जब मुलायम ने चीन की दोगली नीति से मनमोहन को सावधान रहने को कहा

याद करिये, फरवरी 2011, केन्द्र में यूपीए की सरकार, संसद में मुलायम सिंह यादव राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान अपना पक्ष सदन में रख रहे है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव कांग्रेसनीत गठबंधन सरकार को आगाह कर रहे है कि वे अपनी आदत तत्काल सुधारे और देश की जो स्थिति है,

याद करिये, फरवरी 2011, केन्द्र में यूपीए की सरकार, संसद में मुलायम सिंह यादव राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान अपना पक्ष सदन में रख रहे है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव कांग्रेसनीत गठबंधन सरकार को आगाह कर रहे है कि वे अपनी आदत तत्काल सुधारे और देश की जो स्थिति है, उस पर विचार करते हुए तत्काल प्रभाव से कदम उठाये, क्योंकि चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर, भारत पर हमला करने और भारतीय भूभाग को अपने कब्जे में करने को ठान रखी है। खुशी इस बात की थी कि उस दौरान उनके चल रहे भाषण के बीच किसी भी पार्टी के सांसदों ने हो हंगामा खड़ा नहीं किया, जैसा कि आम तौर पर होता हैं, विभिन्न दलों के छुटभैये सांसद, बेवजह हो हंगामा खड़ा कर, संसद का समय नष्ट कर रहे होते हैं।

चीन ने भारत पर हमला करने के लिए जनता से राय मांगी

आश्चर्य इस बात की है कि उस दौरान मुलायम सिंह यादव ने खुद के पहले दिये गये भाजपा नेता राजनाथ सिंह के भाषण का भी समर्थन किया कि चीन ने अपने लोगों से ऑनलाईन वोटिंग कर, चीनवासियों का मत भी मांगा हैं कि भारत पर हमला किया जाये या नहीं। ऐसे भी चीन की नीतियां रही हैं कि जब कमजोर रहो, तो चुपचाप रहो और बलवान हो जाओ तो दूसरे देश पर हमला कर दो, यहीं नहीं चीन की नीतियां ये भी रही हैं कि सीमा अथवा किसी भी विवाद का हल, शांति से नहीं युद्ध से ही किया जा सकता हैं, जब उनकी नीतियां ही ऐसी है तो फिर उन पर विश्वास कैसे किया जा सकता है। ऐसे भी 1962 के बाद से चीन ने जो सीमा पार हरकत की है और भारतीय भूभाग पर कब्जा जमाने की जो पैतरेबाजी की हैं, उसके समाचार विभिन्न इलेक्ट्रानिक चैनलों व प्रिंट मीडिया के माध्यम से देशवासियों के बीच आते रहे है, जिससे भारतीय जनता भी सशंकित हैं कि चीन कल क्या कर बैठे? पर हमारे देश की कांग्रेस सरकार इन सभी मामलों में चुप्पी साधी बैठी हैं, और आराम से टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला, आदर्श घोटाला, एस बैंड घोटाला, खाद्यान्न घोटाला करते हुए देश का सम्मान प्रभावित कर रही है।

मनमोहन सरकार किंकर्तव्यविमूढ़

यहीं नहीं जहां अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी जैसे देश, विदेशों में गये अपने देश के धन को स्वदेश मंगवा रहे हैं, वहीं अपना देश का प्रधानमंत्री इस मामले पर किंकर्तव्यविमूढ़ है। इस पर अभी तक कोई नीति स्पष्ट नहीं कर पाया है। जहां चीन का प्रधानमंत्री अपने देश में आकर, बड़ी सफाई से अपनी बात कह कर चला जाता है, वहीं अपने देश का प्रधानमंत्री अपनी बात, अपने देश में हीं नहीं रख पाता। कमाल हैं, चीन, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के नागरिकों को स्टैप्ल वीजा जारी करता है, वहीं हमारे देश का शासक ये भी नहीं कह पाता कि गर उसने ऐसा करना जारी रखा तो भारत भी तिब्बत के लोगों के लिए स्टैपल वीजा जारी करना शुरु करेगा।

