भाई मेरे वक्त बलवान होता है, मोदी या दास नहीं, वक्त ने यहां तक पहुंचाया, वक्त ही वहां से हटायेगा भी

सूरज प्रतिदिन निकलता है, लेकिन करोड़ों की आबादी में बहुत कम ही लोग हैं, जो सूरज को प्रतिदिन निकलते और डूबते देखते हैं। सूरज प्रतिदिन एक संदेश देता है, पर बहुत कम ही लोग हैं, जो उन संदेशों को समझ पाते हैं, पर जो समझ लेते हैं, उनकी जिंदगी बन जाती है, उनका जीने का उद्देश्य सफल हो जाता है, और जो नहीं समझ पाते, वे ऊंचाइयों को भी पाकर, अंत में धूल में मिल जाते हैं, जिनका बाद में कोई अता-पता भी नहीं होता।

सूरज प्रतिदिन निकलता है, लेकिन करोड़ों की आबादी में बहुत कम ही लोग हैं, जो सूरज को प्रतिदिन निकलते और डूबते देखते हैं। सूरज प्रतिदिन एक संदेश देता है, पर बहुत कम ही लोग हैं, जो उन संदेशों को समझ पाते हैं, पर जो समझ लेते हैं, उनकी जिंदगी बन जाती है, उनका जीने का उद्देश्य सफल हो जाता है, और जो नहीं समझ पाते, वे ऊंचाइयों को भी पाकर, अंत में धूल में मिल जाते हैं, जिनका बाद में कोई अतापता भी नहीं होता।

जब ऐसे लोग तिकड़म कर ऊंचाइयों को पाते हैं, तो उन्हें लगता है कि जो उन्हें प्राप्त हुआ है, वो आजीवन उनके पास ही रहेगा, इसलिए इस चक्कर में वे ऐसेऐसे कुकृत्य करते हैं, ऐसेऐसे गुनाह कर डालते हैं, जो अक्षम्य है, और यहीं अपराध आगे चलकर, उनका तथा उनके संस्थान (जिनसे वे जुड़े हैं, चाहे वह पॉलिटिकल संस्थान हो या और कोई) को तबाह कर डालते हैं।

सूरज बारबार कहता है, कि देखों मैं सुबह में जब निकल रहा होता हूं तो वह हमारी बाल्यावस्था होती हैंऔर जब दोपहर में होता हूं तो युवावस्था में होता हूं और जैसे ही सायं होता है वृद्धावस्था की भांति समाप्त हो जाता हूं और फिर दूसरे दिन एक नई ऊर्जा के साथ आपके सम्मुख उपस्थित हो जाता हूं, पर सूरज के इस संदेश को लोग नहीं समझ पाते।

जैसे आपकी सरकार आजकल हिन्दुत्व की बात करते नहीं अघाती, जरा वह सरकार श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ ले, जो कहता है कि जो मरा है, वो जन्म लेगा और जो जन्म लिया है, वो मरेगा। तब ऐसी हालात में वो यह घमंड क्यों कर रहा हूं कि वो सदैव सत्ता में रहेगा, उसके लोग दूसरे के घरों में आग क्यों लगा रहे हैं, वे दूसरे का सम्मान क्यों नहीं कर रहे, वे ये क्यों सोच रहे है कि जो सत्ता उन्हें मिली है, या जो तिकड़म वे लगा रहे हैं, वे तिकड़म सदैव उनके काम ही आयेंगे।

वर्तमान में हमें लालू और मोदी में कोई खास फर्क नहीं दिखता। कभी बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने जब बिहार में सत्ता संभाली थी, तो उनकी क्या हैसियत थी, सभी लोग जानते है, और आज क्या स्थिति है, यह भी सभी लोग जानते है, लोग तो यह भी कहते है कि आज लालू यादव भाजपा ज्वाइन कर लें, तो उनकी सारी समस्या ही खत्म और ये बाते लोग ऐसे ही नहीं कहते, सच्चाई भी है हाल ही में चंद्रबाबू नायडू की पार्टी के कुछ राज्यसभा सदस्य ने भाजपा ज्वाइन की, वो सब कुछ बता देता है

