पीएम जानते हैं कि 25 साल में शराब के कारण समाज तबाह हो जायेगा, तो फिर कुछ करते क्यों नहीं

आनेवाले 25 सालों में शराब के कारण हमारा समाज तबाह हो जायेगा, तो फिर आप इस पर एक्शन क्यों नहीं लेते?  आप अपनी ही सरकारों पर दबाव क्यों नहीं बनाते कि ऐसी व्यवस्था को जन्म ही न दें, जिससे युवाओं में शराब के उपभोग की प्रवृत्ति उत्पन्न हो, पर जब आप केवल भाषण देंगे और दूसरी ओर शराब की बिक्री को बढ़ावा देंगे, अपने ही शिक्षा से जुड़े अधिकारियों को शराब बिक्री में लगायेंगे तो फिर आपके इस भाषणबाजी का क्या मतलब?

जब आप अच्छी तरह जानते हैं, महसूस भी करते हैं कि आनेवाले 25 सालों में शराब के कारण हमारा समाज तबाह हो जायेगा, तो फिर आप इस पर एक्शन क्यों नहीं लेते?  आप अपनी ही सरकारों पर दबाव क्यों नहीं बनाते कि ऐसी व्यवस्था को जन्म ही न दें, जिससे युवाओं में शराब के उपभोग की प्रवृत्ति उत्पन्न हो, पर जब आप केवल भाषण देंगे और दूसरी ओर शराब की बिक्री को बढ़ावा देंगे, अपने ही शिक्षा से जुड़े अधिकारियों को शराब बिक्री में लगायेंगे तो फिर आपके इस भाषणबाजी का क्या मतलब?

उपरोक्त बातें, मैं इसलिए लिख रहा हूं कि हाल ही में, कुछ दिन पहले हरिद्वार में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युवाओं में शराब सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की थी, तथा उन्होंने कहा था कि अगर युवाओं में शराब सेवन की प्रवृत्ति इसी तरह बढ़ती रही तो आनेवाले समय में यानी 25 वर्षों में हमारा समाज तबाह हो जायेगा। मैं कहता हूं कि समाज को तबाह होने से बचाने की जिम्मेवारी किस पर है? आपही की तो हैं तो आप भाषण न दें, इस पर रोक लगाने के लिए ठोस प्रयास करें।

केन्द्र में आपकी ही सरकार और राज्य में भी आपकी सरकार, आपके ही मुख्यमंत्री रघुवर दास है। जिसकी आप और आपके पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कशीदे पढ़ते नजर आते है, जिन्होंने झारखण्ड में शराब की बिक्री को अपने हाथों में ले लिया हैं। स्थिति ऐसी है कि शराब बेचने की इस सरकारी प्रवृत्तियों से आम जनता परेशान है। जहां सरकार द्वारा शराब बेची जा रही है, वहा लंपटों की भीड़ शराब लेकर, उसी स्थान पर शराब का सेवन करना प्रारंभ कर दी हैं, पर लोग बोलने से कतरा रहे हैं, क्योंकि कोई बेमतलब का खतरा क्यों मोल लें?

हाल ही में रांची में जहरीली शराब से दर्जनों से भी अधिक लोगों की मौत हो गयी थी। जिसमें जैप के जवान भी थे। इसके लिए जिम्मेवार कौन है?  जहरीली शराब कांड की जांच कर रही टीम ने इस कांड के लिए रांची के सहायक उत्पाद आयुक्त सहित तीन पदाधिकारियों को इसके लिए जिम्मेवार ठहराया है। उसका ये भी कहना है कि अवैध शराब पड़कने पर भी डोरंडा थाने ने ठोस कार्रवाई नहीं की। अवैध शराब की बिक्री कैसे होती है?  क्या पुलिस विभाग को नहीं मालूम?  खुशी इस बात की है कि जहरीली शराबकांड की जांच कर रही टीम ने, झारखण्ड को शराबबंदी की ओर बढ़ने की अनुशंसा कर दी है, क्या राज्य सरकार इस पर अमल करेगी?  इधर जैप-1 आवासीय परिसर में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गई है। इसकी घोषणा कल झारखण्ड पुलिस मेंस एसोसिएशन और गोरखा संगठन की संयुक्त बैठक में लिया गया।

दूसरी ओर नारी शक्ति सेना ने 12 अक्टूबर को राज्य में पूर्ण शराबबंदी की मांग को लेकर राजभवन के समक्ष भूख हड़ताल करने की ठानी है। झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन की गर बात करें, तो ये अपने हर भाषण में लोगों से शराब-हड़िया से दूर रहने की अपील करते नजर आते है, यानी शराबबंदी पर जब पक्ष-विपक्ष दोनों साथ है, जब बिहार ने शराबबंदी कर एक मिसाल कायम कर दिया है, तो फिर झारखण्ड में ऐसा क्यों नहीं हो सकता?  पूरे देश में ऐसा क्यों नहीं हो सकता?  इसलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी, जब आपके मन में चिंता जग गई है, तो उस चिंता को निर्मूल करने के लिए, युवाओं को बचाने के लिए, समाज को तबाही से बचाने के लिए, देश की करोड़ों महिलाओँ के सपनों को पूरा करने के लिए, परिवार टूटने से बचाने के लिए पूरे देश में शराबबंदी लागू कराने का आज से ही ठोस प्रयास शुरु करें।

Krishna Bihari Mishra

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