योग के बहाने झारखण्ड विधानसभा चुनाव पर पीएम मोदी की नजर, भाजपा को विधानसभा में भी जीत दिलाने की तैयारी प्रारम्भ

21 जून को विश्व योग दिवस है, इस दिन पीएम नरेन्द्र मोदी रांची में रहेंगे और यहीं से योग का शंखनाद करेंगे। योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर का दर्जा दिलाने में पीएम नरेन्द्र मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता, पर योग के माध्यम से राजनीति भी साध ली जाये तो क्या दिक्कत है। झारखण्ड कारपोरेट स्तर पर काफी महत्वपूर्ण राज्य है। यहां किसी भी हालत में भाजपा का शासन होना ही चाहिए, ये केन्द्र की मजबूरी है,

21 जून को विश्व योग दिवस है, इस दिन पीएम नरेन्द्र मोदी रांची में रहेंगे और यहीं से योग का शंखनाद करेंगे। योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर का दर्जा दिलाने में पीएम नरेन्द्र मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता, पर योग के माध्यम से राजनीति भी साध ली जाये तो क्या दिक्कत है? झारखण्ड कारपोरेट स्तर पर काफी महत्वपूर्ण राज्य है। यह किसी भी हालत में भाजपा का शासन होना ही चाहिए, ये केन्द्र की मजबूरी है, क्योंकि इसी राज्य से सारे कारपोरेट जगत के हित सधते हैं, तथा केन्द्र के भी हित सधते हैं।

अतः मौका है, दस्तूर भी है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को सेलीब्रेट करने के लिए, पीएम मोदी ने रांची को चून लिया। भाजपा कार्यकर्ताओं से लेकर राज्य सरकार में भी इस बात को लेकर खुशी है कि इस बार पीएम मोदी रांची में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनायेंगे। इसका फायदा यह होगा कि देश-विदेश की मीडिया, रांची में होगी, और बिना किसी किन्तु-परन्तु के रांची के साथ-साथ झारखण्ड भाजपा का भी प्रचार हो जायेगा। दरअसल इस माध्यम से पीएम मोदी भाजपा कार्यकर्ताओं के जोश को ठंडा होने देना नहीं चाहते, क्योंकि यही जोश उन्हें झारखण्ड विधानसभा में भी जीत दिलायेगा।

इधर राजनैतिक पंडितों की माने तो उनका कहना है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में आकाश-जमीन का अंतर होता है, कोई जरुरी नहीं कि लोकसभा चुनाव में अगर भाजपा  गठबंधन 12 सीट जीत ली तो उसके आधार पर इनका विधानसभा चुनाव में भी बहुमत मिल ही जायेगा। राजनैतिक पंडितों की माने तो भाजपा को 2014 में भी लोकसभा की 12 सीटे ही मिली थी, पर विधानसभा चुनाव में झारखण्ड में जो जनादेश आया, वह त्रिशंकु था।

यह अलग बात है कि झारखण्ड विकास मोर्चा के टिकट पर चुनाव जीते कुछ विधायकों ने पाला बदल लिया, तथा भाजपा ज्वाइन कर लिये, ऐसे में ये पाला बदलनेवाले लोग, फिर से चुनाव जीत ही जायेंगे, इसकी संभावना न के बराबर है, कुल मिलाकर भाजपा को विधानसभा चुनाव के लिए उसे शून्य से प्रारम्भ करना होगा, ऐसे भी जो राज्य के मुख्यमंत्री हैं, वे कितना भी चीख या चिल्ला लें, पर उनका इमेज झारखण्ड में न के बराबर हैं, यानी विधानसभा में भी अगर भाजपा को वोट मिलेगा तो उसके सूत्रधार या कर्णधार कुल मिलाकर पीएम मोदी ही होंगे।

इसलिए उन्होंने बड़े ही सोच-समझ का रांची को इस बार चुना है, जो भाजपा के लिहाज से ठीक ही होगा, पर इसका काउन्टर अटैक विपक्षी दल किस प्रकार करते है, ये तो विपक्ष ही जाने, लेकिन फिलहाल जो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस हैं, वहां अभी भी शोक का  ही वातावरण है, ऐसे में ये भाजपा का क्या मुकाबला करेंगे, समझ से परे हैं, जबकि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा लोकसभा चुनाव के परिणाम से खुद को उबार चुकी हैं और नये जोश के साथ भाजपा का मुकाबला करने के लिए तैयार है।

Krishna Bihari Mishra

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