पर लालू यादव दूसरी मिट्टी के बने हैं, या यो कहिये कि बिहार की मिट्टी ही कुछ ऐसी है, कि वह झूकना नहीं सिखाती, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि वर्तमान में चूंकि लालू, मोदी के सामने नहीं झूक रहे हैं, तो वे महान हो गये, उनकी गलतियों की सजा तो उन्हें मिलनी ही हैं, जो मिल रही हैं, उन्होंने भी बहुत लोगों को अपने सत्ता के प्रभाव से  कुचलने का काम किया और आज वे खुद उसका शिकार हो गये, बेटाबेटीबहूपत्नीनातीनतिनी सभी हैं, पर सुख और आनन्द गायब है।

पीएम मोदी भी आज जो सत्ता में हैं और उन्हें ये परम सुख जो प्राप्त हो रहा हैं, वो उन्हें यह सदा के लिए प्राप्त हो ही जायेगा, इसकी भी कोई गारंटी नहीं, क्योंकि जो वे कर रहे हैं, वो जनता के सामने हैं, और ये जनता सदैव उनके साथ ही रहेगी, कहना मुश्किल है। कांग्रेस की जो आज स्थिति हैं, वह ऐसी ही नहीं बनी है, पूर्व में कांग्रेस के बड़े नेता भी यही रवैया अपनाते थे, जिस कारण कांग्रेस की ये हाल है, और वर्तमान में भाजपा के नेता भी वहीं प्रक्रिया अपनाने लगे हैं, इसलिए यह भी ध्रुव सत्य है कि कांग्रेस तो 60 साल सत्ता में रही, ये तो दशक भी नहीं पूरा पायेंगे।

इधर देखने में रहा है, कि भाजपा नेता अपनेआप में नहीं है, एक भाजपा का विधायक तो इंदौर में नगर निगम के कर्मचारी की बैट से पिटाई कर देता है, यह कोई साधारण विधायक नहीं, बल्कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का बेटा है, जरा इसके सोचने का ढंग देखिये। हाल ही में गुजरात के भाजपा के ही एक विधायक ने सड़क पर एक महिला की लात-जूतों से पिटाई कर दी थी, यहीं नहीं एक झारखण्ड में ही सांसद है, निशिकांत दूबे जरा उनका सोशल साइट देखिये वे प्रियंका गांधी के पति को राष्ट्रीय दामाद कह रहे हैं, आखिर ये कौन सी भाषा है भाई, क्या यहीं भाजपा की भाषा है? क्या भाजपा के नेता अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी इसी प्रकार की भाषा का प्रयोग अपने विरोधियों के लिये किया करते थे?

रही बात मीडिया की, तो ये कौन नहीं जानता कि जीटीवी भाजपा का मुखपत्र बन चुका है, उसमें जब देखो भाजपा के लिए रसगुल्ले और गुलाबजामुन ही तैयार होते हैं और अन्य दलों के लिए उसके पास गालियां ही होती है, यहीं नहीं उसके अंदर काम करनेवाले संपादक स्तर के लोग भी भाजपा कार्यकर्ता की तरह काम करते हैं, तो ऐसे में अगर कोई कहता है कि मीडिया आज का गोदी मीडिया बन चुका है तो गलत क्या है?

क्या ये सही नहीं कि पूरे देश में मॉब लिंचिंग की घटना घटी है, अकेले झारखण्ड में केवल सरायकेलाखरसावां में ही नहीं, बल्कि कई स्थानों पर मॉब लिंचिंग की घटना हुई, और उसे दबाने का प्रयास किया गया, क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके समर्थक चैनल्स भूल गये कि रामगढ़ में ही एक मॉब लिंचिंग की घटना हुई, जिसमें अदालत द्वारा आरोपियों को दोषी भी ठहराया गया और उन दोषी अपराधियों को उनके ही एक मंत्री जयन्त सिन्हा ने माला पहनाकर स्वागत भी किया। आखिर ये सब क्या है? अरे यही काम तो सत्ता के मद में रहकर लालू प्रसाद की सरकार के लोग बिहार में किया करते थे, कि वे जो कर या कह रहे हैं, वही ध्रुव सत्य हैं, और इसी चक्कर में वे खुद तो किंग बनना चाहते थे, पर किंग नहीं बन सके, बाद में खुद को किंग मेकर बताने लगे और आज जेल की शोभा बढ़ा रहे हैं।