भारत के वामपंथियों की चीनभक्ति

यहीं नहीं हमने खुद देखा था कि उस वक्त, यहां की वामपंथी पार्टियों के शीर्षस्थ नेताओं ने कैसे चीनी शासक से सम्मानित होने के लिए लालायित दीखे, यहीं नहीं सम्मानित होने में गर्व भी महसूस किया, ये जानते हुए कि चीन की नीतियां भारत के प्रति कभी ठीक नहीं रही, यहीं नहीं अभी भी भारतीय भू भाग के कई हिस्सों पर चीन का अवैध कब्जा हैं, और दूसरी ओर एक बार फिर चीन ने भारत के अन्य भू भाग पर कब्जा जमाने की अनैतिक तैयारी शुरु कर दी है, क्या ऐसे चीनी शासक से सम्मानित होने की लालसा, भारतीय वामपंथी नेताओं के चरित्र पर अंगूली नहीं उठाती। मुलायम सिंह यादव ने उस वक्त सदन में ठीक ही कहा था कि भारत की विदेश नीति तो अमेरिका के हाथों गिरवी रखी है, उन्होंने उदाहरण भी दिये, और वे उदाहरण सत्य भी प्रतीत होते हैं। कहां गयी भारत की विदेश नीति। जब आस्ट्रेलिया में भारतीय युवकों की पिटाई हो रही थी अथवा भारतीय छात्रों की हत्या की जा रही थी। अमेरिका में जब भारतीय छात्रों के पांवों में रेडियो कॉलर लगाये गये। नेपाल और श्रीलंका जो भारत के साथ कदम से कदम मिला कर चलते थे, वे आज भारत से दूर होते जा रहे हैं। आज कोई भी ऐसा देश नहीं हैं, जो भारत के साथ खड़ा होने की बात करता हो, जबकि पूर्व में भारत के कई पड़ोसी देश ही नहीं बल्कि अन्य दूसरे देश भी भारत के साथ मजबूती से खड़े होते थे। कमाल हैं, देश का सैन्य प्रमुख खुलकर कह रहा हैं कि चीन के मंसूबे सहीं नहीं हैं पर भारतीय नेता, शांति की बात कहते हुए, आराम फरमा रहे है। गर यहीं हाल रहा, तो देश बचेगा या भी नहीं, ये कांग्रेसी क्यूं नहीं समझते। गर देश रहेगा, तो ये शासन भी कर सकते हैं, गर देश ही नहीं रहेगा, तो फिर शासन कैसे करेंगे, सचमुच उस दिन संसद में मुलायम सिंह यादव ने ठीक ही कहा था कि अभी सरकार नहीं,  पहले देश बचाने की बात करें कांग्रेसी, हमें सटीक लगती है। उन्होंने सुप्रसिद्ध समाजवादी नेता व चिंतक राम मनोहर लोहिया का हवाला देते हुए ठीक ही कहा कि इस देश को खतरा पाकिस्तान से उतना नहीं, जितना चीन से हैं, पर हमे लगता हैं कि राम मनोहर लोहिया की बातों को आज तक कांग्रेसियों ने स्वीकार ही नहीं किया।सदन में कांग्रेसियों का ज्यादातर समय आरएसएस और भाजपाईयों पर हमला बोलने और उन्हें नीचा दिखाने में ही जाता हैं, ऐसा लगता हैं जैसे की देश की जनता, इन कांग्रेसी सांसदों को भाजपाईयों और आरएसएस के लोगों को गाली देने के लिए ही सदन में भेजती हैं। हमें लगता हैं कि गर वे चीन मामले पर इतना सजग होते, तो देश आश्वस्त भी होता कि इन कांग्रेसियों के हाथों देश सुरक्षित हैं, पर हमें नहीं लगता, कि देश इनके हाथों सुरक्षित है, ये तो चीन के हमले होने पर भी ये बयान दे देंगे कि भाजपाईयों और संघ के लोगों ने देश पर हमला बोलवा दिया हैं, जैसा कि इनके नेता दिग्विजय सिंह 26/11 मामले में बोलकर, पाकिस्तान की मदद करने में प्रमुख भूमिका निभायी और देश को ही कटघरे में रख दिया। कमाल हैं – कांग्रेसियों का चरित्र।

मनमोहन के शासन में भारतीय सीमा असुरक्षित

यहीं नहीं देश में बढ़ते भ्रष्टाचार और देश की दुर्दशा पर, टीवी चैनलों के संपादक से बातचीत में हमारे प्रधानमंत्री का ये कहना कि विभिन्न मामलों में, जितना उन्हे दोषी बताया जाता हैं, उतना वे दोषी हैं नहीं, उन्होंने गठबंधन सरकार की मजबूरियां भी बतायी, इसी से साफ पता लगता हैं कि हमारे देश में कैसी मजबूर और कमजोर सरकार चल रही है, और इसे कौन चला रहा है। फिर भी। इस देश में पंचवर्षीय सरकार चलती हैं, आशा तो इन्हीं से हैं। गर देश पर बाहरी व आंतरिक खतरा आया तो इससे निजात दिलाना तो इन्हीं को हैं, आशा रखना होगा कि ये कुछ करेंगे और देश को बाहरी खतरों से बचाने में सक्षम होंगे, पर ये तो वक्त बतायेगा। कि इन्होंने क्या किया?

Krishna Bihari Mishra

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चीन को उसी की भाषा में जवाब देने की आवश्यकता

Tue Jul 4 , 2017
लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी के बाद देश में तीसरी बार कोई प्रधानमंत्री बना है, जिसका नाम है – नरेन्द्र मोदी। जिसने देश की सेना का मनोबल बढ़ाया और उस सेना ने भारत चीन और भूटान की सीमा डोका –ला में चीन द्वारा कराये जा रहे सड़क निर्माण का विरोध ही नहीं किया, बल्कि एक महीने से उस पर रोक लगा रखी है

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