जेड प्लस सुरक्षा का हाल-बेहाल, तोगड़िया लापता, बेहोशी हालत में मिले

संघ के एक आनुषांगिक संगठन विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रवीण भाई तोगड़िया दिन भर लापता रहे और बाद में बेहोशी अवस्था में मिले, ये बहुत ही चिंताजनक बात है, वह भी तब जबकि केन्द्र और राज्य में उनकी ही पार्टी भारतीय जनता पार्टी की सरकार हो। आश्चर्य इस बात की भी कि प्रवीण भाई तोगड़िया को जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त है।

संघ के एक आनुषांगिक संगठन विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रवीण भाई तोगड़िया दिन भर लापता रहे और बाद में बेहोशी अवस्था में मिले, ये बहुत ही चिंताजनक बात है, वह भी तब जबकि केन्द्र और राज्य में उनकी ही पार्टी भारतीय जनता पार्टी की सरकार हो। आश्चर्य इस बात की भी कि प्रवीण भाई तोगड़िया को जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त है।

अब सवाल उठता है कि जेड प्लस में ऐसी ही सुरक्षा होती है कि जिसमें वीआईपी ही लापता हो जाये?  इससे तो साफ लगता है कि जिन पर सुरक्षा का दारोमदार था, उन्होंने अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाई। आश्चर्य तो यह भी है कि प्रवीण भाई तोगड़िया पिछले 11 घंटों से लापता रहे, लोग उन्हें खोजते-फिरते रहे और ये बात मीडिया को भी पता नहीं चल सका। बाद में 108 एंबुलेंस ने अहमदाबाद के अस्पताल में  जब प्रवीण भाई तोगड़िया को भर्ती कराया तो सबकी जान में जान आयी।

इधर विहिप के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री चम्पत राय ने प्रेस वक्तव्य जारी कर बताया कि उन्हें यह समाचार मिला है कि प्रवीण भाई तोगड़िया लापता है, जिससे विहिप के सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ता बहुत ही चिंतित है। चम्पत राय के कथनानुसार उन्हें यह पता चला था कि राजस्थान पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने अहमदाबाद गई थी, किन्तु वे नहीं मिले। यह भी बताया गया था कि राजस्थान व गुजरात पुलिस के अधिकारियों ने पत्रकारों को सूचित किया था कि उन्होंने कोई गिरफ्तारी नहीं की है। ऐसे में ये मामला और गंभीर बन जाता है।

प्रवीण भाई तोगड़िया का लापता होना, फिर बेहोशी अवस्था में मिलना, इससे साफ जाहिर होता है कि भारत मे किसी की भी सुरक्षा सही ढंग से नहीं हो रही, जेड प्लस जिन्हें प्राप्त है, वह अपने कार्यालय से लापता हो जाता है, बाद में बेहोशी रुप में मिलता है, इसका मतलब साफ है कि कहीं न कहीं झोलझाल हैं, और इस झोलझाल पर भाजपा के ही लोग बेहतर बता सकते हैं कि मामला क्या हैं? फिलहाल अब तक किसी ने कोई मुंह नहीं खोला, खोलेंगे भी कैसे, अपने ही अंदर जब छेद ही छेद हैं तो बोलेंगे कैसे? बतायेंगे कैसे?

Krishna Bihari Mishra

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