18 जनवरी 1941 की वो रात जब गोमो स्टेशन पर अंतिम बार नेताजी को देखा गया

18 जनवरी, एक ऐतिहासिक दिन। बहुत कम ही लोग जानते है कि झारखण्ड में गोमो जंक्शन नामक रेलवे स्टेशन पर 18 जनवरी 1941 को, नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अंतिम बार देखा गया था। बताया जाता है कि अंतिम दिन दिल्ली जाने के लिए उन्होंने यहीं से गाड़ी पकड़ी थी और उसके बाद फिर उन्हें कहीं नहीं देखा गया।

18 जनवरी, एक ऐतिहासिक दिन। बहुत कम ही लोग जानते है कि झारखण्ड में गोमो जंक्शन नामक रेलवे स्टेशन पर 18 जनवरी 1941 को, नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अंतिम बार देखा गया था। बताया जाता है कि अंतिम दिन दिल्ली जाने के लिए उन्होंने यहीं से गाड़ी पकड़ी थी और उसके बाद फिर उन्हें कहीं नहीं देखा गया।

नेताजी की याद में, आज भी गोमो जंक्शन पर एक शिलाखंड के रुप में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित की गई हैं, जो इधर से गुजरनेवाले रेलयात्रियों को उनके ऐतिहासिक निष्क्रमण की याद दिलाती है। इस शिलाखण्ड पर हिन्दी और अंग्रेजी में लिखा है “18 जनवरी 1941 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ऐतिहासिक निष्क्रमण के निमित्त इसी स्टेशन से गाड़ी पकड़ी थी”।

पूर्व में इस स्टेशन का नाम गोमो जंक्शन था, पर बाद में नेताजी की याद में इस स्टेशन का नाम बदल दिया गया। आज इस स्टेशन का पूरा नाम है “नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन गोमो” हैं। इस स्टेशन से लोग रांची, आद्रा और बरकाकाना जाने के लिए गाड़ी बदलते हैं। यह स्टेशन ग्रैंड कार्ड लाइन में स्थित है, जहां ज्यादातर महत्वपूर्ण गाड़ियां रुकती है।

जिन्हें नेताजी में दिलचस्पी है, जो उनपर श्रद्धा लुटाते हैं, उनके लिए यह स्टेशन किसी तीर्थस्थान से कम नहीं। आज भी नेताजी के चाहनेवाले इस स्टेशन पर आकर आज के दिन उनकी प्रतिमा पर दो पुष्प चढ़ाना नहीं भूलते।

Krishna Bihari Mishra

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