झूठे सम्मान समारोह आयोजित करिये, करोड़ों कमाइये, अपना भविष्य सुरक्षित रखिये…

हमारे झारखण्ड ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में झूठ का बोलबाला हो चला है। पूर्व में जहां लोग झूठ से स्वयं को दूर रखते थे, अब झूठ के संग चलना फैशन हो गया है। बस झूठ को कैसे परोसा जाये? इसका हुनर आपको होना चाहिए, फिर आप घर बैठे ही बैठे  स्वयं को समाज में प्रतिष्ठित भी कर लेंगे और स्वयं को करोड़ों का मालिक भी बना बैठेंगे। आज इस प्रकार के झूठे सम्मान समारोह आयोजित कर कई संस्थान लाखों नहीं, करोड़ों-अरबों में खेल रहे हैं।

हमारे झारखण्ड ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में झूठ का बोलबाला हो चला है। पूर्व में जहां लोग झूठ से स्वयं को दूर रखते थे, अब झूठ के संग चलना फैशन हो गया है। बस झूठ को कैसे परोसा जाये? इसका हुनर आपको होना चाहिए, फिर आप घर बैठे ही बैठे  स्वयं को समाज में प्रतिष्ठित भी कर लेंगे और स्वयं को करोड़ों का मालिक भी बना बैठेंगे। आज इस प्रकार के झूठे सम्मान समारोह आयोजित कर कई संस्थान लाखों नहीं, करोड़ों-अरबों में खेल रहे हैं।

इस प्रकार के झूठे सम्मान समारोह को, जिसका सत्य से कोई वास्ता नहीं, आयोजित कराने के लिए सरकारी, अर्द्धसरकारी, निजी संस्थान खुलकर आर्थिक सहायता भी पहुंचाते है, बशर्तें शर्त सिर्फ इतना होता है कि आप उनकी समय-समय पर आरती उतारते रहे, बेवजह अपने संस्थानों में बुलाकर, उनका स्वागत करते रहे।

आप इस प्रकार के झूठे सम्मान समारोह धार्मिक, अधार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक उत्सवों पर कर सकते हैं। इसके लिए आपको झूठे सम्मान पानेवाले लालची लोगों की जरुरत होगी, ऐसे लोग आपको हर मुहल्ले में मिल जायेंगे, क्योंकि ये जानते है कि इन्हें भारत रत्न या पद्मविभूषण या नोबेल प्राइज तो मिलना नहीं है, इसलिए क्यों नहीं? गोल-मटोल पीतल तथा पीठ पर चादर रखकर मिलनेवाले सम्मान को प्राप्त कर अखबारों और चैनलों में अपनी जय-जयकार करा लें। जब झूठे सम्मान पानेवाले लालचियों का समूह आपके पास मौजूद हैं तो समझ लीजिये, जहां चाह वहां राह।

जैसे ही आपको ये लालची लोग मिले, जिन्हें झूठी सम्मान पाने की लत लगी होती है, उन्हें अपने गिरफ्त में लीजिये, फिर उन शैक्षिक संस्थानों, सरकारी संस्थाओं, गैर-सरकारी संस्थाओं को पकड़िये, जो ऐसे कामों के लिए खुब पैसे उदारभाव से खर्च करते हैं। हम आपको बता दें कि अगर आप अखबार या चैनल में हैं तो ये काम करने में आपको दिक्कत नहीं होगी, क्योंकि अखबार व चैनल द्वारा होनेवाले इस प्रकार के झूठे सम्मान समारोह आयोजन में राज्य सरकार और उनके अंदर आनेवाली विभिन्न प्रकार के विभाग के वरीय अधिकारी जमकर पैसे लूटाते हैं, शर्त सिर्फ इतना होता है कि राज्य सरकार की समय – समय पर इमेज चमकाते रहे, कोई ऐसी खबरें न छाप दें या दिखा दें, जिससे सरकार की किरकिरी हो जाये। बैंक के लोग भी इस प्रकार के कार्यक्रम में खुब मदद करते हैं तथा भाग भी लेते है। बस आपको करना ये हैं कि जब झूठे सम्मान में जब आप सम्मान पानेवाले लालचियों को जब पीतल के टूकड़े परोस रहे होते हैं तो एक दो पीतल के टूकड़े इनके भी मुंह पर दे मारिये।

झूठे सम्मान समारोह में पीतल के बने कुछ सामान और घटिया स्तर के सफेद चादर की जरुरत होती है, ये आपको किसी भी व्यापारी के दुकान में मिल जायेंगे, या वे लोग जो हमेशा से इस प्रकार का सम्मान पाते रहे हैं, उनके यहां आप ये सारी चादरें, सस्ते दामों पर मिल जायेंगे। जिसका आप विशेष लाभ उठा सकते हैं।

एक बात और, जब आप इस प्रकार के सम्मान समारोह आयोजित करें तो आप अपने मां-बाप और अपनी पत्नी को भी लगे हाथों सम्मानित करवा दीजिये, ये कहकर कि आप को यहां तक पहुंचाने में, बेगैरत बनाने में, दुनिया को उल्लू बनाने में आपके खानदान के इन महानुभावों का बहुत बड़ा रोल रहा है, लोग तालियां बजाते हुए, इनका भी उसी प्रकार से स्वागत करेंगे, जैसा कि अन्य झूठे सम्मान पानेवाले लालचियों के लिए बजा रहे होते है।

झूठे सम्मान समारोह आयोजित करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप धर्म का बाजा भी इसमें बजा देंगे तो कोई नहीं बोलेगा, क्योंकि आपने उन्हें पीतल के टूकड़ों और सफेद चादरों से नवाजा है, जो घटिया स्तर के काम और सामाजिक विद्वेष फैलाने के लिए ही जाने जाते है, इसलिए देर मत करिये, आज ही जुड़ जाइये, झूठे सम्मान समारोह का आयोजन करिये, करोड़ों-अरबों में खेलिये।

हां, इस प्रकार के झूठे सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि या पीतल के टूकड़े बांटनेवाले या चादर ओढ़ानेवाले भी आपको बहुतायत की संख्या में मिल जायेंगे, क्योंकि इनका चेहरा चमकाना और आनेवाले विधानसभा तथा लोकसभा चुनावों में उम्मीदवार के रुप में खड़ा होकर अपना भविष्य सुरक्षित रखना मुख्य मकसद होता हैं, जो इस प्रकार के आयोजन से उनका मकसद सफल होता दीखता है, अतः जमकर इसका फायदा उठाइये, झूठ के इस संसार में डूबकी लगाइये।

Krishna Bihari Mishra

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