राजनीति

CM रघुवर दास ने झारखण्ड स्थापना दिवस के अवसर पर जनता की आंखों में धूल झोंका

जब राज्य का मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति और राज्यपाल के समक्ष जनता की आंखों में धूल झोकने की कोशिश करें, तो इसे आप क्या कहेंगे?  जरा सीएम का मोराबादी मैदान में, दिया गया आज का भाषण देखिये, सीएम रघुवर दास ने कहा है कि इज आफ डूइँग बिजनेस के मामले में भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए झारखण्ड ने वर्ष 2015 में पूरे देश में तृतीय स्थान प्राप्त किया है तथा लगातार अग्रणी स्थान पर बना हुआ है, जरा मुख्यमंत्री रघुवर दास और मुख्यमंत्री रघुवर दास का भाषण तैयार करानेवाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी से पूछिये कि भाई ये साल 2017 चल रहा हैं, आप 2015 की बात क्यों कर रहे हो? क्या इज आफ डूइंग बिजनेस तैयार करनेवाली संस्था ने 2015 के बाद नया डाटा तैयार नहीं किया है?

सीएम और उनके अधिकारी इस सवाल का जवाब नहीं देंगे, क्योंकि नये डाटा के अनुसार झारखण्ड इज आफ डूइंग बिजनेस में झारखण्ड सातवे स्थान पर घिसक गया है, अब जो झारखण्ड 2015 में तीसरे स्थान पर था, अब वे सातवें पर कहेंगे तो इनकी इज्जत चली जायेंगी, इसलिए जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भाषण में 2017 का जिक्र करने के बदले 2015 का जिक्र किया, यानी हमारे मुख्यमंत्री को सच बोलने में डर लगता है, सच को स्वीकार करने में डर लगता है।

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अपने भाषण में कहा आज बात सड़कों की हो या बिजली की हो, स्वास्थ्य अथवा शिक्षा की हो हर क्षेत्र में हम बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। जरा पूछिये सीएम रघुवर दास से आपकी सरकार के तीन साल पूरे होने को आये, रांची-टाटा प्रमुख मार्ग का क्या हाल है? जिस सड़क को 2015 में तैयार हो जाना था, क्यों नहीं बना?  जबकि रांची और टाटा झारखण्ड के दो प्रमुख शहर हैं, यानी रांची और टाटा को एक दूसरे से जोड़नेवाली सड़क का बुरा हाल है, पर सरकार को शर्म नहीं हैं, कि हम क्या भाषण दे रहे हैं?

अब बिजली की बात, तो पुछ लीजिये गढ़वा, डालटनगंज, लातेहार, आदि की जनता से वह बता देगी कि वहां बिजली कब आती हैं और कितने देर रहती है?  स्वास्थ्य का क्या हाल है, वो तो पता ही होगा कि कैसे गुमला में एक बच्चा एक रुपये की दवा के अभाव में दम तोड़ दिया और उस बच्चे के शव को ढोने के लिए एक एंबूलेंस तक गुमला अस्पताल में नहीं था, हाल ही में यह भी देखा गया कि एक एँबुलेंस के अभाव में एक महिला ने अपने बच्चे को सड़क पर ही जन्म दे दिया।

और अब शिक्षा की बात, सीएम रघुवर कहते हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में हमने काफी तरक्की की है, वो तो रक्षाशक्ति विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने के बाद डिग्री लेकर नौकरी के लिए घूमते बच्चे और उनके साथ चीटिंग करनेवाली चेन्नई की कंपनी ही बतायेंगी कि यहां शिक्षा का क्या हाल है?  जाइये मुख्यमंत्री सरिता कंडुलना से पुछिये कि कैसे उसने अपने सपनों को पूरा करने के लिए खेत बेचकर नौकरी करने गई थी, पर आप सरिता से मिलेंगे, इस पर हमें शक है?

2014 में जिन सरकारी विद्यालयों को गोद लेने की योजना बनी थी, उसकी क्या हाल है?  आपको पता है? आपके यहां बगैर परीक्षा दिये पॉलिटेक्निक के छात्र परीक्षा पास कर जाते है। अरे आपने तो फर्जी विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू कर पूरे झारखण्ड की शिक्षा व्यवस्था को चौपट कर दिया और आप कहते है कि शिक्षा के क्षेत्र में आपने झारखण्ड को महान बना दिया। भाई आपका जवाब नहीं? कितनी सफाई से झूठ बोलते है, आप।

अरे आपको याद भी रहता है कि आप क्या कहते हैं और क्या करते हैं? अर्चना नामक योग टीचर लड़की को आपने क्या कहा था दो साल पहले, आपने  कहा था कि उसे नौकरी देंगे, आपने उसे दिया, आज भी वह लड़की इधर से उधर भटक रही हैं, और आपके उच्चस्थ पदाधिकारी उसे इधर से उधर टहला रहे हैं, आपकी तो हिम्मत ही नहीं कि उस लड़की से आप नजर से नजर मिलाकर बात कर सकें, धिक्कार है, ऐसी व्यवस्था पर जहां एक लड़की के साथ इतना बड़ा धोखा, वह भी मुख्यमंत्री पद पर बैठा व्यक्ति कर जाता है।

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यह भी कहा कि राज्य में औद्योगिक माहौल को पुनर्जीवित करने हेतु इसी वर्ष मोमेंटम झारखण्ड तथा झारखण्ड माइनिंग शो का सफल आयोजन सरकार द्वारा किया गया, जिसमें देश-विदेश की कई छोटी-बड़ी कंपनियों ने भाग लिया, सच्चाई यह है कि एक भी विदेशी कंपनी झारखण्ड में नहीं आई और न ही देश की ही कोई प्रतिष्ठित कंपनी ने झारखण्ड में इस दौरान रुचि दिखाई है, और जो भी इसकी सफलता के लिए सरकार कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं, वह सिर्फ धूल झोंकने के अलावे कुछ भी नहीं।

हद तो ये हो गई कि झारखण्ड स्थापना दिवस के मंच निर्माण व साज-सज्जा के लिए इस सरकार ने बिना निविदा संख्या के ही कोटेशन निकाल दिया, यानी सारे नियम को ताक पर रखकर यहां काम हो रहा हैं, तो ऐसे में, सभी को एक बात मानना पडेगा। हमारे मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति और राज्यपाल के समक्ष बड़ी चालाकी से जनता की आंखों में धूल झोंक देते है। जो चालाक लोग हैं, महाधूर्त हैं, उन्हें सीएम रघुवर दास से ये कला सीख लेनी चाहिए, ताकि भविष्य में वे इस प्रकार की चालाकी योग के द्वारा, झारखण्ड की जनता को बेहतर ढंग से उल्लू बना सकें।