हे प्रभु, किसी भी राज्य को ऐसा CM न देना, जो शिक्षकों और गरीबों के बच्चों के साथ क्रूरता से पेश आएं

किसी ने ऐसे ही नहीं कह दिया कि लोकतंत्र अर्थात् मूर्खों का शासन। जब आप अयोग्य लोगों को चूनेंगे। धर्म और जाति के नाम पर वोट देंगे। मूर्खों की जय-जयकार करेंगे। गलत को गलत नहीं कहेंगे। बलात्कारी और दुष्चरित्रता में निपुण नेताओं को जातीयता में तौल कर, उसके पक्ष में मतदान करेंगे, तो पीसेगा कौन? वहीं न, जो इनके चक्कर में आयेगा?

किसी ने ऐसे ही नहीं कह दिया कि लोकतंत्र अर्थात् मूर्खों का शासन। जब आप अयोग्य लोगों को चूनेंगे। धर्म और जाति के नाम पर वोट देंगे। मूर्खों की जय-जयकार करेंगे। गलत को गलत नहीं कहेंगे। बलात्कारी और दुष्चरित्रता में निपुण नेताओं को जातीयता में तौल कर, उसके पक्ष में मतदान करेंगे, तो पीसेगा कौन? वहीं न, जो इनके चक्कर में आयेगा?

जब कोई कहेगा कि मैने चाय बेचकर अपने परिवार की परवरिश की और आप उसकी बातों में भावनाओं में बहकर अपना मत का अपहरण करवा लेंगे तो फिर बूकायेंगा कौन? आप ही न, तो लीजिये बुकाते रहिये, उसको क्या है? वह तो झूठ, लंद, फंद बोलकर अपना काम निकाल ही लेगा और आप हमेशा ठगे जायेंगे, बर्बाद होते रहेंगे।

आप स्वयं सोचिये, सरकारी स्कूलों में किसका बच्चा पढ़ता है, क्या वहां झारखण्ड के मुख्यमंत्री/मंत्री/आइएएस/आइपीएस के बेटे-बेटियां, पोते-पोतियां, नाती-नतिनियां पढ़ा करती है, या अखबारों/चैनलों/पोर्टलों में काम करनेवाले कारपोरेट एडिटरों/स्थानीय संपादकों/प्रधान संपादकों/समाचार संपादकों या इनके मालिकों के बेटे-बेटियां, पोते-पोतियां या नाती-नतिनियां या इनके प्रेमी-प्रेमिकाओं के बच्चे पढ़ा करते है?

सामान्य सी बात है कि सरकारी स्कूलों में उन्हीं के बच्चे पढ़ते है, जो जूते सीते हैं, जो साइकिलों के टायर की मरम्मत करते हैं, जो दो जून की रोटी के लिए खेतों-खलिहानों में मजदूरी का काम करते हैं, जो बड़े घरों में पोछा लगाने का काम करते हैं, जिन्हें ईश्वर ने किसी लायक नहीं छोड़ा, जो इन बड़े नीच नेताओं की तरह झूठ बोलने का काम नहीं करते, ऐसे ही लोग के तो बच्चे इन सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं और वहां पढ़ाते है सरकार के भेजे ऐसे पारा टीचर, जो सात-आठ हजार रुपये की मानदेय पर गुजर-बसर करते हैं।

इनकी हालत ऐसी है कि ये अपना दुखड़ा भी नहीं रो सकते, ये धरना-प्रदर्शन भी नहीं कर सकते, ये अपनी मांगों के लिए मुख्यमंत्री को काला झंडा भी नहीं देखा सकते और अगर दिखाया तो इन्हें झूठे मुकदमें में ऐसा परेशान करेंगे, कि इनकी जिंदगी तबाह करने की पूरी तैयारी वर्तमान मुख्यमंत्री रघुवर दास कर देगा, वह भी ताल ठोक कर, क्योंकि वह जहां से आया है, उस भाजपा में प्रेम और दया की जगह क्रूरता आजकल सिखाया जा रहा है, तभी तो इसने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी, और पारा टीचर के हाथों में हथकड़ियां तक लगवा दी।

आश्चर्य है, जिस देश में कबीर की पंक्तियां चलती है कि गुरु गोविंद दोऊ खड़ें, काके लागूं पायं। बलिहारी गुरु आपनो, जो गोविंद दियो बताय। जहां के सर्वपल्ली राधाकृष्णन् के जन्मदिन यानी पांच सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है, उस देश में भाजपा का यह नेता, रघुवर दास, शिक्षकों के सम्मान के साथ खेल गया। यही नहीं, वो क्रूरता के साथ पेश आ रहा है, उसे पता ही नहीं कि सम्मान क्या होता है? क्योंकि जो सम्मान को जानेगा, वहीं सम्मान देगा  न।

फिलहाल भाजपा में आजकल जिधर देखिये, उधर गुंडागर्दी का रिकार्ड देखने को मिल रहा है, जो अच्छे लोग है, उनकी बातों को ताखों पर रख दिया जा रहा है, नमूना देखना है तो झारखण्ड के धनबाद चले जाइये, पारा टीचरों को यहां का मुख्यमंत्री हाथ में हथकड़ी पहनवा रहा है, पर अपने प्रिय बाघमारा विधायक ढुलू महतो, जिस पर यौन शोषण का आरोप है, जिसके खिलाफ भाजपा की ही जिला मंत्री कमला कुमारी आत्मदाह करने का प्रयास कर चुकी है, उसे हरसंभव बचाने का प्रयास कर रहा है, आखिर ये सब क्या बता रहा है, क्या झारखण्ड की जनता महामूर्ख है?

पूरे राज्य में शिक्षा व्यवस्था ठप है, किसी को इसकी चिन्ता नहीं, मीडिया को बस विज्ञापन की चिन्ता है, उसे विज्ञापन मिल गया और बस वह “हरे रघुवर, हरे रघुवर, रघुवर, रघुवर हरे, हरे” का अखण्ड जाप कर रहा है, पर पारा टीचरों के लिए उनके दिल में दर्द नहीं उभर रहा।

कमाल है झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने साफ कह दिया कि पारा शिक्षक मामले में जनप्रतिनिधि हां में हां न मिलाये, इसका समाधान करें, पर सत्ता के मद में चूर मुख्यमंत्री रघुवर दास के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। कमाल यह भी है कि आज पारा टीचरों ने राज्य के कई मंत्रियों जैसे सरयू राय और लूइस मरांडी के घर का घेराव किया, पर सरकार घमंड में चूर है, वो तो ठीक स्वयं को मान चूकी है कि वह जिंदगी भर सत्ता में रहने के लिए ही पैदा हुई है, पर उसे नहीं पता कि सत्ता जाने के बाद ऐसे घमंडी नेताओं का क्या हश्र होता है।

कमाल यह भी है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास के इशारे पर प्रशासनिक अधिकारियों व पुलिस पदाधिकारियों का दल एक से एक झूठे मुकदमे बनाकर, पारा टीचरों को इस प्रकार फंसाने का काम कर रहा है कि उनकी पूरी जिंदगी ही केस और अदालत में चली जाये, पर कहा भी जाता है कि अत्याचार जितना बढ़ेगा, संघर्ष और गहरा होगा, तथा आतताइयों के नाश होने में ज्यादा समय भी नहीं लगेगा।

Krishna Bihari Mishra

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