देखो-देखो-देखो विधानसभा देखो, सदन में सीएम का बयान देखो, हंगामा होता अपार…

राज्य सरकार झारखण्ड विधानसभा का मानसून सत्र बुलाई हैं, पर वह भी एक-दो दिनों का नहीं पूरे छः दिनों का, वह भी यह जानते हुए कि इन छह दिनों में हंगामे के सिवा कुछ नहीं होने का हैं, इसलिए स्पीकर भी सरकार के इस इरादों को भांपते हुए, वहीं कर रहे हैं, जो सीएम रघुवर दास चाहते हैं, वे यह भी जानते हैं कि हंगामा होगा,

राज्य सरकार झारखण्ड विधानसभा का मानसून सत्र बुलाई हैं, पर वह भी एक-दो दिनों का नहीं पूरे छः दिनों का, वह भी यह जानते हुए कि इन छह दिनों में हंगामे के सिवा कुछ नहीं होने का हैं, इसलिए स्पीकर भी सरकार के इस इरादों को भांपते हुए, वहीं कर रहे हैं, जो सीएम रघुवर दास चाहते हैं, वे यह भी जानते हैं कि हंगामा होगा, ऐसे में पहली बार हंगामे के बाद वे सदन को भोजनावकाश तक स्थगित करेंगे और भोजनावकाश के बाद जैसे ही सदन प्रारम्भ होगा, फिर हंगामा होता देख, अगले दिन 11 बजे तक के लिए सदन को स्थगित कर देंगे, और यहीं आज देखने को मिला।

विपक्ष भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक को लेकर खफा हैं, खफा होने के कारण भी निहितार्थ हैं। राज्य की सारी जनता भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक को लेकर सरकार से नाराज हैं, पर मुख्यमंत्री रघुवर दास इन बातों से इत्तेफाक नहीं रखते, क्योंकि उनका मानना है कि वे जो सोचते हैं, वे जो करते हैं, वे जो देखते हैं, सिर्फ और सिर्फ वहीं विकास हैं, बाकी सब बकवास और इसी घमंड में वे उन सारी निर्णयों को लेते हैं, जिन निर्णयों से उनके कैबिनेट के ही सदस्य क्यों न खफा हो, सच्चाई यह है कि रघुवर दास के एक भी निर्णय से आम जनता को फायदा नहीं मिला, नेताओं-पत्रकारों-ठेकेदारों-उनके भक्तों को फायदा हो जाये, ये बात अलग है।

पता नहीं, इस देश के प्रधानमंत्री को क्या हो गया है, उन्हें भी रघुवर दास में गजब की प्रतिभा दिखाई पड़ती हैं, शायद हो सकता है कि अम्बानी और अडानी के प्रति राज्य सरकार का झुकाव, प्रधानमंत्री मोदी को रघुवर की प्रशंसा करने के लिए बाध्य करता है, जिसकी आलोचना समय-समय पर झारखण्ड का हर क्षेत्रीय दल करता हैं, साथ ही यहां की जनता भी करती हैं।

आज का दिन विधानसभा का हंगामे की भेंट चढ़ जाना, बताता है कि कल भी ऐसा ही होगा और आनेवाले दिनों में भी ऐसा ही होगा, क्योंकि न तो स्पीकर और न ही सदन का नेता फिलहाल सदन में हैं, जो विपक्ष को अपनी बातों अथवा कार्यों से अपनी ओर आकर्षित कर लें, यहां तो सदन का नेता ही गर्व में भरकर स्पीकर से यह कहता है कि भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक पर चर्चा नहीं होगी और स्पीकर भी सदन के नेता के बातों में हां में हां मिला देता है और फिर सत्तारुढ़ दल का कोई नेता, विपक्षी दलों को संस्कार की सीख देने लगता है, वह नेता संस्कार का सीख देने लगता है जो कभी कांग्रेस, तो कभी जदयू, तो कभी भाजपा में जाकर शेखी बघारता है, हद हो गई है भाजपाइयों के संस्कार की, अब ऐसे लोग संस्कार सिखायेंगे, जो क्षण में यहां और क्षण में वहां जाकर अपनी राजनीति ही नहीं, बल्कि अपने पारिवारिक समृद्धि की रुपरेखा तैयार करते हैं।

Krishna Bihari Mishra

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