फिल्म

हे ईश्वर, झारखण्ड के CM को बुद्धि दो, ताकि वे फिल्म ‘पैडमैन’ को टैक्स फ्री कर सकें

इन दिनों फिल्म ‘पैडमैन’ की खूब चर्चा है, पर जिन-जिन सिनेमा हॉलों में ये फिल्म लगी हैं, वहां दर्शक नहीं दीख रहे, जबकि होना यह चाहिए कि इस फिल्म को देखने के लिए भारी भीड़ इकट्ठी होनी चाहिए,  क्योंकि इस फिल्म में स्टार्टअप हैं, क्योंकि इस फिल्म में जीवन जीने का संदेश  हैं, क्योंकि इस फिल्म में ऐसा मुद्दा है, जो हर परिवार से जुड़ा हैं, जो महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा है, जिस कारण पूरे देश की महिलाएं भयंकर बिमारियों से ग्रसित हो जाती है, पर कोई इस पर ध्यान नहीं देता, क्योंकि हमारे देश में कहा जाता है कि लज्जा नारियों का सबसे बड़ा धर्म है, और इसी लज्जा ने महिलाओं को कहीं का नहीं छोड़ा हैं।

हमारे विचार से फिल्म ‘पैडमैन’ को हर परिवार को देखना चाहिए तथा उससे सीख लेना चाहिए। खासकर उन्हें जो अपनी मां से बेहद प्यार करते हैं, जो अपनी बेटियों से बहुत प्यार करते हैं, जो अपनी बहनों से बहुत ज्यादा प्यार करते हैं, जो अपनी पत्नी को बहुत प्यार करते हैं, जो अपने दादी, नानी, चाची, मौसी, मामी या दुनिया में जितने रिश्ते हैं, उन रिश्तों को सम्मान देते हैं, क्योंकि इस फिल्म ‘पैडमैन’ ने महिला जगत में क्रांति की बात कही हैं, उन मुद्दों को उठाया है, जिस मुद्दे को किसी ने आज तक छुआ ही नहीं।

आखिर क्या हैं, इस फिल्म ‘पैडमैन’ में। इस फिल्म में महिलाओं की मासिक संबंधी विषयों तथा उससे होनेवाले संक्रमण, उसके बचाव, महिलाओं के स्वास्थ्य को बड़े ही तार्किक ढंग से उठाया गया है, जो विषय महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा हैं, जो विषय एक स्वस्थ परिवार के भविष्य से जुड़ा हैं, जिसे शर्म से जोड़ दिया हैं और इस शर्म ने कैसे महिलाओं की जिंदगी नारकीय बना दी है, उससे कैसे लड़ा जा सकता है? तथा इससे कैसे पूरे देश में आंदोलन का रुप दिया जा सकता है, दिखाया गया है।

इसमें कोई दो मत नहीं कि बहुत दिनों के बाद ऐसी फिल्म आयी है, जो महिलाओं के स्वास्थ्य तथा माहवारी से संबंधित है, जिस पर बात करना, बुद्धिजीवी वर्ग भी नहीं समझता। अभिनन्दन फिल्म से जुड़े सभी फिल्मकारों का, जिन्होंने इस संवेदनशील मुददे को उठाया, पर उतना ही दुर्भाग्य केन्द्र व राज्य सरकार का, जिसने इतनी सुंदर फिल्म को कैसे जन-जन तक पहुंचाया जाय, इस पर ध्यान ही नहीं दिया,  हालांकि अपनी ओर से फिल्मकारों ने कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन अगर राज्य सरकार इस विषय पर ध्यान दे दें, तो हमारी लड़कियां, हमारी महिलाएं जागरुक होंगी तथा इसका लाभ उठायेंगी।

हमारे देश में पता नहीं, कैसी सरकारें हैं, जो ऐसी संवेदनशील फिल्मों को टैक्स फ्री करने से हिचकती है, जबकि ऐसी फिल्में टैक्स फ्री होनी चाहिए तथा जिन हॉलों में यह फिल्म लगी है, वहां टैक्स फ्री का फायदा परिवारों को मिल पा रहा हैं या नहीं, यह देखना चाहिए, पर हमारे देश के राज्यों की सरकारें फिल्म वहीं टैक्स फ्री करती है, जो दलालों-कनफूंकवों द्वारा उनके कान तक पहुंचती है, और जो दलालों-कनफूंकवो के माध्यम से नहीं पहुंची, तो वह फिल्म समाज के लिए कितना भी क्रांतिकारी क्यों न हो, ध्यान ही नहीं देती।

मैं झारखण्ड और बिहार सरकार से अनुरोध करुंगा कि वह जितना जल्द हो सके, इस फिल्म को टैक्स फ्री करें, तथा सारे स्कूली बच्चों, महाविद्यालय-विश्वविद्यालय-मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं, गांव-टोलों-मुहल्लों-शहरों के लोग इस फिल्म को देख सकें, इसकी व्यवस्था करें, वह इसलिए कि स्टार्ट अप कार्यक्रम, महिलाओं को जागरुक करने तथा उन्हें स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से दूर करने की योजना आपकी हैं, क्योंकि अब तक यहीं देखा गया है कि फिल्म वहीं टैक्स फ्री हुई, जिसका समाज से उतना लेना-देना नहीं रहा।

तो क्या हम समझे कि हमारी बातें बिहार-झारखण्ड की सरकारे मानेंगी, क्योंकि यह विषय इन दोनों राज्यों की महिलाओं से जुड़ा हैं। झारखण्ड की स्थिति तो बहुत बुरी है, क्योंकि यहां आज भी 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं सैनेटरी पैड्स का इस्तेमाल नहीं करती, जिस कारण इन्हें बीमारी का खतरा ज्यादा बना रहता हैं। हमें तो लगता है कि सैनेटेरी पैड्स के इस्तेमाल में शर्म आने की तरह कहीं बिहार-झारखण्ड की सरकार भी तो इस फिल्म को टैक्स फ्री करने को लेकर शर्म तो नहीं महसूस कर रही कि लोग क्या कहेंगे, देश क्या कहेगा? अरे जनाब शर्म छोड़िये, तथा इन फिल्मकारों के साथ हाथ मिलाइये और बोलिए सैनेटरी पैड्स का उपयोग करिये, फिल्म का संदेश समझिये।