नेता प्रतिपक्ष ने स्पीकर के खिलाफ राज्यपाल से की शिकायत

नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने आज राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मिलकर, इस बात की शिकायत की, कि विधानसभाध्यक्ष ने असंवैधानिक तरीके से गोमिया विधायक योगेन्द्र प्रसाद की विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी, जो गलत हैं। उनका कहना था कि संविधान की धारा 192 (1) में स्पष्ट उल्लेखित है कि किसी भी सदस्य की सदस्यता राज्यपाल के अनुमोदन के पश्चात ही समाप्त की जा सकती है, लेकिन योगेन्द्र प्रसाद की विधानसभा की सदस्यता बिना राज्यपाल के अनुमोदन के ही समाप्त कर दी गई। जो असंवैधानिक है।

उन्होंने यह बातें राज्यपाल से मिलने के बाद राजभवन के समक्ष संवाददाताओं से भी कही। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के द्वारा संवैधानिक प्रक्रिया के अनुपालन के बिना ही योगेन्द्र प्रसाद की सदस्यता समाप्त करने की जारी की गई अधिसूचना असंवैधानिक है।

हेमन्त सोरेन ने इस संबंध में राज्यपाल से मिलकर एक ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में वह सारी बाते लिखी गई है, जो योगेन्द्र प्रसाद से संबंधित है। ज्ञापन में इस बात का जिक्र किया गया है कि 31 जनवरी 2018 को दोष सिद्धि के उपरांत योगेन्द्र प्रसाद द्वारा अपर सत्र न्यायाधीश 1 रामगढ़ के न्यायालय में सजा के विरुद्ध दिनांक 1 फरवरी 2018 को अपील दायर की गई, इस पर सुनवाई दिनांक 2 फरवरी एवं 6 फरवरी को हुई तथा निर्णय के लिए 19 फरवरी 2018 की तिथि माननीय न्यायाधीश द्वारा निर्धारित की गई, परन्तु बिना न्याय निर्णय के प्रतीक्षा किये आनन-फानन में संवैधानिक प्रक्रिया पूरा किये बिना ही माननीय अध्यक्ष विधानसभा द्वारा योगेन्द्र प्रसाद की सदस्यता समाप्त कर दी गई। इस प्रकार सदस्यता समाप्त करना संदेह को जन्म देता है, ऐसा लगता है कि किसी राजनीतिक दबाव में आकर विधानसभाध्यक्ष ने ऐसा निर्णय लिया।

इसी बीच 19 फरवरी को अपर सत्र न्यायाधीश 1 रामगढ़ द्वारा योगेन्द्र प्रसाद को अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी रामगढ़ द्वारा दिनांक 31 जनवरी 2018 को दी गई सजा और सजा के आदेश के संचालन, निष्पादन और क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।

नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने राज्यपाल से गुहार लगाई है कि चूंकि माननीय न्यायालय द्वारा सजा के आदेश के संचालन, निष्पादन और क्रियान्वयन पर रोक लगा दी गई है और बिना संवैधानिक प्रक्रियाओं को पुरा किये, जिस प्रकार से स्पीकर ने योगेन्द्र प्रसाद की सदस्यता को समाप्त कर दिया, ऐसे में योगेन्द्र प्रसाद की सदस्यता पुनः बहाल करने में, तथा संविधान की रक्षा करने में, वे उनकी मदद करें।

हेमन्त सोरेन ने पूर्व में इसी प्रकार की घटित घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी कई घटनाएं पूर्व में घटी है, जिसके आधार पर कई ऐसे विधायकों की सदस्यता पुनः बहाल कर दी गई, जिनकी सदस्यता पूर्व में समाप्त कर दी गई थी। हेमन्त सोरेन ने सबूत के तौर पर पूर्व में घटित घटनाओं की कॉपियों की एक प्रति भी राज्यपाल को सौंपी।