राजनीति

बेवजह CM का टांग मत खींचियें, जापान में भारतीय राजदूत ने डिनर दिया था न कि रघुवर दास ने

हद हो गई, अब तो हर कोई मुख्यमंत्री रघुवर दास को लपेट रहा है, चाहे उनकी गलती हो या न हो। इस लपेटनेवाले कार्यक्रम में विरोधी दल के नेताओं को भी शामिल कर लिया जा रहा हैं, अब बेचारे विरोधी दल के नेताओं को क्या मालूम कि सच्चाई क्या है? चूंकि उन्हें लगता है कि पत्रकार सवाल पुछ रहे हैं तो कुछ न कुछ तो सच्चाई अवश्य होगा, इसलिए वे भी कुछ न कुछ बोल दे रहे हैं और लीजिये समाचार तैयार और जहां से समाचार प्रसारित होनेवाले हैं, वहां भी थोड़े ही विद्वानों की जमात बैठी है, लंगूर टाइप लोग बैठे हैं, समाचार चला दिया, लग गया न्यूज, वायरल हो गया और लीजिए मुख्यमंत्री रघुवर दास की इज्जत लूटने का काम प्रारम्भ। पता नहीं ऐसी बेसिर-पैर की न्यूज चलाने में लोगों को क्या मिलता है? भगवान जाने।

आप कहेंगे कि क्या हो गया?  ऐसा लिखने की जरुरत क्यों पड़ गई? चूंकि हुआ ऐसा है कि अभी मुख्यमंत्री रघुवर दास चेक और जापान के दौरे पर गये हुए है। इसी दौरान जापान में भारत के राजदूत टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास में 11 अक्टूबर को डिनर का कार्यक्रम रख दिया। जो लोग इस समाचार को प्रसारित कर रहे है, उन्हें भी पता है कि यह डिनर भारतीय दूतावास में भारत के राजदूत सुजान आर चिनॉय ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के सम्मान में आयोजित किया था। इस दौरे के दौरान की एक फोटो रांची के पत्रकारों को हाथ लग गई है, इस फोटो में सीएम रघुवर दास, मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, विकास आयुक्त अमित खरे, संभवतः भारतीय राजदूत और इसके ठीक पीछे एक जापानी युवती शराब की बोतलों के साथ खड़ी है। प्रथम दृष्टया इस फोटो को देखे तो इसमें ऐसा कुछ भी नहीं हैं, जो गलत हैं, जिस पर समाचार बनाया जा सकें, पर कुछ ज्यादा जाननेवालों ने इसे भी समाचार के रुप में नकारात्मक रुप से सीएम रघुवर दास के इमेज को गिराने के लिए प्रसारित कर दिया, जो पूर्णतः गलत हैं।

हम आपको बता दें कि कुछ लोगों ने यह फोटो, हमें भी भेजा था, जिस पर हमने लिखित तौर पर उन महानुभावों को सूचित किया था कि ऐसा इसमें कुछ भी नहीं दिख रहा, जिससे यह पता चले कि यह गलत हैं और उन्हें मैंने जो लिखा, वह आपके समक्ष रख रहा हूं – जापान में शराब पीना या पिलाना सम्मान की बात है, चूंकि ये डिनर इंडियन राजदूत ने दी है, इसलिए ये जापानियों के लिए हो सकता है या उन भारतीयों के लिए जो इसका सेवन करते हैं चूंकि भारतीय राजदूत ने डिनर का आयोजन किया था, न कि सीएम रघुवर दास ने, तो हो सकता है कि उसमें जापानी भी शामिल हो, जो डिनर में शराब भी लेते हो, तो क्या उनके लिए शराब नहीं होना चाहिए? ये तो वहीं बात हो गई कि हम जब कहीं भाषण देने जाये तो वहां हम भाषण की शुरुआत भाइयों और बहनों से करें, जैसा कि हम करते रहते हैं और दूसरे को भी कह दें कि आपको भी भाइयों और बहनों से ही भाषण की शुरुआत करनी है, ये जबर्दस्ती क्या ठीक है? अरे कुछ लोग लेडिज और जेन्टलमेन भी बोलते हैं, हमें यह नहीं भूलना चाहिए।

पत्रकारों को सोचना चाहिए कि हर दम किसी का इज्जत लूटने और नीचा गिराने के लिए समाचार प्रसारित करना पीत पत्रकारिता का घोतक है, इससे उन्हें बचना चाहिए और विपक्षी दल के नेताओं को भी दूरी बनाना चाहिए, खासकर झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी को, उन्हें मालूम होना चाहिए कि उनके पास जो भी पत्रकार जाते या सवाल पुछते है, सभी विद्वान नहीं होते, कुछ ज्यादा महान भी होते हैं, जिन्हें समाचार की जानकारी भी नहीं होती और बहुत कुछ पुछ दिया करते हैं। ऐसे में इस प्रकार के सवालों का जवाब देने पर इज्जत जाने का खतरा उन्हें भी हैं।

और अंत में, जो लोग शीशे के घरों में रहा करते हैं, वे दूसरे के घरों में पत्थर नहीं फेंका करते, क्या पत्रकार शराब नहीं पीते?  ऐसा तो नहीं कि शराब पीना गुनाह हैं, और भारतीय राजदूत ने डिनर में शराब का प्रबंध कर कोई बहुत बड़ा अपराध कर दिया हो।