झारखण्ड के IAS/IPS अधिकारियों के जैसा ससुराल और मित्र सभी को मिले, ताकि…

भगवान, IAS ए मुत्थु कुमार के जैसा ससुराल सब को दें, जो अपने दामाद को एक साल में ही 90 लाख रुपये की जमीन और फ्लैट उपलब्ध करा दें। भगवान IAS अविनाश कुमार के मित्र मंडली जैसा उपहार देनेवाला, मित्र मंडली सब को दें जो चश्मा से लेकर कार तक उपहार में दे दें और किसी को बताएं भी नहीं, पर भगवान किसी को भी…

भगवान, IAS ए मुत्थु कुमार के जैसा ससुराल सब को दें, जो अपने दामाद को एक साल में ही 90 लाख रुपये की जमीन और फ्लैट उपलब्ध करा दें। भगवान IAS अविनाश कुमार के मित्र मंडली जैसा उपहार देनेवाला, मित्र मंडली सब को दें जो चश्मा से लेकर कार तक उपहार में दे दें और किसी को बताएं भी नहीं, पर भगवान किसी को भी IAS सुखदेव सिंह, अबू इमरान, भोर सिंह यादव, अंजलि यादव, राजेश्वरी बी, दिव्यांशु झा, उत्कर्ष गुप्ता जैसा परिवार न दें, जिसके पास अपार धन संपत्ति का लेने का कोई स्कोप ही प्राप्त न हो।

इसी प्रकार भगवान आइपीएस अगर बनाएं तो डी के पांडेय की तरह, जिनके पास रांची, पटना, नोएडा और लखनऊ में जमीन ही जमीन केवल दिखाई पड़ें, हम दिल से बधाई देते हैं केन्द्रीय कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग की वेबसाइट का जिन्होंने झारखण्ड के इतने महान-महान पदाधिकारियों के पास वर्तमान में उपलब्ध अकूत संपत्ति का ब्यौरा जनता के सामने रख दिया, नहीं तो झारखण्ड ही नहीं, भारत में कई राज्यों में ऐसे भी आइएएस/आइपीएस हैं, जो अवकाश तक प्राप्त कर चुके होते हैं, और किसी को पता भी नहीं चलता कि उन्होंने अपने सेवा काल में कितना धन-संपत्ति अर्जित किया?

हालांकि धन अर्जित करने में आइएएस और आइपीएस ही नहीं, बल्कि पत्रकारों का एक बड़ा वर्ग भी हैं, जो इनकी सहायता से अकूत धन, ये भी अर्जित करने लगे हैं, और धीरे-धीरे आम जनमानस को भी इसकी जानकारी मिल रही है, जिस कारण अब पत्रकारों को भी आम जनता उतना भाव नहीं देती, क्योंकि अब आम जनता भी जान गई है कि अवैध रुप से धन अर्जन करनेवालों में ये पत्रकार भी आइएएस और आइपीएस के बाप होते जा रहे हैं।

बहुत पहले कबीर ने कहा था –

साई इतना दीजिये, जामे कुटुम समाय।

मैं भी भूखा ना रहूं, साधु न भूखा जाय।।

आज के नये जीवों का नया दोहा है…

साईं भाड़ में जाइये, जहां तक हो सके जाये।

मुझे धन-संपत्ति मिले, चाहे देश मिट्टी मिल जाये।।

जिसका प्रमाण हैं, केन्द्रीय कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग की वेबसाइट पर दी गई झारखण्ड के वरीय अधिकारियों के धन-संपत्ति की जानकारी। अगर सही मायनों में इसकी ईमानदारी से जांच हो जाये, तो बहुत लोग ऐसे फंसेंगे, जिन्होंने आय से अधिक संपत्ति दर्ज की हैं, क्योंकि जिसका जितना वेतन होता हैं, उसके उतने ही खर्च भी होते हैं, ये सार्वजनिक चिन्तन हैं, इसको कोई इनकार नहीं कर सकता।

कुछ दिन पूर्व रांची के बिहार क्लब में एक कार्यक्रम था, एक प्रौढ़ व्यक्ति ने हमें नाश्ते का पैकेट आगे बढ़ाते हुए कहा, सर नाश्ता लीजिये। मैंने कहा कि मैने नाश्ता कर लिया। तब उसने कहा कि आपने नाश्ता किया कैसे? अभी पहला पैकेट मैंने तुरंत निकाला हैं और आपको दे रहा हूं, मैंने फिर कहा कि मैंने कर लिया। तभी एक व्यक्ति ने मेरे पास आकर कहा कि, सर मैंने कई बार संवाददाता सम्मेलन में आपको अन्न जल ग्रहण करते नहीं देखा, आखिर क्यों? मेरा जवाब था, जिस दिन संवाददाता सम्मेलन करानेवाला व्यक्ति/शख्स अपने ईमान के पैसे से नाश्ते का प्रबंध करना शुरु कर देगा, हमें नाश्ता करने में कोई गुरेज नहीं होगा।

फिलहाल झारखण्ड कैडर के 120 आइएएस और कई आइपीएस अफसरों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा दे दिया हैं, और उन संपत्तियों के ब्यौरों को जब आप देखेंगे तो साफ पता लग जायेगा कि ये धन-संपत्ति उन्होंने ईमानदारी से नहीं प्राप्त किये, अगर किये हैं तो जनता के सामने बताएं कि इतना धन-संपत्ति कहां से आ गया और अगर किसी आइएएस/आइपीएस के पास इतना धन-संपत्ति आ भी गया तो यहीं धन संपत्ति सुखदेव सिंह, जैसे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के पास क्यों नहीं? क्या सरकार उन्हें वेतन नहीं देती, कि वे अपना वेतन सरकार को दान कर देते हैं?

सवाल भी सामने हैं, जवाब भी सामने हैं, चिन्तन करिये, भ्रष्टाचार पर चोट करिये, जो गलत हैं, उन्हें सम्मान मत दीजिये, उनके साथ सेल्फी न लीजिये, उन्हें अच्छा मत कहिये, उनका विरोध करिये, उनको अपने आंखों से नीचे गिराइये, उनका स्पर्श किया हुआ, अन्न-जल का परित्याग करिये, देश व राज्य आपका है, थोड़ा जिम्मेवारी आप निभाइये, अगर आप सोचते है कि यूपीए या एनडीए आपका भला करेंगे तो आप मुगालते में हैं, क्योंकि भ्रष्टाचार की गंगोत्री बह रही हैं, जो भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डूबकी लगा रहा हैं, उसकी जय-जय हो रही हैं, और जो विपरीत दिशाओं में बह रहा हैं, उसे लोग बेवकूफ समझ रहे हैं, पर मुझे उन बेवकूफों से कुछ ज्यादा ही प्यार हैं, जिन्होंने कभी किसी को लूटा नहीं, जब भी ऑफिस गये, ईमानदारी से जनता की सेवा की, क्योंकि इन्हीं से तो देश बनता हैं। सैल्यूट, वे सारे ईमानदार आइएएस/आइपीएस अधिकारियों को, जो आज भी धन-संपत्ति अर्जन करने की मनोवृत्ति को त्याग कर, ईमानदारी से देश की शान बढ़ा रहे हैं।

Krishna Bihari Mishra

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