CM रघुवर के खिलाफ फैला जनाक्रोश, पलामू के कई स्थानों पर सीएम का पुतला दहन

जैसे कांग्रेस पार्टी को मिटाने के लिए कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर और कपिल सिब्बल जैसे लोग कांग्रेस में मौजूद है, ठीक उसी प्रकार भाजपा को समूल नष्ट कर देने के लिए रघुवर दास जैसे नेता, भाजपा में ही विद्यमान हैं, भाजपा को मिटाने के लिए किसी भी दल को कुछ करने की जरुरत नहीं, भाजपा को मिटाने के लिए रघुवर दास जैसे लोग ही काफी हैं। इन दिनों मुख्यमंत्री रघुवर दास भाजपा को सवर्ण विहीन करने में लगे हैं,

जैसे कांग्रेस पार्टी को मिटाने के लिए कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर और कपिल सिब्बल जैसे लोग कांग्रेस में मौजूद है, ठीक उसी प्रकार भाजपा को समूल नष्ट कर देने के लिए रघुवर दास जैसे नेता, भाजपा में ही विद्यमान हैं, भाजपा को मिटाने के लिए किसी भी दल को कुछ करने की जरुरत नहीं, भाजपा को मिटाने के लिए रघुवर दास जैसे लोग ही काफी हैं। इन दिनों मुख्यमंत्री रघुवर दास भाजपा को सवर्ण विहीन करने में लगे हैं, जैसे ही उनके समझ में कोई भी फारवर्ड क्लास का नेता या नेतृ अथवा कार्यकर्ता पार्टी हित में कुछ सुझाव देने की कोशिश करता है, वे प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा से कहकर उसे पार्टी से ही सदा के लिए निलंबित करवा देते हैं।

यहीं नहीं अगर कोई फारवर्ड अधिकारी उनके सामने आ खड़ा होता हैं, तो वे उसकी ऐसी की तैसी करने में भी लग जाते हैं, जिसके कारण फारवर्ड समूहों में रघुवर दास बड़ी तेजी से खलनायक के रुप में प्रतिष्ठित हो रहे हैं, अगर यहीं स्थिति लगातार बनी रही, तो जो भाजपा आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के बीच खलनायक के रुप में जानी जाती है, जल्द ही फारवर्ड समूहों से भी बहिष्कृत हो जायेगी, जिसकी शुरुआत पलामू और रांची से हो चुकी है।

इन दिनों सीएम रघुवर दास की आंखों में ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत और कायस्थ लोहे के कील की तरह चुभ रहे हैं, यहीं कारण है कि पिछले दिनों भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की विशेष बैठक में जैसे ही सीमा शर्मा ने कुछ बातें पार्टी हित में करना चाही, उन्हें बोलने से रोकने की कोशिश सीएम रघुवर दास ने की, जब वह नहीं मानी तो उन्हें कुछ ही घंटों के अंदर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया, यहीं हाल रवीन्द्र तिवारी के साथ हुआ, आम तौर पर किसी भी पार्टी में ऐसा नहीं होता, जैसा कि भाजपा में हो रहा हैं। बताया जाता है कि सीमा शर्मा का भूमिहार जाति से आना और रवीन्द्र तिवारी का ब्राह्मण होना सीएम रघुवर दास की आंखों में चुभ गया और बिना किसी देरी के उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया।

यहीं नहीं, पार्टी की स्थिति यह हैं कि आदिवासियों की नजरों में पार्टी पहले ही दम तोड़ चुकी है, अल्पसंख्यक तो भाजपा को देखना ही पसंद नहीं करते, ले-देकर जो फारवर्ड इन्हें वोट देते थे, वे भी 6 दिसम्बर के बाद से, सोचने पर मजबूर हो रहे हैं कि आखिर वे भाजपा का समर्थन क्यों करें? जब राज्य का मुख्यमंत्री ही उनकी जाति के लोगों पर शक करता है। सीमा शर्मा और रवीन्द्र तिवारी का भाजपा से निलंबन तथा पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र के बदले तानाशाही का प्रार्दुभाव से पार्टी में रह रहे सवर्णों का तबका, अब पार्टी से खुद को अलग होना पसंद कर रहा हैं, जिसकी शुरुआत पलामू से शुरु हो गई। फारवर्डों का भाजपा से मोहभंग हो चुका है, अगर यहीं स्थिति चुनाव तक रहीं, जिसकी संभावना शत प्रतिशत बलवती है, तब भाजपा का झारखण्ड में जमानत बचना भी मुश्किल हो जायेगा, क्योंकि पिछड़ों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और सवर्णों के मिल जाने से भाजपा पूरे झारखण्ड में समाप्त हो जायेगी।