ऐसे में वर्तमान में जो आप गलत को गलत कहकर, उसे संरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं, तो जनता को क्या है? कब उसका मूड बदलेगा, आप क्या जानते है, आप भगवान थोड़े ही है? अरे जो सवर्ण पिछड़ेदलित कल कांग्रेस को समर्थन करते थे, आज वे आपको समर्थन कर रहे हैं, वह भी जयश्रीराम और हिन्दुत्व के नाम पर, इसकी क्या गारंटी है कि ये कभी नहीं टूटेंगे? अल्पसंख्यक तो कभी आपके साथ नहीं थे और कभी आपके होंगे, क्योंकि जिस इलाके में मैं रहता हूं, वहां बड़ी संख्या में मुस्लिमईसाई रहा करते हैं, जिनके दिलों में आप कही हैं ही नहीं, वे भाजपा छोड़ किसी अन्य दलों को वोट देते हैं, ऐसे में भले ही उनके वोट निर्णायक नहीं होते हो, पर आपने ये कैसे समझ लिया कि उनके दिलों में पल रही नफरत, एक दिन आपके खिलाफ नहीं भड़केगी और उनकी बद्दुआएं नही लगेगी।

भाई मेरे वक्त बलवान होता है, मोदी या रघुवर दास बलवान नहीं है, वक्त ने आपको यहां तक पहुंचाया और वक्त ही आपको वहां से हटायेगा भी, ठीक उसी प्रकार जैसे सूरज, प्रतिदिन निकलता है और प्रतिदिन डूबता है, आप 2014 में निकले हैं 2019 युवावस्था का प्रतीक है, लेकिन यह भी ध्रुव सत्य है कि अब आप धीरेधीरे पतन की ओर है, क्योंकि मजलूमों की बद्दुआएं धीरेधीरे भयंकर रुप धारण कर रही हैं, जो आपको 2024 में सत्ता से सदा के लिए समाप्त कर देगी।

महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरु, इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, अटल बिहारी वाजपेयी को तो लोग याद भी करते हैं, आपको लोग याद करेंगे भी, तो किस रुप में याद करेंगे, समझने की कोशिश कीजिये, पर सत्ता के मद में रहकर कोई चिन्तन किया है,? रही बात आपको लगता है कि आपने कांग्रेस को समाप्त कर दिया, इसलिए भाजपा की सत्ता बराबर बनी रहेगी, कांटा सदा के लिए निकल गया, तो ये आपकी गलतफहमी है, वक्त हर चीज का इलाज है।

जिस दिन जनता मुफ्तखोरी भूल जायेगी, जिस दिन इस देश को ईमानदारी और मेहनत से जीना सिखानेवाला देश को नेता मिल गया, तो फिर यह ध्रुव सत्य होगा कि भाजपा देश में कही नहीं दिखेगी, चाहे आप या आपके लोग किसी सच्चे पत्रकार या सच्चे देशभक्त को कितना भी रौंदने का प्रयास क्यों करें, आप जितना भी भाषण दे लें, मैं फिर कह रहा हूं कि वक्त आपका हैं, आप गलत भी करेंगे तो आप ही जीतेंगे, क्योंकि इसमें आप नहीं, आपके साथ वक्त है, और जब वक्त आपको दगा देगा तो पता भी नहीं चलेगा

जैसे अटल बिहारी वाजपेयी खुद को बहुत अच्छा नेता मानते थे, पर उन्हीं अटल बिहारी वाजपेयी को जनता ने तीनतीन बार सत्ता सौंपा और ये भी सच्चाई है कि 2004 में उन्हें फील गुड भी करा दिया। आप 2014 में जब सत्ता में आये तो आपने उन्हें भारत रत्न दिया, लेकिन जिन्हें आप भारत रत्न दे रहे थे, उन्हें पता भी नहीं था कि उनके गले में जो चीज डाली जा रही हैं, वो आखिर में है क्या?

आप तो इधर साक्षात भगवान बने बैंठे हैं, आपके लोग तो आपके नाम की जयकारा लगाते हैं, संसद में भी और संसद से बाहर भी, सड़कों पर भी, आम सभा और रैलियों में भी। इतना रट तो अपने मातापिता के नामों का भी नहीं लगाते, इतना तो भगवान का भी नाम नहीं लेते, इसलिए बने रहिये, पर फिर भी ये ध्यान रहे कि वक्त बलवान होता हैं, कि व्यक्ति, कि संस्थान।

Krishna Bihari Mishra

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