अपनी बात

दैनिक भास्कर की बेशर्मी देखिये, इसके बिहार-झारखण्ड एडिटर ने सोशल साइट पर अपने कुकृत्यों के लिए माफी मांगी पर अखबार के माध्यम से माफी मांगने से किया इनकार

दैनिक भास्कर की बेशर्मी देखिये। इसके बिहार-झारखण्ड एडिटर कुलदीप व्यास ने कल यानी बुधवार को अपने कुकृत्यों के लिए सोशल साइट फेसबुक के माध्यम से माफी मांग लिया, पर आज गुरुवार को प्रकाशित दैनिक भास्कर में अपने कुकृत्यों का न तो जिक्र किया और न ही माफी मांगी। ज्ञातव्य है कि कल इस अखबार ने मुक्तिदायिनी गंगा को राक्षसी के रूप में पेश करते हुए हेडिंग दे दी थी – कि ‘बिहार में नाव पलटीः भोज में जा रहे 13 बच्चे गंगा का भोग बने।’

जब भारत की धर्मप्राण जनता ने दैनिक भास्कर के इस कुकर्म के लिए सोशल साइट के माध्यम से इस अखबार की खिंचाई करनी शुरु कर दी। तब इस अखबार के बिहार-झारखण्ड के संपादक कुलदीप व्यास ने फेसबुक पर क्षमा मांगी और आगे इस पर विशेष ध्यान रखने का संकल्प जनता के समक्ष किया। कुलदीप व्यास के इस माफी मांगने पर लोगों ने सोचा था कि अखबार गुरुवार को अपनी गलती का जिक्र करते हुए अपने पाठकों से क्षमा मांगेगा। लेकिन जब दैनिक भास्कर के पाठकों ने आज का अखबार देखा तो उन्हें निराशा हाथ लगी।

आम तौर देखा गया है कि अखबार जो गलतियां करते हैं। वे अपनी गलतियों के लिए दूसरे दिन क्षमा मांगते हैं। वे भूल सुधार के माध्यम से खेद प्रकट करते हैं। लेकिन दैनिक भास्कर ने ऐसा न करके सिद्ध कर दिया कि उससे कोई गलती नहीं हुई और वो कल के अपने छपे समाचार पर कायम है। मतलब साफ है कि उसके शब्दों में गंगा ने 13 बच्चों को अपना भोग बना लिया।

वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेन्द्र नाथ कहते हैं कि यह अक्षम्य अपराध है। आपने कुकृत्य अखबार में किया तो आपको क्षमा भी अखबार के माध्यम से ही मांगना है। भूल सुधार भी उसी जगह छापनी है, जहां कल आपने गलतियां की थी। लेकिन ऐसा नहीं करना, गंभीर अपराध की श्रेणी है। भारत के एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया को दैनिक भास्कर के इस अपराध के लिए स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।

उनका यह भी कहना था कि सोशल साइट के माध्यम से माफी मांगना और अखबार के माध्यम से माफी मांगना दोनों अलग-अलग बातें हैं। कोई जरूरी नहीं कि दैनिक भास्कर के सारे पाठक सोशल साइट पर मौजूद हो और उनके क्षमा मांगने के वक्तव्यों को पढ़ ही लिया हो। दैनिक भास्कर को अपनी माफी अपने अखबार के माध्यम से ही माफी मांगना उचित है। अगर उसने ऐसा नहीं किया तो उसने एक और अपराध कर दिया। जिसकी क्षमा भी नहीं।

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