कैसे आयेंगे अच्छे दिन? यहां तो ब्यूरोक्रेट्स सारे सिस्टम को हैक कर चुके हैं

श्रीकृष्ण लोक प्रशासन संस्थान रांची में विगत 6 सालों से लगभग दस कम्प्यूटर ऑपरेटर कार्यरत हैं। बताया जाता है कि जैप आइटी से इनकी मांग की गई थी। इन्हें पारिश्रमिक भुगतान के मामले में इन दिनों लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा हैं। शुरुआती दौर में उन्हें कार्मिक विभाग के प्रावधानों के अनुसार प्रतिमाह एक नियत मानदेय मिलता रहा, पर इधर जैसे ही नये पदाधिकारियों का आगमन होना शुरु हुआ, सभी ने अपने अनुसार नये-नये कीर्तिमान स्थापित करने लगे और फिर यहीं से शुरु हुआ इनके शोषण का सिलसिला।

ऑपरेटरों से पूछा जाने लगा कि आप डेलीवेजेज पर हैं या मासिक पारिश्रमिक पर?  अब बेचारे ये कम्प्यूटर ऑपरेटर कितनी बार स्पष्टीकरण दें? डेलीवेजेज के नाम पर कई बार ऐसा होता है कि अगर किसी महीने में सार्वजनिक अवकाश, शनिवार-रविवार के साप्ताहिक अवकाश कारणों से पन्द्रह दिन काम करने सकें तो उन्हें इतने ही दिनों का पैसा मिलता है।

मुख्यमंत्री सचिवालय, जनसंवाद केन्द्र, कार्मिक विभाग तक ये ऑपरेटर अपनी बात पहुंचाते रहे, पर कोई सकारात्मक परिणाम इन्हें नहीं मिला। दो माह पूर्व राज्य सरकार ने कम्प्यूटर ऑपरेटरों, तकनीकी सहायक वगैरह के मामलें में पारिश्रमिक अट्ठाइस हजार से पचास हजार तक करने की घोषणा की थी, नोटिफिकेशन तो निकला, पर पदाधिकारियों के उटपटांग निर्णयों की वजह से उनके मानवीय और वैधानिक हकों का शोषण हो रहा है। उन्हें समझ नही आ रहा कि वे अपना हक किस तरह पाएं।

केन्द्र सरकार की पहल पर एटीआइ में पिछले वर्ष आरटीआई, हेल्पलाइन आरम्भ हुआ। इसे सुदृढ़ बनाने के लिए इसनें दो लोगों को रखा जाना तय हुआ। इंटरनेट सुविधा के साथ-साथ कम्प्यूटर, प्रिंटर, टेलिफोन और अन्य व्यवस्था की जानी थी, पर एकमात्र टेलीफोन सुविधा के अलावा कोई अन्य मदद इसे नहीं मिल सकी। एकमात्र व्यक्ति के भरोसे इसका संचालन हो रहा, सालभर से यही व्यवस्था बनी हुई है। हेल्पलाइन का कार्य नागरिकों को आरटीआई के उपयोग और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने को है। नागरिक टेलीफोनिक जानकारी के अलावा मेल के जरिये आरटीआई संबंधी जानकारी ले सकते हैं, पर कतिपय कारणों से इसे प्रोत्साहित करने के बजाय बंद करने का ही कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।

दीपावली, छठ के अवसर पर हफ्ते की छुट्टी लेने पर मासिक पारिश्रमिक से राशि की कटौती की जा रही है। कम्प्यूटर की मांग संभवतः पारदर्शी और उत्तरदायी प्रशासन की केन्द्र सरकार की पहल राज्य सरकार को रास नहीं आ रही।

कैसे आयेंगे अच्छे दिन?  जब सरकार के नाक के नीचे ब्यूरोक्रेट्स सारी व्यवस्था को हैक कर चुके हो। इधर कम्प्युटर ऑपरेटरों को कभी छह-सात हजार रुपये प्रतिमाह मिला करता था। अभी कुछ माह पहले तक अठारह हजार रुपये प्रतिमाह हो गया और अब घटकर दस-बारह हजार हो गया। नये पदाधिकारी का कहना है कि आप डेलीवेजेज पर हो, इसलिए यहीं मिलेगा। इधर कम्प्यूटर ऑपरेटरों ने दो माह से वेतन नहीं लिये है। मामला काम्रिक सचिव तक पहुंच गया है। अब कार्मिक सचिव क्या निर्णय लेती है?  सभी का ध्यान उसी ओर है।