हद हो गई, कभी 15 नवम्बर को स्थापना दिवस के दिन स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा पत्रकारों को पीट दिया जाता है, जब पत्रकार इसके खिलाफ आंदोलन करते है, तो उनकी बातों को अनसुना कर दिया जाता है, कभी पत्रकारों को झूठे केसों में फंसाकर उनके कलम को रोकने का प्रयास किया जाता है

भाई, सवाल सीधा राज्य के होनहार मुख्यमंत्री रघुवर दास से ही हैं। वे बताएं, क्या झारखण्ड के पत्रकार, पत्रकारिता करना छोड़ दें? हद हो गई, कभी 15 नवम्बर को स्थापना दिवस के दिन स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा पत्रकारों को पीट दिया जाता है, जब पत्रकार इसके खिलाफ आंदोलन करते है, तो उनकी बातों को अनसुना कर दिया जाता है, कभी पत्रकारों को झूठे केसों में फंसाकर उनके कलम को रोकने का प्रयास किया जाता है और आज तो हद हो गई रांची विश्वविद्यालय में कई पत्रकारों को लोहे के रॉड से पीट दिया गया, जिसमें एक पत्रकार की हालत गंभीर है, आखिर ये क्या मजाक है, ये सब कब रुकेगा?

मुख्यमंत्री जवाब दें? जवाब भाजपा के नेता प्रवक्ता भी दें, कि जिस रांची विश्वविद्यालय का कुलपति उनके इशारों पर नृत्य करते हुए संत जेवियर कॉलेज में चल रहे जेवियरोत्सव पर रोक लगाने की हिमाकत कर बैठता है, उक्त रांची विश्वविद्यालय के कुलपति के पास जाकर भाजपा के नेता या किसी प्रवक्ता ने ये सवाल क्यों नहीं दागा कि आपके रांची विश्वविद्यालय कैम्पस में इस प्रकार की घटना कैसे घट गई? पत्रकार रांची विश्वविद्यालय में कार्यरत अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के शिकार कैसे हो गये? आज की घटना के बाद तो स्पष्ट हो गया कि रांची विश्वविद्यालय कर्मी इस विद्याभवन में कलम लेकर नहीं, लोहे का रॉड लेकर आते हैं, ताकि वे किसी को भी अपना शिकार बना लें।

अब सवाल हैं कि किसी भी पत्रकार के पास कोई भी व्यक्ति या छात्र समस्या लेकर आयेगा तो वह उन समस्याओं से संबंधित समाचार का संकलन नहीं करेगा, और जब कोई पत्रकार समाचार संकलन करेगा तो आप उसे लोहे के रॉड से मारकर उसके जीवन से खेलने की कोशिश करेंगे। आश्चर्य है रांची विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग से संबंधित समाचार को कवरेज करने गये पत्रकारों के साथ आज वहां रांची विश्वविद्यालयकर्मियों ने दुर्व्यवहार किया, उनके साथ मारपीट की, उनसे सोने का चेन, नकद पैसा तथा अन्य सामान तक लूट लिया। घायल होनेवाले पत्रकारों में चंदन भट्टाचार्य, अंजनी कुमार और संदीप कुमार शामिल है।

आज खुशी इस बात की रही कि इस घटना के बाद रांची के करीबकरीब सारे पत्रकारों ने एकता दिखाई तथा रांची प्रेस क्लब के नेतृत्व में कोतवाली थाने में धरना दिया, प्रदर्शन किया, जिसका प्रभाव यह पड़ा कि इस घटना में शामिल दो अपराधकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि एक रिम्स में इलाजरत अपराधकर्मी पुलिस कस्टडी में हैं, तथा दो को रातरात तक गिरफ्तार करने की बात स्थानीय पुलिस द्वारा कही जा रही है।

पत्रकारों के साथ हुई इस घटना के बाद कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता सुबोधकांत सहाय, झारखण्ड विकास मोर्चा के नेता बंधु तिर्की पत्रकारों द्वारा दिये जा रहे धरनास्थल तक पहुंचे तथा उनके साथ हुए इस दुर्व्यवहार और मारपीट की कड़ी निन्दा की, जबकि हमेशा की तरह भाजपाइयों ने इस घटना से स्वयं को दूर रखा, समाचार लिखे जाने तक अभी तक किसी भी भाजपाई नेता ने घायल पत्रकारों को देखने की हिमाकत तथा उनकी सुध लेने की कोशिश नहीं की है।

Krishna Bihari Mishra

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