सूत्र बताते है कि रघुवर दास, शुरु से ही फारवर्ड विरोधी रहे हैं, बस उन्हें मौका नहीं मिल रहा था, अब चूंकि राज्य के मुख्यमंत्री हैं, केन्द्र में उनकी सरकार है, उन पर कोई लगाम कसनेवाला नहीं, सभी उनकी जी-हुजूरी में लगे रहते है, इसलिये वे बेकाबू हो चुके हैं। सूत्र बताते है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास का फारवर्ड विरोधी होने के प्रमाण एक नहीं, कई है। हाल ही में गुमला के एसपी चंदन कुमार झा और रांची के एसएसपी कुलदीप द्विवेदी को मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र के सीधी बात कार्यक्रम में बेइज्जत करना, उसी की एक कड़ी थी, जिसकी आलोचना आईपीएस एसोसिएशन ने भी किया था, यहीं नहीं बतौर सजा के तौर पर गुमला के एसपी चंदन कुमार झा को, तो इन्होंने तत्काल गुमला से स्थानांतरित भी करा दिया था। याद करिये, भरी सभा में गुमला एसपी चंदन कुमार झा को सीएम रघुवर दास ने अपमानित करते हुए कहा था कि आपको आइपीएस किसने बना दिया?’

यहीं नहीं इसी प्रकार से, उन्होंने अपने प्रेस एडवाइजर योगेश किसलय को तत्काल प्रभाव से हटा दिया था। ये अपने पास ब्राह्मणों और अन्य उच्च जातियों के लोगों को देखना पसंद नहीं करते, पर कुछ मजबूरियां होती है, जिसके कारण वे इन उच्च जातियों के लोगों को रखते है, क्योंकि कुछ कानूनी प्रक्रिया तथा संवैधानिक नियम सामने आ जाते हैं। सीएम का वश चले तो पूरे झारखण्ड से ही फारवर्डों का नामोनिशां मिटा दें, चूंकि उनकी सिर्फ और सिर्फ अपनी पार्टी भाजपा और अधिकारियों-कर्मचारियों पर चलती हैं, इसलिए वे इन्हीं पर रुआब खुब झाड़ते हैं।

आश्चर्य इस बात की है कि जिन अधिकारियों ने पूरे राज्य का कौशल विकास के नाम पर तथा अन्य योजनाओं के नाम पर झारखण्ड का बैंड बजा दिया है, उसका उदाहरण है मोमेंटम झारखण्ड और झारखण्ड माइनिंग शो। ऐसे अधिकारियों के चेहरे पर उन्हें खुदा का नूर नजर आता है, जिसे देखकर वे हर्षोन्मादित रहते हैं, पर जैसे ही उनके सामने कोई फारवर्ड अधिकारी नजर आता है, या ब्राह्मण-भूमिहार-राजपूत नजर आता है, फिर देखिये ये कैसे उनसे पेश आते हैं।

इसी बीच पलामू में ब्राह्मणों के खिलाफ सीएम रघुवर दास द्वारा किये गये विषवमन से आहत होकर भाजपा नेता ऋषिकेश दूबे, नौडिहा प्रखंड के भाजयुमो महामंत्री शिवशंकर पांडेय और भाजयुमो उपाध्यक्ष अमित मिश्रा ने भाजपा से खुद को अलग कर लिया है, वहीं झारखण्ड का ब्राह्मण समाज उद्वेलित हैं। ब्राह्मणों के खिलाफ, पलामू में सीएम रघुवर दास द्वारा किये गये विषवमन की कई राजनीतिक दलों ने भी कड़ी आलोचना की है, तथा सीएम रघुवर से इस प्रकरण पर माफी मांगने को कहा हैं। इसी बीच कई इलाकों में ब्राह्मण संगठनों ने सड़कों पर उतरकर सीएम रघुवर दास का पुतला फूंकना प्रारंभ कर दिया है।

Krishna Bihari Mishra

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Tue Dec 12 , 2017
जरा कल्पना करिये, जहां का मुख्यमंत्री ब्राह्मणों को फूंटी आंखों भी देखना पसंद नहीं करता हो, वह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को कैसे झेलता होगा? वह पं. दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर चलनेवाली योजनाओं तथा हाल ही में पं. दीन दयाल उपाध्याय के जन्मशतीं पर चलाये जा रहे कार्यक्रमों को कैसे झेला होगा?

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